केंद्र सरकार की योजनाओं के सहारे सपा को पटखनी देने की फिराक में भाजपा

प्रदेश के सबसे बड़े सियासी परिवार में कलह के बाद बदले माहौल को भुनाने में जुटी पार्टी
केंद्र की कई योजनाओं के लिए प्रदेश सरकार ने नहीं भेजे प्रस्ताव, चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी

captureसुनील शर्मा
लखनऊ। यूपी में होने वाले विधान सभा चुनाव के पूर्व अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी भाजपा ने विभिन्न मुद्दों पर प्रदेश सरकार को घेरने की योजना बनाई है। भाजपा मोदी सरकार की योजनाओं को आधार बनाकर प्रदेश सरकार को नाकाम साबित करने में जुट गई है। भाजपा नेताओं के मुताबिक केंद्र की तमाम योजनाओं का लाभ आमजनता को इसलिए नहीं मिला कि यूपी सरकार ने उसे लागू ही नहीं किया। इसके लिए केंद्र सरकार के मंत्रालयों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इसे पार्टी विधानसभा चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाकर अखिलेश सरकार को निशाना बनायेगी, जिससे यह साबित करने का प्रयास किया जाएगा कि प्रदेश सरकार की वजह से जनता को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिला।

उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विकास के नए आयाम गढ़े हैं। युवा मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहचान बना चुके अखिलेश को तमाम विरोधों का भी सामना करना पड़ा। इन सबसे जूझते हुए उन्होंने तमाम जनहित योजनाओं को अमलीजामा पहनाया। सरकार के करीब साढ़े चार साल बाद मुख्यमंत्री को अपने ही परिवार के लोगों का कड़ा विरोध झेलना पड़ा है। प्रदेश के सबसे बड़े सियासी कुनबे में महीनों चली कलह के बीच मुख्यमंत्री अपने को मजबूत साबित करने में भी सफल रहे। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में उनका कद और बढ़ गया है। जोकि विपक्षियों की चिंता का सबब बन गया है। इसी वजह से अखिलेश का तोड़ ढूढऩे की तैयारी सभी विपक्षी दलों ने कर दी है। भाजपा ने तो इसके लिए बाकायदा रणनीति बनाई है। पार्टी नेता केंद्र से अखिलेश सरकार को मिले लाभ के आंकड़े जुटा रहे हैं। इसमें वे योजनाएं प्रमुखता से शामिल की जाएंगी, जिसे अखिलेश सरकार ने राजनीतिक विरोध के चलते प्रदेश में लागू नहीं किया है। भाजपाइयों का मानना है कि ये योजनाएं लागू होतीं तो आमजन को व्यापक लाभ मिलता।

प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नहीं भेजा प्रस्ताव
गरीबों को छत मुहैया कराने की मंशा से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना बनाई है। इसके तहत गरीबों को मकान बनाने के लिए केंद्र सरकार सहायता राशि मुहैया कराएगी। केन्द्र ने सभी राज्य सरकारों से इसके लिए प्रस्ताव मांगे हैं। आंकड़ों के मुताबिक केन्द्र सरकार 22 राज्यों में रहने वाले 10 लाख से ज्यादा गरीबों के लिए मकान बनाने की योजना को मंजूरी दे चुकी है। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र सरकार ने 30 लाख मकानों के प्रस्ताव का कोटा निर्धारित कर रखा है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने अभी तक प्रस्ताव नहीं भेजा है। भाजपा के मुताबिक प्रदेश में बड़ी आबादी मकान से महरूम है। ऐसे में प्रस्ताव न भेजा जाने को मुद्दा बनाकर यूपी सरकार को संवेदनहीन साबित करने की कोशिश की जा रही है। इसको चुनाव के वक्त भी भुनाया जायेगा।

लाखों लोगों का पैसा बिल्डरों ने दबाया
बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाने व आम जन को राहत दिलाने की मंशा से केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से रियल स्टेट्स पर सख्त नियम बनाने की अपेक्षा की थी। भाजपा के मुताबिक प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में ही बिल्डरों ने लाखों ग्राहकों का पैसा दबा रखा है। बिल्डरों द्वारा न तो उन्हें मकान दिया जा रहा है और न ही उनका पैसा वापस किया जा रहा है। ऐसे में यूपी सरकार को सख्त नियम बनाने चाहिए थे। लेकिन छह महीने बीतने के बाद भी नियम नहीं बनाए गए। भाजपा प्रचार के दौरान केंद्र सरकार द्वारा आम हितों के लिए किए गए कार्यों को प्रमुखता से जनता के सामने रखेगी। इसमें रेलवे द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए चलाई गई ट्रेनों व रोड ट्रांसपोर्ट मंत्रालय द्वारा बनाए गए हाइवे का आंकड़ा भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय मंत्रालयों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल भी चुनाव प्रचार में किया जाएगा।

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