कोर्ट के आदेश को भी ठेंगे पर रखते हैं नगर निगम अधिकारी

  • सुस्त रवैया बढ़ा रहा डेयरी संचालकों के हौसले
  • सिर्फ खानापूर्ति के लिए चलाया जाता है अभियान, डेयरी मालिकों की है मौज
  • अधिकारी कर रहे कार्रवाई का दावा

अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। नगर निगम अधिकारियों का सुस्त रवैया शहर की सूरत बिगाड़ रहा है। यहां अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, जिसकी वजह से डेयरी संचालकों के हौसले बुलंद है और वह बेधडक़ अपना धंधा शहर के बीचोंबीच जमाये हुए हैं। अधिकारियों द्वारा चलाया जाने वाला अभियान भी खानापूर्ति करके बंद हो जाता है। यही कारण है कि न्यायालय के सख्त आदेश व नगर निगम प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी शहर में चल रहे अवैध तबेलों व डेयरियों पर नकेल नहीं कस पा रही है। लगातार कार्रवाई के बाद भी नतीजा सिफर ही रहा है। जिम्मेदारों का कार्य के प्रति सुस्त रवैया न्यायालय के आदेश के पालन में रुकावट बना हुआ है। हालांकि इस पर अधिकारी आगे कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।

अभियान के बाद भी नहीं आ रही कमी

शहर में हजारों की तादाद में अवैध तबेले व डेयरी संचालित हो रही हैं। इनको लेकर जिम्मेदारों द्वारा समय-समय पर अभियान चलाकर छापामार कार्रवाई भी की जाती है। इसके बाद भी शहर में इनकी तादाद में कोई कमी नहीं आ रही है। शहर में जगह-जगह सैकड़ों अवैध डेयरी संचालित की जा रही हैं। इनसे होने वाली गंदगी से क्षेत्र में तरह-तरह की बीमारियां पनप रही हैं।

शहर में हजारों डेयरियां कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति

जिम्मेदारों की सुस्त कार्य प्रणाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर भर में हजारों डेयरियां संचालित हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से मात्र कुछ ही डेयरी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। शहर के बीचोंबीच डेयरियां चलने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसकी कई बार शिकायत भी क्षेत्रवासी करने नगर निगम पहुंचते हैं। तब भी अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं।

निगम की फाइल कुछ और ही कर रही बयां

शहर में हजारों अवैध डेयरी व तबेले संचालन के बाद भी नगर निगम की फाइल ये बयां करती हैं कि लखनऊ भर में मात्र 14 गाय हैं, जबकि शहर की सडक़, मोहल्ले कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं, जिनमें से कुछ आवारा और कुछ पालतू होते हैं। पशु चिकित्सा अधिकारी अरविंद राव ने बताया कि वर्तमान में निगम में कुल 14 गाय ही रजिस्टर्ड हैं।

हो रही है कार्रवाई

पशु चिकित्सक अधिकारी अरविंद राव बताते हैं कि अवैध तबेले व डेयरी संचालकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। स्वयं और शिकायती पत्रों के आधार पर निरीक्षण किया जाता है और दोषियों के खिलाफ नोटिस भेजकर कानूनी कार्रवाई की जाती है।

सुस्त कार्य प्रणाली बढ़ा रही डेयरी संचालकों का हौसला

न्यायालय की ओर से इन पर अंकुश लगाने के लिए सख्त आदेश भी हैं। लेकिन शहर में चल रहे अवैध तबेले और डेयरियों से जिम्मेदार अनजान हैं। जिम्मेदारों की सुस्त कार्य प्रणाली और अनदेखी डेयरी संचालकों का हौसला बढ़ा रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रांसपोर्ट नगर एफ और एस ब्लॉक व जोन छह स्थित शेखपुर में सालों से अवैध तबेले व डेयरी संचालित हो रही हैं। लेकिन अभी तक इन पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकी है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में खाली प्लाट में डेयरी संचालकों का कब्जा है। इनसे निकलने वाली गंदगी और क्षेत्र की खराब स्थिति से क्षेत्रवासियों का जीना दुश्वार हो गया है। बारिश के मौसम में तरह-तरह की बीमारियां पनपने लगती हैं। लेकिन लिखित व कंट्रोल रूम पर शिकायत करने के बाद भी इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं।

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