एलडीए के तीन हजार से अधिक फ्लैट की बिक्री अधर में

  • अधिकारी फिजूल खर्ची कर मौज करने में मस्त
  • सालों बाद भी आवंटियों को नहीं दिया जा रहा कब्जा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एलडीए की कार्यप्रणाली से आवंटियों का विश्वास उठता जा रहा है। वर्षों बीत जाने के बाद भी आवंटियों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। शायद यही कारण है कि आज एलडीए के तीन हजार से अधिक फ्लैटों की बिक्री अधर में है। कई फ्लैटों की योजनाएं ऐसी हैं जिनका कब्जा देने में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने चार से पांच साल लगा दिए।
एलडीए के मध्यम वर्गीय फ्लैटों की बिक्री फिर भी कुछ हद तक हो जाती है, जबकि अधिकांश महंगे फ्लैट आज तक नहीं बिक सके हैं। यह हाल तब है जब एलडीए अपनी संपत्तियों को बेचने के लिए कई बार लॉटरी निकाल चुका है। वहीं, एलडीए अफसर करोड़ों रुपये फूंकने में कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। कुर्सी रोड पर एलडीए की कई योजनाओं के सैकड़ों फ्लैट खाली पड़े हैं। इनके खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह सोपान एन्क्लेव के फेज टू में पांच सौ से अधिक फ्लैट एलडीए बना रहा है। अब फ्लैट न बिकने पर एलडीए मान रहा है कि उनके फ्लैटों की कीमत निजी बिल्डरों से कुछ ज्यादा है, इसलिए लोगों की रुचि निजी बिल्डरों की ओर ज्यादा है। फ्लैट संबंधी योजना देख रहे अधिकारी मानते हैं कि पंचशील, सनराइज, सोपान, सरगम व स्मृति योजनाएं वर्ष 2010 से 2012 के बीच की हैं। योजनाओं में बनाए गए फ्लैटों पर कब्जा देने में एलडीए को सालों लग गए। कुल मिलाकर एलडीए की विभिन्न योजनाओं में तीन हजार से फ्लैट खाली पड़े हैं और एलडीए का करोड़ों रुपया इसकी वजह से डंप है। वहीं दूसरी तरफ सीजी सिटी में लॉटरी की प्रक्रिया एलडीए अभी तक नहीं करा पाया। 16 अगस्त को इसके पंजीकरण की अंतिम तिथि थी। तभी से करीब सोलह सौ आवंटियों के करोड़ों रुपये इस योजना में फंसे हैं।

Pin It