‘कुदरत का अनमोल तोहफा है ज़िन्दगी

प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। जिस उम्र में लड़कियां अपने करियर के बारे में सोचती भी नहीं है, उस उम्र में जिंदगी पर किताब लिखना बड़ी बात है। लखनऊ की प्रतीक्षा चौहान ने 22 साल की उम्र में जिन्दगी से जुड़े महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ‘इज दिस व्हाट लाइफ इज़’ नाम की किताब लिख कर लड़कियों के सामने एक मिशाल पेश की है। इस किताब में उन्होंने जीवन और उसकी अहमियत से जुड़ी बातों को बहुत ही खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किया है। प्रतीक्षा मानती हैं कि जिंदगी से बढकर जीवन में कुछ भी नहीं है। भगवान की बनाई हुई दुनिया बहुत ही खूबसूरत है। इसलिए इंसान को जिंदादिली के साथ जीवन में आने वाली सारी चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए। संघर्षों से हार मानकर जिंदगी खत्म करना बेमानी लगता है। प्रतीक्षा से 4पीएम संवाददाता हिना खान ने उनकी किताब से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बात की, पेश है उसके मुख्य अंश…

Captureआपकी किताब का थीम क्या है ?
मेरी किताब का थीम लडक़े-लड़कियों में फर्क पर आधारित है। जीवन को समझने की कोशिशों पर आधारित है। खासकर यह किताब समाज में उन लोगों को आईना दिखाते हुए मिलेगी जो यह कहते हुए मिलते हैं कि हमारे लिए लडक़े और लडक़ी में कोई फर्क नहीं है। जबकि जमीनी हकीकतों से इसका कोई राब्ता नहीं होता है। यहां तक की घरों में भी यह फर्क देखने को मिलता है। उदाहरण के तौर पर किसी लडक़ी को घर पहुंचने में दस मिनट की भी देरी हो जाए, तो घरवाले यह नहीं सोचते कि ट्रैफिक में फंस गई होगी या किसी भी तरह की समस्या हो गई होगी। घर पहुंचते ही उस लडक़ी को परिवार वालों के कई सवालों का सामाना करना पड़ता है।

आपने किताब का नाम यही क्यों चुना?
मेरी किताब का नाम इज दिस व्हाट लाइफ इज़ है। यह नाम हमारे जीवन में होने वाली घटनाओं से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। हम अकसर सवाल करते रहते हैं कि क्या यही जीवन है। बस मैने अपनी किताब में जीवन के उसी नजरिये को पेश करने की कोशिश की है।

किताब लिखने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
मेरी एक बहुत ही करीबी दोस्त को किसी लडक़े ने फेसबुक पर एक फर्जी आइडी के थ्रू अपने प्यार के जाल में फंसा लिया था। इसके बाद उसको धोखा दे दिया। इस घटना से मेरी दोस्त बहुत दुखी हुई। वह अंदर तक टूट चुकी थी। यहां तक की उसने खुद को खत्म करने का भी प्रयास किया था। इसलिए उसकी हालत देखकर मैने प्यार में धोखा खाने वाली लड़कियों को जागरूक करने और उनको जीवन के महत्व के बारे में बताने के मकसद से किताब लिखने का निर्णय लिया। मेरी किताब में सोशल साइट्स की चकाचौंध भरी दुनियां की हकीकत और वहां मौजूद गंदे लोगों से बचाव से जुड़ी अनेकों बातें लिखी गई हैं।

किताब लिखने में कितना समय लगा?
इस किताब को लिखने में मुझे दो वर्ष का समय लगा। क्योंकि किताब लिखना एक कठिन काम है। इसके लिए मुझे बहुत अध्ययन और रिसर्च करना पड़ा। किताब लिखने के दौरान मैने ऐसी कई लड़कियों से मुलाकात की, जिनके साथ ऐसी घटनाएं घटित हुई थीं। एसिड अटैक से पीडि़त लड़कियों से भी मुलाकात की और उनके जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी
हासिल की।
आपकी ऊर्जा का स्रोत क्या है?
मेरी ऊर्जा का स्रोत मेरी मां हैं। वह समाज के लिए कुछ अच्छा करने के लिए हमेशा प्रेरित करती हैं। मां ने बचपन से ही मुझे आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
इस समय आप क्या कर रही हैं?
मैंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक पीआर कंपनी खोली है, जिसमें केवल लड़कियां काम कर रही हैं। हमारी कंपनी से जुड़ी लड़कियों को आत्मसम्मान के साथ जीने की प्रेरणा दी जाती है। इसके साथ ही उनको अपना भविष्य बेहतर बनाने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश और सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है।

लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?
आजकल इंसान अपनी छोटी-छोटी एक्टिविटी को भी फेसबुक पर अपडेट करता रहता है। इसमें खाना खाने और घर में आराम फरमाने से लेकर घूमने के दौरान की सारी जानकारी फेसबुक पर अपडेट की जाती है। ऐसा करते समय लड़कियां बिल्कुल भी नहीं सोचती हैं, कि वह फेसबुक पर पर्सनल बातें शेयर करके अपने लिए समस्या पैदा कर रही हैं। इतना ही नहीं बहुत सी लड़कियां फेसबुक पर अधिक से अधिक लडक़ों को अपनी फ्रेंड लिस्ट में जोडऩे की कोशिश करती हैं। ऐसा करके वह अपनी बहुत सी दोस्तों के साथ कम्पटीशन करती है लेकिन हकीकत में सोशल साइट्स पर पर्सनल बातों को शेयर करना और अनजान लोगों को दोस्त बनाना खतरनाक होता है। इस आदत से सोशल साइट पर सक्रिय बुरे लोगों को हमारे साथ गलत करने का मौका मिल जाता है। इसलिए लड़कियों को ऐसी हरकतें करने से बचना चाहिए। ऐसा करके ही वह खुद को सुरक्षित रख पाएंगी।

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