कहीं असफल तो नहीं है ‘दो बूंद जिंदगी की’…?

जिस पोलियो की लड़ाई में कई अरब रुपए स्वाहा कर दिए गए, वह दोबारा दस्तक दे रही है। यह बहुत बड़े खतरे की घंटी है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से आज हमें यह दिन देखना पड़ रहा है।

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में पोलियो के कुछ मामले सामने आए हैं, जो चिंता का विषय है। एक साल पहले ही तो अंतरराष्ट्रीय संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ)ने भारत को पोलियो मुक्त राष्ट्र्र का दर्जा दिया था। केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार ने इसका जश्न मनाया था। ऐसे में पोलियो के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग के हाथ पांव फूल गए हैं। उत्तर प्रदेश में करीब 200 सैंपल में इस बीमारी के संकेत मिले हैं। विभाग के अधिकारियों को 5 से 15 साल से बच्चों में हाथ-पैर की मांसपेशियों में कमजोरी की शिकायत मिली। निश्चित है यह स्वाथ्य विभाग की लापरवाही का नतीजा है।
जिस पोलियो की लड़ाई में कई अरब रुपए स्वाहा कर दिए गए, वह दोबारा दस्तक दे रही है। यह बहुत बड़े खतरे की घंटी है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की वजह से आज हमें यह दिन देखना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के लोग तो एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोप कर पल्ला झाड़ लेंगे, पर उन मासूम बच्चों का तो भविष्य दांव पर लग गया है।
11 जनवरी 2014 को भारत ने पोलियो मुक्त देश बनने का गौरव हासिल किया था। फरवरी 2014 में इसका जश्न धूमधाम से मनाया गया था। इस अवसर पर पोलियो के खिलाफ जारी जंग में किसी भी तरह की ढिलाई न आने देने की अपील भी की गई थी। निश्चित ही भारत ने कड़ी मेहनत और समर्पण के बाद यह मुकाम हासिल किया था। पोलियो के खिलाफ शुरू की गई मुहिम में अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, रवि शास्त्री, फारूख शेख के साथ कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की थी। अमिताभ के नारे ‘दो बूंद जिदंगी की’ ने देश के करोड़ों लोगों को एकजुट किया था, पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने सारे किए-कराए पर पानी फेर दिया।
प्रदेश सरकार गाहे-बगाहे अपनी पीठ भी ठोकती है कि सरकार के प्रयास से ही प्रदेश पोलियो मुक्त हुआ है, पर ऐसे दावों के बीच सैकड़ों बच्चों के नमूनों में पोलियो के लक्षण मिलना पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगा रहा है? दोबारा पोलियो के मामले सामने आना किसकी जिम्मेदारी है? प्रदेश सरकार की या स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की? फिलहाल जो भी लेकिन अगर पोलियो ने फिर से दस्तक दे दी तो यह बहुत ही चिंता का विषय होगा। इसके लिये सरकारों को गंभीरता से उचित कदम उठाने की जरूरत है।

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