क्या छिपा है पुतिन के अप्रत्याशित कदम के पीछे?

रूस ने 30 सितम्बर 2015 को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ लड़ रहे इस्लामी राज्य और अन्य आतंकवादी दलों के खिलाफ जबरदस्त वायुसैनिक अभियान शुरु किया था, जिसमें पहले ही दिन से परमाणु सक्षम दूर मारक भारी बमवर्षकों तथा क्रूज मिसाइलों का व्यापक प्रयोग किया गया।

विनय शुक्ला
सोमवार 14 मार्च की रात को रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने सीरिया से अपनी सेनाओं की वापसी का आदेश दे कर अपने मित्रों और अमित्रों दोनों को ही आश्चर्यचकित कर दिया। देश के रक्षा मंत्री जनरल सेर्गेई शोइगू के साथ रूसी टीवी पर प्रसारित अपनी भेंट में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि सीरियाई अभियान के लक्ष्य को प्राप्त कर लिया गया है और मंगलवार 15 मार्च से मुख्य शक्तियों को वहां से वापस बुलाने का काम शुरू हो जायेगा।
साथ ही राष्टï्रह्वपति पुतिन ने ऐलान किया कि रूसी सेना सीरिया के भूमध्य सागर तट पर तार्तुस नौसैनिक अड्डे और लताकिया प्रान्त के ह्मेइमिम वायुसैनिक अड्डे पर तैनात रहेगी। वहां तैनात शक्तियों का लक्ष्य युद्धविराम को सुनिश्चित करना होगा।
रूस ने 30 सितम्बर 2015 को सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ लड़ रहे इस्लामी राज्य और अन्य आतंकवादी दलों के खिलाफ जबरदस्त वायुसैनिक अभियान शुरु किया था, जिसमें पहले ही दिन से परमाणु सक्षम दूर मारक भारी बमवर्षकों तथा क्रूज मिसाइलों का व्यापक प्रयोग किया गया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी लड़ाकू विमानों ने 9000 हजार से अधिक हवाई हमलों में भाग लिया जिनके फलस्वरूप 400 से अधिक सीरियाई गांवों और कस्बों को मुक्त कराया गया और देश की सरकार ने 10 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर फिर से नियंत्रण बहाल किया। उल्लेखनीय है कि क्रेमलिन की घोषणा उस समय हुई जब रूस, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से जेनेवा में सीरिया शांति वार्ता का श्रीगणेश हुआ। तो जरा गौर करें कि गत साढ़े पांच महीनों में रूस ने सीरिया में क्या खोया और क्या पाया? इसका उत्तर स्वयं राष्ट्रपति पुतिन ने 17 मार्च को सीरिया अभियान से लौटे सैनिकों और अफसरों को क्रेमलिन के आलीशान सेंट जार्ज हाल में संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने घोषणा की कि इस अभियान पर 33 अरब रूबल यानी लगभग 48 करोड़ डालर खर्च हुए जो रक्षा मंत्रालय के युद्धाभ्यासों के लिए इस साल के लिए नियत बजट से लिए गए।
सैनिकों और सेनाधिकारियों को देश के सर्वोच्च पुरस्कारों से सम्मानित करते हुए पुतिन ने कहा कि सीरिया अभियान के लक्ष्य प्राप्त करने के बाद ही सेना की वापसी संभव हुई। बकौल पुतिन के, सीरिया की कानूनी सरकार को आतंकवादियों से लडऩे में समर्थ बनाकर सरकार विरोधी सशस्त्र दलों को शांति वार्ता के लिए प्रेरित करना, सीरिया में जमा रूस के लिए खतरा पैदा करने वाले रूसी और अन्य भूतपूर्व सोवियत देशों के जिहादियों और आतंकवादियों को नष्ट करना रूसी एरोस्पेस फोर्सेस के अभियान के प्रमुख लक्ष्य थे। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार साढ़े पांच महीनों के अभियान के दौरान रूस और अन्य भूतपूर्व सोवियत देशों से आतंकवादी ‘इस्लामी राज्य’ में शामिल हुए 2000 जिहादियों को नष्ट कर दिया, यही नहीं रूसी बमवर्षकों ने ‘इस्लामी राज्य’ के सैंकड़ों तेल प्रतिष्ठानों और हजारों टेंकर ट्रकों को नष्ट करके, तुर्की के रास्ते तेल की तस्करी का अंत करके आतंकवादियों की आय के मुख्य स्रोत को खत्म कर दिया।
राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार युद्ध की वास्तविक परिस्थितियों में रूसी सशस्त्र सेनाओं को अपने अत्याधुनिक और नवीनतम अस्त्रों और प्रणालियों को सफलता से परखने का भी मौका मिला।
साथ ही उन्होंने आगाह किया कि युद्धविराम टूटने और स्थिति बिगडऩे की हालत में आवश्यकतानुसार कुछ ही घंटों में रूसी विमान लौट आयेंगे। पुतिन ने यह भी कहा सीरिया में स्थित रूसी नौ- तथा वायुसैनिक अड्डों और वहां बचे सैनकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक विमानभेदी एस-400 मिसाइल सिस्टम्स तैनात रहेंगे और यह कड़ी चेतावनी दी कि अमेरिका के साथ अप्रत्याशित टकराव से बचने के समझौते के बावजूद, अगर कोई भी विमान रूसी सैनकों के लिए खतरा पैदा करेगा तो उसे तत्काल गिरा दिया जायेगा। एक तरह से यह तुर्की और सऊदी अरब को चेतावनी है जो ‘इस्लामी राज्य’ से लडऩे के बहाने सीरिया के राष्टï्रपति बशर अल असद की सरकार का तख्ता पलटने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे विचार में सीरया के पांच साल से चले आ रहे गृहयुद्ध में साढ़े पांच महीने पहले 30 सितम्बर 2015 को शुरू हुए रूस केहस्तक्षेप के निम्न परिणाम गौर देने योग्य हैं।
रूसी वायुसेना के समर्थन की बदौलत सीरिया की सरकारी सेना ने स्थिति पर काबू कर लिया, जिसकी बदौलत अमेरिका व अन्य बाहरी शक्तियों द्वारा समर्थित सशस्त्र दल अंतर्सीरियाई शांति वार्ता के लिए राजी हो गए। रूस ने अपनी सैन्य शक्ति को प्रमाणित करके दिखाया कि आज भी दुनिया के महत्वपूर्ण मुद्दों को उसकी सहभागिता के बिना नहीं सुलझाया जा सकता। अगर हम आम आदमी की भाषा को लें, तो रूस से ‘पंगा’ लेकर तुर्की ने अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारी, जब उसने रूसी बमवर्षक को गिरा कर, न केवल रूसी आर्थिक प्रतिबंधों के कारण अरबों डालर गंवाए, बल्कि विद्रोही कुर्दों से संघर्ष में मास्को का मौन समर्थन भी खो दिया। खबर है कि मास्को इराकी कुर्दों को हथियारबंद कर रहा है और तुर्की के निरंतर हमलों का शिकार बने इराकी कुर्दों को सैनिक सहायता और बढ़ाने वाला है।

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