एलडीए की बसंतकुंज योजना में हुआ बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा

  • प्राधिकरण के अधिकारियों ने पैसे लेकर दिया अपनों को आशियाना, जरूरतमंदों को किया दरकिनार
  • गलत ढंग से मकान आवंटित कर 720 लोगों को दिया गया स्थायी कब्जा, दोषियों के खिलाफ कब होगी कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण की बसंत कुंज योजना के अंतर्गत दुबग्गा में आश्रयहीन योजना के वैध आवंटियों को स्थायी रूप से कब्जा मिल सकेगा। इस योजना के आवंटी करीब तीन साल से आशियाना मिलने का इंतजार कर रहे थे, जबकि प्राधिकरण के बाबुओं ने लगभग 720 लोगों को गलत तरीके से मकान आवंटित कर दिया था। उन लोगों से अवैध रूप से पैसा भी जमा करवा लिया था। लेकिन तीन साल बाद एलडीए बोर्ड के माध्यम से मामले का निस्तारण करा दिया गया है। इसलिए वैध आवंटियों को जल्द मकान पर कब्जा मिलने की उम्मीद है। लेकिन मकानों का अवैध ढंग से आवंटन करने वाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर सभी अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
एलडीए ने 2001 में आश्रयहीन योजना के तहत दुबग्गा में बसंत कुंज आश्रयहीन योजना लांच की थी। लगभग एक हजार मकानों वाली इस योजना में मकानों का आवंटन हो चुका है। आवंटन के इस खेल में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ था। एलडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर जरूरतमंदों की जगह पैसा खर्च करने वालों को मकान आवंटित कर दिए गए।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि एलडीए के लोगों ने अपने नाते-रिश्तेदारों के नाम, एक लाइन से मकान आवंटित करा लिए थे। इसमें एक मकान के तीन-तीन दावेदार हो गए थे। जब इस मामले की पोल खुली तो एलडीए ने मामले की जांच के आदेश दिए थे, जिसमें कई लोग दोषी भी मिले थे। करीब दो वर्ष पूर्व यहां रहने वाले लोगों ने मकानों का नियमितिकरण कराने की मांग को लेकर एलडीए के पूर्व उपाध्यक्ष अष्टभुजा प्रसाद तिवारी से मुलाकात की थी। बसंतकुंज जन कल्याण समिति के अध्यक्ष रवींद्र कुमार तिवारी के नेतृत्व में लगभग 350 आवंटियों ने उपाध्यक्ष कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। उस समय मूल आवंटियों के नाम से मकानों का नियमितिकरण करने और आवंटियों की जांच की मांग की गई थी, जिससे जरूरतमंदों को मकान मिल सके।

ज्यादातर मकानों में कई दावेदार

पूर्व एलडीए उपाध्यक्ष ने पूरे मामले को एलडीए बोर्ड की बैठक में रखने का आश्वासन दिया था। एलडीए के ही बाबुओं और कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा करके मूल आवंटियों के साथ ही अन्य लोगों को भी मकानों का अवैध रुप से आवंटन कर दिया था। तब से वहां पर ज्यादातर मकानों के कई-कई दावेदार हो गये। रजिस्ट्री के लिए कई दावेदार सामने आने पर उस समय एलडीए की अपर सचिव सीमा सिंह ने वैध और अवैध आवंटियों की जांच के लिए कमेटी बनाई थी, जिसमें विशेष कार्याधिकारी राजीव कुमार, अधीक्षण अभियंता ओपी मिश्र, अधिशासी अभियंता दुर्गेश श्रीवास्तव, उप सचिव केके सिंह को शामिल किया गया था। वहीं वैध आवंटियों को राहत देने के लिए अवैध कब्जेदारों को हटाने के निर्देश उस समय दिए गए थे। लेकिन कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गईं। वहीं अभी हाल ही में सम्पन्न हुई बोर्ड बैठक में 308 कब्जेदारों को नियमित करने का निर्णय लिया गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी

एलडीए वीसी अनूप यादव का कहना है कि दुर्बल वर्ग के लोग यहां रह रहे थे। इनके पास अन्य कोई विकल्प नहीं था। इसी के चलते इनके विनियमितीकरण करने का निर्णय लिया गया।

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