कांग्रेस के निशाने पर बसपा का वोट बैंक

दलितों को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस निकालेगी स्वाभिमान यात्रा
प्रदेश के 66 जिलों में 2500 से अधिक गांवों का भ्रमण करेगी यात्रा
कांग्रेस करेगी दलितों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों का बखान

 सुनील शर्मा
captureलखनऊ। प्रदेश की सत्ता से मिले 27 वर्ष के वनवास को खत्म करने की छटपटाहट कांग्रेस में साफ दिखाई दे रही है। पार्टी अपने पुराने समर्थकों और बसपा का वोट बैंक कहे जाने वाले दलित समाज पर निगाहें गड़ा दी हैं। दलितों को लुभाने के लिए पार्टी दलित-शिक्षा-सुरक्षा-स्वाभिमान यात्रा निकालने जा रही है, जोकि सूबे में 66 जिलों के 2500 गांव से होकर गुजरेगी। इसके अलावा नुक्कड़ सभाओं के माध्यम से कांगे्रस के पदाधिकारियों और नेताओं की तरफ से दलितों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों का बखान भी किया जाएगा।
देश व प्रदेश की सियासत में एक छत्र राज्य करने वाली कांग्रेस करीब तीन दशक से उत्तर प्रदेश की सत्ता से दूर है। पार्टी बहुत ही बुरे दौर से गुजर रही है। प्रदेश की सत्ता का 27 साल का वनवास खत्म होता नहीं दिख रहा है, जबकि प्रदेश में अपनी स्थिति को मजबूत करने और दोबारा बेहतर स्थिति में लाने के लिए पार्टी प्रशांत किशोर यानी पीके पर करोड़ों रुपये का दांव खेल चुकी है। इसके बावजूद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की प्रदेश में निकाली गई संदेश यात्रा और खाट सभा जनता के बीच कोई खास असर नहीं डाल सकी है। कांग्रेस ने ब्राह्मïणों को अपने पाले में लाने के लिए दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को यूपी में सीएम का चेहरा घोषित कर सुर्खियां बटोरने का प्रयास किया लेकिन पार्टी नाकामयाब रही। इसी बीच रीता बहुगुणा जोशी के पार्टी छोडक़र बीजेपी में जाने से ब्राह्मण वोट बैंकों का सारा दांव फेल हो गया। रीता के बीजेपी में जाने के बाद से अब तक दर्जनों लोग कांग्रेस छोडक़र जा चुके हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधान सभा चुनाव के दौरान पार्टी के बेहतर प्रदर्शन को केंद्रीय नेतृत्व सशंकित है। इसलिए पार्टी ने अपने जनाधार को वापस हासिल करने के लिए दलितों को अपने पाले में करने की रणनीति तैयार की है।

दलित कार्यकर्ताओं को किया गया प्रशिक्षित

कांग्रेस पार्टी में अभी कुछ दिन पूर्व दलित कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया था। अब पार्टी के अनुसूचित जाति ईकाई की मदद से प्रदेश भर में दलित-शिक्षा-सुरक्षा-स्वाभिमान यात्रा निकालने का निर्णय लिया गया। इसकी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। अनुसूचित जाति विभाग की संयोजक एवं मीडिया प्रभारी सिद्धिश्री ने बताया कि 26 नवम्बर को यात्रा का शुभारम्भ प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय नेहरू भवन माल एवेन्यू से किया जायेगा। यह यात्रा प्रदेश के 66 जिलों में जायेगी। इसके लिए प्रदेश कंाग्रेस मुख्यालय से 100 वाहनों को रवाना किया जायेगा। यात्रा के वाहनों में संयुक्त रूप से अनुसूचित जाति विभाग सहित मुख्य संगठन के जिलाध्यक्ष व पांच कार्यकर्ता एवं यात्रा प्रभारी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा नुक्कड़ सभाएं भी आयोजित की जायेंगी। इनके माध्यम से जनता को बताया जायेगा कि कांग्रेस पार्टी ने दलितों के विकास में क्या योगदान दिया। इसके साथ ही अन्य पार्टियां दलितों को प्रलोभन देने के लिए क्या-क्या हथकंडे अपना रहीं हैं। उन पार्टियों की सरकारों ने दलितों को उनका हक दिलाने और विकास की मुख्य धारा से जोडऩे की दिशा में क्या काम किया। इसकी जानकारी भी दी जायेगी। यह यात्रा प्रदेश के लगभग 2500 से अधिक गांवों में जायेगी। यात्रा को कंाग्रेस कमेटी के महासचिव-प्रभारी उत्तर प्रदेश गुलाम नबी आजाद, प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, मुख्यमंत्री पद की प्रत्याशी शीला दीक्षित, कोआर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन सांसद प्रमोद तिवारी रवाना करेंगे।

पीके पर असमंजस

प्रशांत किशोर को लेकर पार्टी में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्टी को यूपी में मजबूत बनाने के मकसद से पीके की अन्य दलों से गठबंधन की कोशिशें फेल हो चुकी हैं। पीके की नीतियां पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को रास नहीं आ रही हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो प्रियंका गांधी भी पीके की नीतियों और उसके परिणाम को लेकर खुश नहीं हैं। इसी वजह से प्रियंका की तरफ से यूपी में होने वाले चुनाव के मद्देनजर अपनी रैलियों और कार्यक्रमों पर कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि बहुत जल्द पार्टी पीके को साइड लाइन कर देगी। पार्टी की तरफ से यूपी में प्रचार-प्रसार की कमान पार्टी के किसी पदाधिकारी को सौंप दी जायेगी। शायद तब प्रियंका गांधी की रैलियों और सभाओं की तिथि भी घोषित कर दी जायेगी। फिलहाल पार्टी की नजर बसपा के परंपरागत वोट बैंक पर है। इसलिए वह दलित-शिक्षा-सुरक्षा-स्वाभिमान यात्रा निकालकर अधिक से अधिक लोगों का जनसमर्थन हासिल करने में जुट गई है।

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