कश्मीर घाटी के स्कूलों को तो बख्श दो

क्या पड़ोसी देश अपने आतंकियों के माध्यम से कश्मीर को पूरी तरह वीरान कर इसे आतंकवादियों की चारागाह बनाना चाहता है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी वहां की गठबंधन सरकार स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को क्यों नहीं पुख्ता कर पा रही है?

sanjay sharma editor5घाटी में हिंसा जारी है। भारत-पाक सीमा पर लगातार गोलाबारी हो रही है। यहां की फिजा बदल चुकी है। कश्मीर में सक्रिय अराजकतत्व हों या आतंकवादी दोनों ने अपने निशाने पर बच्चों और उनकी शिक्षा को ले लिया है। यहां स्कूलों को आग के हवाले किया जा रहा है। इसके पहले यहां सरकारी संस्थान, पुलिस और सेना के जवान निशाने पर रहते थे। सवाल यह है कि वे कौन सी वजहें हैं जिसके चलते बच्चों के स्कूलों को निशाना बनाया जा रहा है? क्या कश्मीर में आतंकवादी को समर्थन देने वाले स्कूलों में आगजनी की घटना को अंजाम देकर उन्हें केवल शिक्षा से वंचित करना चाहते हैं या इसके जरिए परिवारों में दहशत पैदा कर उन्हें यहां से पलायन करने पर मजबूर करना चाहते हैं? क्या पड़ोसी देश अपने आतंकियों के माध्यम से कश्मीर को पूरी तरह वीरान कर इसे आतंकवादियों की चारागाह बनाना चाहता है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी वहां की गठबंधन सरकार स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को क्यों नहीं पुख्ता कर पा रही है? दरअसल, हिज्बुल कमांडर बुरहान बानी की मुठभेड़ में मौत के बाद से कश्मीर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। इस मामले को लेकर भारत-पाक में तनाव चरम पर पहुंच चुका है। भारतीय फौजियों द्वारा पाक में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक से पड़ोसी देश बौखला गया है। सीमा पर सीमित युद्ध के हालात हैं। पिछले 13 सालों में सीमा पर गरजे वाली बंदूकों की जगह तोपों ने ले ली है। दोनों ओर से गोले दागे जा रहे हैं। इस दौरान घाटी में अब तक 31 स्कूल भवनों को आग के हवाले किया जा चुका है। जिन स्कूलों में आगजनी की गई है उसमें 25 सरकारी स्कूल, दो निजी स्कूल और अन्य सामाजिक संगठनों की मदद से संचालित किए जा रहे है। इस मामले में भले ही अज्ञात लोगों के नाम रिपोर्ट दर्ज की जा रही हो लेकिन हकीकत से घाटी की जनता भी वाकिफ है। उनका मानना है कि आतंकवादियों के समर्थन में पत्थरबाजी करने वाले लोग भी इसमें शामिल हैं। बच्चों के स्कूलों को निशाना बनाने के पीछे दो मुख्य वजहें मानी जा रही है। पहला, बच्चों को निशाना बनाने से परिवार दहशत में आ जाएंगे और पलायन कर जाएंगे। दूसरा, जो बच जाएंगे उन बच्चों को कट्टïरवादी शिक्षा देकर भारत सरकार के खिलाफ आसानी से खड़ा किया जा सकेगा। यदि सरकार ने इन स्कूलों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए तो स्थितियां बदतर हो जाएंगी।

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