क्वीन मेरी: गर्भवती की मौत मामले में जांच के आदेश, चिकित्सकों में हडक़ंप

  • लापरवाह चिकित्सकों पर हो सकती है कार्रवाई
  • दो दिन भटकने के बाद भी गर्भवती को नहीं मिला था इलाज

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी स्थित केजीएमयू के महिला अस्पताल क्वीन मेरी में शनिवार को गर्भवती के इलाज में लापरवाही के कारण हुयी मौत के मामले को प्रदेश सरकार के परिवार व कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने गंभीरता से लिया। मंत्री ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिये हैं। आदेश के बाद जांच शुरू हो गई है। इससे चिकित्सकों में हडक़ंप है। श्री मेहरोत्रा ने मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा को निर्देश दिया है कि वे जल्द-जल्द से उच्चस्तरीय जांच करा कर दोषी चिकित्सकों तथा अन्य स्टाफ के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करें।
परिवार व कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि बाराबंकी निवासी दयाराम की गर्भवती पत्नी के इलाज में यदि लापरवाही हुई है, तो उस चिकित्सक के विरूद्ध कठोर कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि बाराबंकी के फतेहपुर निवासी दयाराम की 40 वर्षीय पत्नी दयावती पांच माह की गर्भवती थी। उसका इलाज बाराबंकी के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। हालत गंभीर होने पर उसे निजी अस्पताल से जिला अस्पताल बाराबंकी रेफर किया गया था। जहां से परिजन उसे लेकर गुरुवार को क्वीन मेरी अस्पताल लाया। दयाराम ने बताया कि उस समय इमरजेंसी में मौजूद रेजिडेंट्स ने उन्हें बैरंग लौटा दिया और कहा कि यहां बेड खाली नहीं है। इसके बाद निराश परिजन वापस उन्हें लेकर बाराबंकी आए। हालत बिगडऩे पर वह शनिवार की सुबह 10 बजे वापस अस्पताल लेकर आए, जहां गर्भवती को भर्ती कर लिया गया, लेकिन इलाज नहीं किया गया। दयाराम ने आरोप लगाया कि लगभग दो घंटे तक दयावती को भर्ती रखा गया। उनसे किसी को मिलने नहीं दिया गया, न ही उसका किसी तरह से इलाज किया गया। इसके बाद रेजिडेंट डॉक्टरों ने उसकी मौत की सूचना दी।

क्या चिकित्सकों पर होगी कार्रवाई

क्वीन मेरी अस्पताल के चिकित्सकों पर आये दिन गर्भवती के इलाज में लापरवाही का आरोप लगना आम है। जानकारों की मानें तो सही समय पर इलाज न मिलने से कई प्रसूताओं की मौत पहले भी हो चुकी है, लेकिन आज तक किसी चिकित्सक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां के चिकित्सकों को कानून का भी भय नहीं रहा है। इसका खुलासा कुछ महीने पहले परिवार कल्याण मंत्री रविदास मेहरोत्रा के दौरे के समय हो चुका है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मंत्री रविदास मेहरोत्रा अस्पताल का दौरा करने पहुंचे थे। उनके साथ लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएनएस. यादव भी थे। मंत्री को अस्पताल में आया देख मरीज के परिजनों ने इलाज में लापरवाही समेत अन्य समस्या उनके सामने रखनी शुरू कर दी। सबसे ज्यादा समस्या जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले रुपयों को लेकर की गई थी। तीन दर्जन से ज्यादा लोग सात महीनों से जेएसवाई का पैसा पाने के लिए भटक रहे थे। इस बात की जानकारी जब मंत्री ने वहां की चिकित्सक डॉ.विनीता दास से ली तो उन्होंने बजट का अभाव बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया । इस पर सीएमओ ने बजट का अभाव न होने की बात मंत्री को बताई तो डॉ. विनीता दास ने डांटते हुए कहा कि मिस्टर सीएमओ ये आपका अस्पताल नहीं केजीएमयू है। आप अपनी बात यहां न चलाएं।

Pin It