काला धन: नोट बंद होने से सियासी गलियारे में भी हडक़ंप, मोदी सरकार को कोस रहे राजनीतिक दल

  • पांच सौ व हजार के नोट बंद होने पर तिलमिलाए कई राजनीतिक दल
  • प्रदेश में कई बार शासन कर चुकी एक पार्टी की मुखिया पर दिखा खास असर

सुनील शर्मा

captureलखनऊ। पांच सौ व हजार की नोट बंद होने से कई राजनीतिक दल तिलमिला गए हैं। काले धन में जिसकी जितनी हिस्सेदारी है,वह उतना ही परेशान है। कोई पुराने नोटों के चलाने की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहा है तो कोई इसके लिए पानी पी पीकर मोदी सरकार को कोस रहा है। प्रदेश में कई बार शासन चला चुकी एक पार्टी की मुखिया पर इसका खास असर दिख रहा है। वे नोटबंदी को लेकर कई बार मोदी की लानत मलानत कर चुकी हैं। उनकी ये बौखलाहट देखकर तो अन्य राजनीतिक दल भी चुटकी लेने लगे हैं। उनके धुर विरोधी दल के नेता तो उन्हें अब साइकिल चलाने की सलाह देने से भी नहीं चूक रहे हैं।
केंद्र की मोदी सरकार ने आठ नवंबर को अचानक पांच सौ व हजार की नोटों को बंद करने की घोषणा की थी। इसके बाद से कई राजनीतिक दलों की हालत खराब है। उन्हें सूझ नहीं रहा की क्या करें। सरकार के फैसले का विरोध करें या न करें । लेकिन बहुत से नेताओं को अपने काले धन की चिंता सताने लगी। प्रदेश में मौजूदा समय में नंबर एक कही जाने वाली पार्टी के मुखिया नोटबंदी के 36 घंटे बाद विरोध प्रकट करने के लिए सामने आए। आम आदमी की समस्याओं का हवाला देते हुए पुराने नोट चलाने की समय सीमा बढ़ाने की मांग करने लगे। उसी के चंद घंटे के बाद ही उनकी ही पार्टी के एक मंत्री के द्वारा सरकारी पैसों से अपने काले धन को सफेद करने की खबर चलने लगी। जिसकी मंत्री के कई विभागीय अधिकारियों ने पुष्टिï भी की। इसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चा होने लगी कि नेता जी शायद अपने काले धन को सफेद करने के लिए ही समय सीमा बढ़ाने की मांग करे रहे थे। वहीं प्रदेश में कई बार शासन कर चुकी व नंबर दो की पार्टी की मुखिया तो काफी परेशान हैं। खुद को जाति विशेष की देवी बताने वाली पार्टी प्रमुख पर पार्टी का टिकट बेचने का आरोप खुद उन्ही के साथ रहने वाले लोगों ने लगाया। यहां तक कहा गया कि इनके पास हजारों करोड़ रुपए की ब्लैकमनी है। जोकि नगदी के रूप में उनके पास मौजूद है। शायद इसी से नोटबंदी की खबर से सबसे अधिक मिर्ची उन्हीं को लगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक नोटबंदी की घोषणा होते ही उन्होंने अपने कई खास सिपहलारों के साथ कई बार काले धन को सफेद करने के लिए विचार विमर्श किया। लेकिन शिकंजा इतना जबरदस्त निकला कि काले धन को ठिकाने लगाना ही मुनासिब समझा। इसके लिए 48 घंटे तक मैराथन प्रयास हुए। काले धन को ठिकाने लगाने के अलावा अन्य कोई विकल्प न निकलने से नाराज पार्टी मुखिया को 48 घंटे के बाद इसका विरोध करने का ख्याल आया। उसके बाद पत्रकार वार्ता कर मोदी के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली, जिससे उनके पास काले धन की मौजूदगी की चर्चा को और बल मिला। विरोधी दलों ने भी उन पर जमकर चुटकी ली।
पुराना नोट लौटाने की भी है चर्चा

रुपयों के एवज में टिकट देने को लेकर चर्चित पार्टी की मुखिया को लेकर चर्चा है कि नोटबंदी के बाद उन्होंने प्रत्याशियों से लिए गए करोड़ों रुपयों को वापस लौटा दिया है। इसको तब और बल मिला जब पार्टी मुखिया के द्वारा बुलाई गई बैठक समाप्त होने के बाद प्रदेश कार्यालय के अंदर अफरा तफरी का माहौल देखा गया। जिस प्रदेश मुख्यालय कार्यालय परिसर में वाहन ले जाना मना है, वहां नेताओं की गाडिय़ां अंदर तक गईं। कार्यालय में बैठक खत्म होने के बाद घोषित प्रत्याशी व अन्य वरिष्ठï पदाधिकारी बैग व अटैचियों को लेकर अपने वाहनों की तरफ दौड़ते देखे गए।

असमंजस में हैं घोषित प्रत्याशी

टिकटों का पैसा वापस होने के बाद इस काले धन को सफेद करने की जिम्मेदारी मिलने के बाद सभी घोषित प्रत्याशी असमंजस की स्थिति में आ गए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक प्रत्याशी ने बताया कि पहली चिंता ये है कि इस धन को कैसे वैध बनाया जाए। उसके बाद अब दूसरी चिंता उम्मीदवारी कायम रहने को लेकर है। तमाम ऐसे लोग हैं, जो अभी भी टिकट की लाइन में हैं। जोकि किसी तरह नई करेंसी की व्यवस्था कर पार्टी मुखिया को सौंपकर टिकट हासिल करने में कामयाब हो सकते हैं। उनके मुताबिक टिकट के लिए करोड़ों रुपए देने के बाद तमाम पार्टी कार्यक्रमों में भी लाखों का वारा न्यारा हुआ है। इसलिए आगामी चुनाव की चिन्ता सता रही है।

Pin It