कृषि विभाग की भूमि सेना योजना में करोड़ों की हेराफेरी

  • जांच टीम के गठन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई भ्रष्टï अफसरों की करतूत का खामियाजा भुगत रहे लोग

 अंकुश जायसवाल

captureलखनऊ। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट भूमि सेना योजना घोटाले भी भेंट चढ़ गया है। कृषि विभाग के भ्रष्टï अफसरों ने प्रदेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में सेंध लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसकी भनक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लगी, तो उन्होंने कानपुर में भूमि संरक्षण के कार्यों की जांच करवाई, जिसमें विभागीय कर्मचारियों द्वारा घोटाले की पुष्टिï की बात सच पाई गई। मामले की जांच करने वाली टीम ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दिया, जिसमें कहा है कि भूमि सेना योजना का अधिकतर कार्य कागजों पर करके करोड़ों रुपए की हेराफेरी की जा रही है। इसके बाद जांच करने वाली टीम ने भी कृषि विभाग के घपलेबाज अफसरों को निलंबित करवाने और सतर्कता जांच कराने की सिफारिश को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। 

क्या है मामला

बता दें कि भूमि सेना योजना प्रदेश सरकार की गांव के बेराजगारों को काम देने की योजना है। योजना के तहत ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने के साथ ही भूमि सेना योजना का मकसद गांव के गरीब बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने है। उधर, सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए कृषि विभाग के भ्रष्टï अफसरों द्वारा गांव के मजदूरों से कार्य न कराकर ट्रैक्टर के माध्यम से कार्य कराये जाने का मामला सामने आया था। इस मद में 4,11,700,00 रुपए खर्च दिखाए गए हैं। यह सारा कार्य बगैर टेण्डर प्रक्रिया के सम्पन्न कराया गया है। पूर्व राज्य कृषि मंत्री मनोज पाण्डेय के कानपुर के औचक निरीक्षण में भूमि सेना योजना का यह फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया था। इस मामले की जांच के लिए राज्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इसलिए मामले को गंभीरता से लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जांच कराए जाने के आदेश दिया था।

शासन के निर्देश पर गठित हुर्ई पांच सदस्यीय टीम

घोटाले की जांच के लिए शासन के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया था। इस संयुक्त जांच टीम में पूर्व निदेशक विनय प्रकाश श्रीवास्तव, पूर्व अपर निदेशक प्रमोद कुमार पाण्डेय, सह प्राध्यापक आरएस वर्मा, लेखाकार संदीप चौधरी और प्रभारी वैयक्तिक अधिकारी एनके श्रीवास्तव शामिल थे। संयुक्त जांच टीम ने 9-10 सितम्बर तक भूमि संरक्षण इकाई कानपुर शीशपुर परियोजना नगर की स्थलीय और अभिलेखों की जांच की। लेकिन शासन द्वारा गठित जांच टीम के पहुंचने से पहले ही संबंधित अधिकारी और कर्मचारी छुट्टी लेकर भाग गए, जिससे घपला पकड़ में न आए। लेकिन जांच टीम ने तमाम ऐसे बिन्दु पकड़े, जिनसे साबित हो रहा है कि भूमि सेना योजना का अधिकतर कार्य कागजों पर ही हुआ है।

भ्रष्टï अफसरों की करतूत का खामियाजा भुगत रही जनता

ऊसर भूमि को उपजाऊ बनाने के साथ ही भूमि सेना योजना का मकसद गांव के गरीब युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का है। सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए गांव के मजदूरों से कार्य न कराकर ट्रैक्टर के माध्यम से कराए जाने का दावा किया गया है। मद में 4,11,700,00 खर्च दिखाए गए हैं। यह सारा कार्य बगैर टेण्डर प्रक्रिया के सम्पन्न कराया गया है। जांच टीम ने संभावना व्यक्त किया है कि भूमि सेना योजना के तहत एक ही जिले में जब अधिकतर कार्य कागजों पर हुए हैं तो सम्पूर्ण जिले में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गई है।
अफसरों पर कार्रवाई गई ठंडे बस्ते में
सूत्रों की मानें तो जांच टीम ने अब कृषि विभाग के कानपुर के घोटालेबाज अफसरों को निलम्बित कर सर्तकता से जांच कराए जाने की सिफारिश को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इस पर कृषि विभाग के संगठन ने मांग की है कि भूमि संरक्षण इकाई कानपुर शीशपुर परियोजना के सभी अधिकारी और कर्मचारियों को निलम्बित किया जाए। इसके साथ ही इस मामले की जांच सतर्कता से कराई जाए, जिससे दोषी लोगों को सजा मिल सके।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस संबंध में जब कृषि निदेशक ज्ञान सिंह ने संपर्क किया गया, तो उनका मोबाइल बंद मिला। वहीं अपर निदेशक भूमि संरक्षण पीसी सिंह ने कहा कि अभी उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि भूमि सेना योजना में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है। इसलिए कुछ भी कह पाने में अक्षम हैं।

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