कालेधन पर मोदी का पलटवार

‘यह पूरी तरह से साफ है कि यह कोई माफी योजना नहीं है। इसमें कराधान से किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी। ’ इतना ही नहीं यदि यह धन कानूनी तौर पर वैध है और इससे पूर्व में बैंक से निकाला गया है या कानूनी तरीके से कमाया गया और बचाया गया है, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

sanjay sharma editor5प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पिछले ढ़ाई साल से विपक्षी पार्टियां जिस मुद्दे को लेकर बार-बार घेरने की कोशिश कर रहीं थीं, उस पर जोरदार पलटवार करके मोदी ने अपने विरोधियों को चुप करा दिया है। वहीं कालेधन पर सरकार को गुमराह करने वाले भी चारों खाने चित हो गये हैं। ये अलग बात है कि 500-1000 रुपये के नोट बंद होने से आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जनता जेब में पैसे होने के बावजूद मनचाही चीजें खाने और मनपसंद वाली जगहों पर घूमने-फिरने और आने-जाने में भी असमर्थ है। इतना ही नहीं मरीजों का इलाज करवाना भी मुश्किल हो गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंकों में पुराने 500 और 1,000 के नोट जमा कराने पर किसी तरह की ‘कर माफी’ नहीं मिलेगी। ऐसे धन के स्रोत पर कर कानून लागू होगा। सरकार ने मंगलवार को 500 और 1,000 के नोट बंद कर कालेधन, भ्रष्टाचार तथा जाली नोटों पर लगाम की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि ऊंचे मूल्य के नोटों को बैंक खातों में जमा करा कर ही नए और छोटे मूल्य के नोट हासिल किए जा सकते हैं। ‘यह पूरी तरह से साफ है कि यह कोई माफी योजना नहीं है। इसमें कराधान से किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी। ’ इतना ही नहीं यदि यह धन कानूनी तौर पर वैध है और इससे पूर्व में बैंक से निकाला गया है या कानूनी तरीके से कमाया गया और बचाया गया है, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन यदि यह गैरकानूनी पैसा है, तो परेशानी की बात है।’’ जिन गृहणियों तथा किसानों ने रूप में बचत की है, उन्हें बैंक खातों में पैसा जमा कराने को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। यदि लोग छोटी राशि मसलन 25,000 रुपये, 30,000 या 50,000 रुपये जो घर में खर्च के लिए पड़ा है उसे जमा कराना चाहते हैं तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। वे बैंकों के पास बेधडक़ जा सकते हैं। ये अलग बात है कि इनके स्थान पर बदलने के लिए नोटों की उपलब्धता में कमी हो सकती है, लेकिन दो-तीन सप्ताह में अधिक नोटों की आपूर्ति के बाद सब सामान्य हो जायेगा।
कालाधन को लेकर सरकार की कोशिशों का असर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर ज्यादा पड़ा है। इनके लिए रोजमर्रा की चीजों का इंतजाम, इलाज और आवागमन मुश्किल हो गया है। ऐसे में आम जनता की नाराजगी का खामियाजा भी केन्द्र सरकार को भुगतना पड़ सकता है लेकिन मोदी के फैसले की प्रशंसा करने वालों की संख्या अधिक है। इसलिए सरकार को जनता की समस्याओं का जल्द समाधान निकालना होगा।

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