कोर्ट के आदेश के बाद भी दर्जनों चिकित्सकों को नहीं मिला सेवा लाभ

स्वास्थ्य महानिदेशालय की लेटलतीफी से अधिकारों से वंचित रह गये चिकित्सक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जागी आशा की किरण

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

captureलखनऊ। स्वास्थ्य महकमे के उच्च अधिकारी हाईकोर्ट तक के फैसलों को मानने से इन्कार कर रहे हैं। वे कोर्ट के आदेशानुसार अस्थायी तौर पर नियुक्त चिकित्सकों को नियुक्ति की तिथि से लाभ देने के बजाय समायोजन की तिथि से लाभ देने की बात पर अड़े थे। इस मामले में डॉ. विनय कुमार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की दलीलों को अस्वीकार करते हुए पूर्व में हाईकोर्ट की तरफ से दिए गए फैसले के अनुसार कर्मचारियों को लाभ दिलाने का आदेश दिया गया। इसलिए डॉ. विनय के अलावा 70 अन्य चिकित्सकों को भी न्याय की उम्मीद नजर आने लगी है।
प्रदेश सरकार ने सूबे के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए 1990 में लोक सेवा आयोग के अलावा अस्थायी नियुक्तियों के आधार पर चयनित चिकित्सकों को अस्पतालों में रखा था। बाद में इन्हीं चिकित्सकों को विभाग में समायोजित कर लिया गया । लेकिन इन चिकित्सकों को अस्थायी तौर पर रखने के समय से मिलने वाला लाभ नहीं दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन सभी चिकित्सकों को समायोजन की तिथि से लाभ देने का निर्णय लिया जबकि अस्थायी नियुक्तियों के आधार पर चयनित अधिकारी नियुक्ति की तिथि से लाभ मिलने की मांग कर रहे थे। इसको अपना अधिकार बता रहे थे। लेकिन स्वास्थ्य महकमा अपनी जिद पर अड़ा था।
इसलिए डॉ. विनय कुमार ने स्वास्थ्य महकमे के अडिय़ल रुख के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने डॉ.विनय कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया और स्वास्थ्य महकमे को निर्देशित किया कि उन्हें नियुक्ति की तिथि से लाभ दिया जाय। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की जानकारी लेने के बाद स्वास्थ्य महकमे की याचिका को खारिज कर दिया और हाईकोर्ट द्वारा दिये गये फैसलों को बरकरार रखा। वहीं डॉ. विनय को सभी अधिकार देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद डॉ.विनय कुमार के अलावा लगभग 70 और चिकित्सकों को उनका अधिकार मिलने की उम्मीद बंधी है। गौरतलब है कि इनमें से ज्यादातर चिकित्सक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन कोर्ट का फैसला उनके लिए संजीवनी साबित हुआ है।

बाबू का काम कर रहे चिकित्सक

प्रदेश के चिकित्सकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फैसले में से एक विशिष्ट एसीपी को लागू करने में स्वास्थ्य महानिदेशालय तथा शासन स्तर के अधिकारियों ने दो साल से ज्यादा का समय लगा दिया। उसके बाद भी विशिष्टï एसीपी में शामिल चिकित्सकों की लिस्ट तक फाइनल नहीं कर पाये। हद तो तब हो गयी जब लिस्ट बनाने के लिए छह चिकित्सकों को लगा दिया गया। ये चिकित्सक अब मरीजों को न देखकर स्वास्थ्य महानिदेशालय में एसीपी के लिए लिस्ट तैयार करने में लगे हैं। जहां एक तरफ प्रदेश में चिकित्सकों की भारी कमी बनी हुई है, वहीं चिकित्सकों से बाबूगिरी कराई जा रही है। यह स्वास्थ्य महानिदेशालय तथा कार्मिक विभाग के अधिकारियों की नाकामी है, जिसके बाद चिकित्सकों को लिस्ट बनाने के लिए लगाना पड़ा है। अब तक विशिष्टï एसीपी के लिए 403 चिकित्सकों की लिस्ट बनकर तैयार हो पाई है, जबकि लगभग 11 हजार चिकित्सक अभी भी बाकी हैं।
प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ के महासचिव डॉ. सचिन वैश्य ने बताया कि संवर्ग के 11 हजार चिकित्सक एसीपी एवं विभागीय प्रोन्नतियों की प्रतीक्षा करते-करते सेवानिवृत्त हो रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत दु:खदायी है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारियों को पेंशन पुनर्निर्धारण कराने के लिए शासन एवं महानिदेशालय की शिथिलता के कारण चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

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