खादी हुई स्टाइलिश, यूथ भी दीवाने

  • खादी के कपड़े ऑनलाइन मिलने से युवा भी जोर-शोर से कर रहे खरीदारी
  • कपड़ों के कलर और डिजाइन में समय के साथ हो रहे एक्सपेरीमेंट को पसंद कर रहे लोग

ऐश्वर्या गुप्ता
captureलखनऊ। खादी के लिए महात्मा गांधी का प्यार तो जगजाहिर है। पहले खादी से बने कपड़ों को केवल बापू या उनके विचारों का अनुसरण करने वाले लोग पहनते थे। इसके बाद घर के बड़े बुजुर्ग और राजनीति से संबंध रखने वाले लोग भी खादी पहनने लगे। लेकिन धीरे-धीरे चीजें बदल रही हैं। अब युवा भी खादी के कपड़ों, रंगों और स्टाइल में बदलाव की वजह से आकर्षित हो रहा है। युवाओं में भी खादी के कपड़े पहनने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। खादी की शर्ट, जैकेट और कुर्ता-पैजामा युवाओं की पहली पंसद बन चुका है। इसी वजह से बाजारों में आजकल डिजाइनर खादी के कपड़ों की भरमार है। युवाओं को ध्यान में रखकर खादी के कपड़े डिजाइन किए जा रहे हैं। इससे बिक्री में भी काफी बढ़ोतरी हो रही है।
आज से करीब पांच साल पहले तक खादी के कपड़ों की मांग बहुत कम थी। इसलिए केवल गांधी आश्रम में ही खादी के कपड़े मिलते थे। लेकिन आज हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। अब तो बड़ी-बड़ी कंपनियां युवाओं को ध्यान में रखकर ब्राण्डेड खादी के कपड़े बना रही हैं। इसलिए शहरों में जगह-जगह खादी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसे युवा सबसे अधिक पंसद कर रहे हैं।

गांधी आश्रम में काम करने वाले शंकर गुप्ता कहते हैं कि बदलते वक्त के साथ खादी के कपड़ों की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इन कपड़ों की बिक्री पर राज्य सरकार की तरफ से टैक्स पर 10 प्रतिशत की छूट भी दी जाती है। इसलिए युवाओं में खादी कपड़ों के प्रति उत्साह देखते ही बनता है। इस साल कपड़ों की बिक्री का आंकड़ा पांच करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। इसमें और अधिक इजाफा होने की उम्मीद है क्योंकि सर्दी का सीजन शुरू हो गया है।

ऑनलाइन डिमांड

मुरादाबाद के खादी व्यवसायी धीरज के मुताबिक पिछले दो तीन सालों से युवा खादी के कपड़ों में दिलचस्पी लेने लगे हैं। इसलिए हमने अपने व्यवसाय को ऑनलाइन कर लिया है। अब युवाओं को खादी के कपड़े खरीदने में सहूलियत मिलने लगी है। कपड़ों की ऑनलाइन बुकिंग करने वालों में युवाओं की संख्या अधिक रहती है। इन दिनों युवाओं के बीच खादी के कुर्ते और शर्ट्स कम्फर्ट और कूल स्टेटमेंट की वजह से काफी डिमांड में हैं।

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