कब सुलझेगा हिमाचल और जम्मू-कश्मीर का सीमा विवाद

बांग्लादेश के साथ अंतरराष्ट्रीय  सीमा विवाद का हल करके भारत सरकार ने अपनी मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय दिया है, लेकिन दूसरी ओर देश के कई राज्य आपसी सीमाओं के विवादों में लंबे समय से उलझे हुए हैं। समय की जरूरत है कि राज्यों के सीमा विवादों को हल करने में भारत सरकार अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड और हरियाणा की सीमाओं के साथ सटा हुआ है। यही नहीं हिमाचल प्रदेश के साथ चीन की अंतरराष्ट्रीय  सीमा भी लगती है। पिछले कुछ अरसे से हिमाचल प्रदेश की सीमा के अंदर तक जम्मू-कश्मीर पहुंच चुका है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सरचू में अपनी पुलिस पोस्ट बना रखी है जबकि यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश का हिस्सा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर लाहौल-स्पीति की ओर तकरीबन 14 किलोमीटर अंदर आ चुका है और वहां का प्रशासन हिमाचल की इस सारी भूमि पर अपना हक जता रहा है।
कुछ साल जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा जब भद्रवाह की तरफ से हिमाचल प्रदेश की सीमा में 7 किलोमीटर सडक़ बनाई गई तब भी हिमाचल सरकार सोई रही। हाल ही में जब चंबा जिला परिषद के चेयरमैन को यह पता चला तो उन्होंने यह मुद्दा सरकार के समक्ष उठाया। इसी प्रकार से सरचू में कई बरसों से जम्मू-कश्मीर की पुलिस पोस्ट लगती रही लेकिन हिमाचल सरकार की ओर से किसी भी प्रकार का विरोध दर्ज नहीं किया गया।
लेकिन इस बार पर्यटन सीजन के दौरान जब मनाली से लेह रूट पर सरचू में हिमाचल के युवाओं ने अपनी कैम्पिंग साइट और चाय-पानी के ढाबे बनाने की कोशिश की तो जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। मामला ध्यान में आते ही लाहौल-स्पीति के विधायक जो कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय आयोग के वाइस चेयरमैन भी हैं, ने इस अंतर्राज्यीय सीमा विवाद को हल करने की कोशिश की लेकिन उनकी इस कोशिश में जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा सहयोग नहीं किया गया जिस कारण इस विषय पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर सूचित किया है क्योंकि भारत सरकार की ओर से राज्यों की सीमाओं पर कोई निर्णय आदि लेने के लिए यही एक अधिकृत सरकारी एजेंसी है। सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से इस विषय पर रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।
लेकिन जिस प्रकार से जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा अपनी पोस्ट कई किलोमीटर हिमाचल प्रदेश की सीमा के अंदर आकर लगा दी गई है वह गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि वर्ष 1999 में इस क्षेत्र के एक पुलिस अधिकारी द्वारा जब अंतर्राज्यीय सीमा का दौरा किया गया तो उन्होंने सरचू में जम्मू-कश्मीर की पुलिस पोस्ट को देख तुरंत इसे जम्मू-कश्मीर की सीमा के भीतर लगाने बारे अपने उच्चाधिकारी को वायरलैस मैसेज भी किया था। लेकिन आज तक उस वायरलैस मैसेज पर आखिर सरकार चुप्पी क्यों साधे रही, यह चिंता का विषय है। अगर उस समय दोनों राज्यों का प्रशासनिक तंत्र इस विवाद को आपसी बातचीत से सुलझा लेता तो आज सर्वे ऑफ इंडिया के दखल की जरूरत शायद न रहती।
दूसरा विषय जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह के साथ लगते चंबा के सलूणी क्षेत्र का है। यह अतिसंवेदनशील क्षेत्र है क्योंकि इस तरफ से पहले कई बार आतंकी हमले हो चुके हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा अपनी कुछ पोस्ट बना रखी हैं। तकरीबन 17 हजारबीघा जिस भूमि पर जम्मू-कश्मीर अपना अधिकार जता रहा है वहां कोई आबादी नहीं है। लेकिन प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा दृश्य यहां देखने को मिलता है और साथ ही बेशकीमती वनसंपदा यहां पर है।
इस क्षेत्र में केवल घुमंतू गुज्जर परिवार ही रहते हैं जबकि सलूणी क्षेत्र के ग्रामीण यहां से जड़ी-बूटी निकालने का काम करते हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि हिमाचल प्रदेश के इस वन क्षेत्र से जड़ी-बूटी निकालने और मवेशियों को चराने आदि के परमिट जम्मू-कश्मीर के वन विभाग की ओर से बरसों से जारी किए जा रहे हैं। जिस पर आज तक हिमाचल के वन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई तक नहीं की गई है। इन दोनों मामलों में चूक सरकार की ही रही है क्योंकि दोनों क्षेत्रों में कोई आबादी नहीं है, शायद इसी कारण वहां पर प्रशासन, राजस्व और वन विभाग की ओर से कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं किया गया है।
इन क्षेत्रों में केवल पुलिस की ही पोस्ट होती है लेकिन बर्फबारी के दौरान पुलिस पोस्ट को भी निचले क्षेत्र में बदल दिया जाता है। हालांकि अब मामला गर्माने के बाद हिमाचल सरकार ने जम्मू-कश्मीर के साथ अंतर्राज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने की पहल की है।

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