कांग्रेस को 60 से ज्यादा सीटें  देने के पक्ष में नहीं हैं अखिलेश

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  • कांग्रेस की प्रदेश में खस्ता हालत देखकर सपा ने दिखाया अपना रुतबा, दिए संकेत कि सपा के बिना कांग्रेस नहीं जीत पायेगी दो दर्जन सीटें भी
  • कई दिनों तक सीएम ने टाइम नहीं दिया पीके  को और कांग्रेस को दिखाया आईना
  • सीएम अपने विकास  कार्यों की और खुद की बेहतर छवि की ब्रांडिंग के चलते अकेले लडऩा चाहते हैं चुनाव


संजय शर्मा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को उसकी हालत समझा दी है। सीएम के साथ पीके की मीटिंग के दौरान खुद अखिलेश ने पीके को समझाया कि अगर कांग्रेस मैदान में अकेले लड़ेगी तो पिछले विधानसभा चुनाव जितनी सीटें भी हासिल करना मुश्किल हो जायेगा। पीके ने कहा कि उन्होंने नेताजी से कांग्रेस के लिए 125 सीटें छोडऩे के लिए कहा है, इस पर सीएम ने कहा कि हम आपके लिए 60 सीटें भी छोड़ेंगे तो भी इसमें हमारा नुकसान है। सीएम के तेवर देखकर कांग्रेस को पसीना आ रहा है क्योंकि कांग्रेस जानती है कि अपने दम पर चुनाव लडऩे से उसकी अब तक की सबसे बड़ी फजीहत होने वाली है।

पीके ने सपा से गठबंधन की शुरूआत ही गलत मोड में कर दी। पूरा देश जानता है कि सीएम अखिलेश यादव अमर सिंह को बिल्कुल पसंद नहीं करते। बावजूद इसके पीके ने जब नेताजी से मुलाकात की तो वहां अमर सिंह मौजूद थे। इसके बाद ही सीएम ने तय किया कि पीके को उनकी हैसियत बताई जायेगी। इसके बाद पीके लगातार सीएम से टाइम मांगते रहे, मगर उन्होंने टाइम नहीं दिया। हालत इतनी खराब हो गई कि सीएम से टाइम लेने के लिए पीके को नेताजी से सिफारिश करानी पड़ी।

पुष्टï सूत्रों ने जानकारी दी कि सीएम अखिलेश यादव ने विस्तार से पीके को कांग्रेस की सही तस्वीर दिखाई। उन्होंने अपने आंकड़ों से साबित किया कि कांग्रेस प्रदेश में दो दर्जन सीटें भी पाने की स्थिति में नहीं है। इन हालातों में कांग्रेस को 60 सीटों पर ही संतोष करना चाहिए। बताया जाता है कि सीएम की बातें सुनकर पीके पसीने-पसीने हो गए। बाद में पीके के दफ्तर ने बयान जारी करके कहा कि पीके की सीएम से मुलाकात एक शिष्टïाचार भेंट थी। जाहिर है कि पीके इन हालातों को सामने आने से बचाने की कोशिश कर रहे थे।

सीएम ने नेताजी को समझाया है कि जनता में सरकार की छवि अच्छी है। पिछले दिनों के सर्वे में प्रदेश में लोगों ने सबसे बेहतर मुख्यमंत्री भी अखिलेश यादव को ही बताया है। सीएम चाहते हैं कि इसी अच्छी छवि और विकास कार्यों के दम पर वह अकेले चुनाव मैदान में उतरे।

गठबंधन से भाजपा और बसपा कैंप में खलबली
कांग्रेस और सपा के बीच दोस्ती की खबरों ने बसपा और भाजपा खेमे में खलबली मचा दी है। भाजपा मान रही थी कि जिस तरह यादव परिवार में घमासान जारी है और मायावती मुस्लिम वोटो के लिए संघर्ष कर रही है उस स्थिति में पिछड़ी जातियों का एक बड़ा वोट बैंक भाजपा के साथ आ जायेगा साथ ही बसपा की कोशिशों से मुस्लिमों के वोटों का बंटवारा हो जायेगा। बसपा सुप्रीमो मायावती भी मुस्लिमों को लगातार संदेश दे रही थी कि शिवपाल और अखिलेश के समर्थक एक दूसरे को हरवाने की कोशिश करेंगे। इस हालत में मायावती को मुस्लिम वोट अपने पाले में आने की उम्मीद थी। इन दोनों दलों को लग रहा है कि अगर सपा और कांग्रेस का गठबंधन बन गया तो मुस्लिम वोट इस गठबंधन को मिलेंगे। सपा सुप्रीमो भी मुस्लिम मतों के विभाजन को रोकने के लिए यह गठबंधन बनाना चाहते हैं, जाहिर है सबकी निगाह इस गठबंधन पर लगी है।

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