कांग्रेस से गठबंधन होगा तभी जब हरी झंडी देंगे अखिलेश यादव

  • कुछ दिन पहले पीके की नेताजी से मुलाकात के समय अमर सिंह थे मौजूद, इसके बाद सीएम ने पीके को नहीं दिया मिलने का समय
  • आज सुबह नेताजी से मिले सीएम, समझाया पार्टी मजबूत स्थिति में, गठबंधन की नहीं है जरूरत
  • कांग्रेस के बड़े नेता भी चाहते हैं कि गठबंधन की बात अगर हो तो सिर्फ अलिखेश से

 संजय शर्मा

captureलखनऊ। कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मुलाकात करके यह मान लिया था कि कांग्रेस से गठबंधन हो जायेगा। मगर यहां वह एक चूक कर गए। इस मुलाकात में अमर सिंह भी मौैजूद थे। अमर सिंह की मौजूदगी ने इस गठबंधन पर सवाल खड़ा कर दिया। अखिलेश पहले ही चाहते थे कि सपा अपने काम के दम पर चुनाव लड़े। अमर सिंह की मौजूदगी में हुई मीटिंग के बाद पीके ने कई बार सीएम से मुलाकात करने की कोशिश की मगर सीएम ने पीके को लिफ्ट नहीं दी। इसके बाद साफ हो गया कि गठबंधन तभी होगा, जब अखिलेश यादव इसके लिए हां कह देंगे।

आज सुबह सीएम अखिलेश यादव ने नेताजी से मुलाकात की और लगभग एक घंटा बातचीत में उनको समझाया कि सपा अगर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी तो उसे ज्यादा फायदा होगा। मुलाकात के बाद अखिलेश ने कहा कि गठबंधन पर अंतिम फैसला नेताजी करेंगे, मगर सीएम ने संकेत दिया कि वह इस गठबंधन से सहमत नहीं है।

उधर कांग्रेस में भी इस गठबंधन को लेकर बहुत बेचैनी है। पीके की सारी रणनीति यूपी में फेल होती नजर आ रही है। उनकी रणनीति के तहत प्रदेश में जितने भी कार्यक्रम हुए उसमें कांग्रेस को फायदा कम नुकसान ज्यादा होता नजर आया। पीके भी नहीं समझ पा रहे कि इतने कम समय में कांग्रेस को मजबूती देने के लिए वह क्या कदम उठाएं। रीता बहुगुणा जैसी नेता के कांग्रेस छोड़ देने से पीके खासे मायूस हैं।
ऐसे में उनकी अंतिम आशा सपा से गठबंधन को लेकर है। कांग्रेस के नेता भी व्यक्तिगत बातचीत में स्वीकार कर रहे हैं कि अकेले चुनाव लडऩे पर कांग्रेस को दो दर्जन सीटें जीतने में भी लाले पड़ जायेंगे। ऐसे में सपा से गठबंधन ही कांग्रेस की इज्जत बचा सकता है।

उधर अखिलेश यादव को समझ आ रहा है कि परिवार में हुए झगड़े के बावजूद उनके प्रति लोगों में पहले से ज्यादा विश्वास पैदा हुआ है। एक सर्वे में भी यह बात सामने आई थी कि प्रदेश में सीएम के रूप में लोगों की पहली पसंद अखिलेश यादव ही हैं। अखिलेश चाहते है कि मेट्रो और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे उद्घाटन के बाद प्रदेश में जोर-शोर से यह मैसेज दिया जाए कि उनकी सरकार ने विकास के कितने काम किए हैं।
उन्होंने आज नेताजी को यही सब बातें समझाई। हालांकि नेताजी का मानना है कि अलग-अलग चुनाव लडऩे से मुस्लिम मतों का बंटवारा होगा, जिससे भाजपा को फायदा पहुंचेगा। कांग्रेस के रणनीतिकार भी अब पीके को किनारे करके खुद सीएम अखिलेश से बात करना चाहते हैं क्योंकि वह जानते हैं कि अंतिम फैसला सीएम ही लेंगे। जाहिर है अभी गठबंधन पर फैसला होने में समय है।

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