एनडीटीवी इंडिया पर प्रतिबंध आपातकाल जैसे हालात

  • पठानकोट हमले की कवरेज को लेकर मोदी सरकार ने प्रसारण पर लगाई एक दिन की रोक
  • देशभर में विरोध प्रदर्शन पत्रकारों ने कहा कि मीडिया के लिए काला दिन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

81लखनऊ। पठानकोट हमलों की कवरेज को लेकर केंद्र सरकार ने टीवी चैनल एनडीटीवी इंडिया पर एक दिन का प्रतिबंध लगाया है। सरकार ने अपने आदेश में चैनल को ऑफ-एयर करने को कहा है। ये आदेश भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जारी किया है। एनडीटीवी ने कहा है कि उनका कवरेज बिल्कुल संतुलित था। अधिकतर अखबारों और चैनलों ने पठानकोट हमलों की कमोबेश एक जैसी कवरेज की थी। आपातकाल के काले दिनों के दौरान प्रेस की आज़ादी छीनी गई और अब ये अभूतपूर्व है जिस तरह से एनडीटीवी के खिलाफ़ कदम उठाए गए हैं। वहीं मीडिया पर पहली बार इस तरह का प्रतिबंध लगाए जाने का देश भर में विरोध हो रहा है। गौरतलब है कि पठानकोट हमलों के दौरान टीवी चैनलों की कवरेज़ को लेकर एक उच्च स्तरीय पैनल का गठन हुआ था। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की एक अंतर मंत्रालयी समिति ने इसके बाद एनडीटीवी इंडिया के कवरेज पर आपत्ति जताते हुए इसे एक दिन के लिए ऑफ एयर करने की सिफारिश की थी। इसके अनुसार एनडीटीवी इंडिया ने पठानकोट हमले की कवरेज़ के दौरान सामरिक रूप से संवेदनशील सूचनाएं प्रसारित की थीं।
भारत सरकार द्वारा समाचार चैनल एनडीटीवी को एक दिन के लिए ऑफ एयर करने की सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा कि भारत के सबसे संयमित और जिम्मेदार चैनलों में से एक एनडीटीवी इंडिया को प्रसारण मंत्रालय एक दिन के लिए बंद कर रहा है। आज एनडीटीवी है, कल कौन होगा? सगारिका घोष ने ट्वीट किया, एनडीटीवी को प्रतिबंधित करना स्वतंत्र मीडिया पर सरकार का चौंकाने वाला शक्ति प्रदर्शन है। मीडिया की हत्या मत करो। कांग्रेस से जुड़े तहसीन पूनावाला ने लिखा है अगर एनडीटीवी ऑफ़ एयर हुआ तो मैं प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर ऑनलाइन एनडीटीवी देखूंगा। सुख संधू ने लिखा है कि बीजेपी सरकार ने चैनलों को सलाह दी है, धमकियां दी हैं और अब प्रतिबंध भी लगा दिया है। भारत में आपातकाल जैसे हालात हैं। डॉ. मुग्धा सिंह ने ट्वीट किया,एनडीटीवी को एक दिन के लिए ऑफ़ एयर होना पड़ेगा, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ शक्तिहीन हो गया है। हिटलरशाही लौट रही है, इस बार मोदी सरकार के नाम से। रचित सेठ का कहना है कि सरकार पठानकोट पर जांच के लिए आईएसआई को ख़ुशी-ख़ुशी बुला सकती है, लेकिन अगर एनडीटीवी इंडिया या कोई और चैनल इस बारे में ख़बर दिखाता है तो उन्हें इससे समस्या है। संदीप शर्मा ने फ़ेसबुक पर लिखा कि पत्रकारिता जगत पर काले धब्बे जैसा है एनडीटीवी पर प्रतिबंध लगना।

सभी पत्रकारों को करना चाहिए विरोध

ये अघोषित इमरजेंसी की पदचाप है। अगर सभी ने इसका एकजुट होकर विरोध नहीं किया तो ये लोकतंत्र के लिए खतरा हो जायेगा। देश की सुरक्षा खतरे में डालने जैसे आरोप में संगीन प्रतिबंध देश में पहले कभी नहीं लगाया गया। हमें अपना लोकतंत्र बचाकर रखना है तो हर स्तर पर इसका विरोध करना होगा। -ओम थानवी, पूर्व संपादक, जनसत्ता।

एनडीटीवी की कवरेज संतुलित

एनडीटीवी को सूचना मंत्रालय का आदेश मिला। यह बेहद आश्चर्यजनक है कि एनडीटीवी को इसके लिए चुना गया। आपातकाल के काले दिनों में जब प्रेस को बेडिय़ों से जकड़ दिया गया था उसके बाद से एनडीटीवी पर इस तरह की कार्रवाई असाधारण घटना है।
-कमाल खान, स्थानीय संपादक, एनडीटीवी

शर्मनाक है सरकार का ये रवैया

एनडीटीवी पर प्रतिबंध सरकार की ओछी मानसिकता का नतीजा है। एनडीटीवी बेहद संतुलित चैनल है और उसकी रिपोर्टिंग को पूरा देश पसंद करता है। ये प्रतिबंध साबित करता है कि कुछ लोग किस तरह की मानसिकता के शिकार हो गये हंै। – शरद प्रधान, वरिष्ठï पत्रकार

विनाशकाले विपरीत बुद्धि

एनडीटीवी पर प्रतिबंध लगाकर मोदी सरकार ने साबित कर दिया कि वे हिटलरशाही पर आमादा हैं। लोकतंत्र में इस तरह की बातों का कोई महत्व नहीं है। हम इस प्रतिबंध का पुरजोर विरोध करते हैं।
-अतुल अग्रवाल, संपादक, हिन्दी खबर

आपातकाल जैसे हालात

लोकतंत्र में इससे खराब बात कोई दूसरी नहीं हो सकती कि जो संस्था सैद्धांतिक रूप से आपके साथ खड़ी होती नजर न आये, आप उसका शोषण शुरू कर दें। यह देश में आपातकाल जैसी शुरुआत है, जिसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए। -विनय राय, प्रबंध संपादक, एपीएन न्यूज चैनल।

डरा कर बंद नहीं की जा सकती आवाज

कुछ राजनेताओं को ये भ्रम हो जाता है कि वे दंड के डर से मीडिया संस्थानों की आवाज बंद कर सकते हैं। एनडीटीवी देश भर में अपनी शानदार और ईमानदार रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। इस प्रतिबंध का हर स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए।
-संजय शर्मा, संपादक, 4पीएम/उपाध्यक्ष राज्य मान्यताप्राप्त संवाददाता समिति

जिन्होंने दमन किया वे खुद हो गये हाशिए पर

इस देश में इमरजेंसी लगाकर मीडिया पर प्रतिबंध की कोशिश इंदिरा गांधी ने भी की थी और उनके बेटे राजीव गांधी ने भी। जनता ने दोनों को सबक सिखा दिया। एनडीटीवी पर प्रतिबंध ऐसी ही एक शर्मनाक
कोशिश है।
-अमिताभ अग्निहोत्री, प्रधान संपादक, के.न्यूज।

प्रलोभन के बाद दंड

मोदी सरकार हर ओछे हथकंडे पर उतर आई है। एनडीटीवी ने कई ऐसी खबरें दिखाईं जो सत्ता प्रतिष्ठïन को अखरीं। गुजरात दंगे के समय से ही एनडीटीवी मोदी के निशाने पर रहा है। ये शर्मनाक है और इसका हर स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए।
-यशवंत सिंह, संपादक,भड़ास।

ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन ने भी की प्रतिबंध की निंदा, कहा यह एक प्रकार की है हिंसा

ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन ने एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध लगाए जाने की निन्दा की है। एसोसिएशन के सचिव एनके सिंह ने कहा है कि सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है। यह एक प्रकार की हिंसा है। इसके साथ ही यह पूरी तरह से मीडिया के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन का मामला भी है। सरकार अपने निर्णय को तत्काल वापस ले। हम इस मामले की विस्तृत जानकारी हासिल करके जनता के सामने ले जायेंगे।

क्या है आदेश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केबल टीवी नेटवर्क (नियमन) अधिनियमन के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि एनडीटीवी इंडिया को आदेश दिया जाता है कि वह 9 नवंबर, 2016 के दिन यानी (आठ नवंबर की देर रात 12:01 मिनट)से लेकर 10 नवंबर, 2016 के दिन के खत्म होने यानी (नौ नवंबर की देर रात 12:01 बजे) तक के लिए प्रसारण अथवा पुनर्प्रसारण पूरे भारत में हर प्लेटफॉर्म पर बंद रखेगा।

विचार-अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश: एडिटर्स गिल्ड

एनडीटीवी इंडिया को एक दिन के लिए ब्लैकआउट कर देने के सरकारी पैनल के निर्णय की एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया कड़ी निंदा की है। एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष राज चेंगप्पा, महासचिव प्रकाश दुबे व कोषाध्यक्ष सीमा मुस्तफा ने कहा कि चैनल को एक दिन के लिए ऑफ एयर कर देने का निर्णय मीडिया की स्वतंत्रता, और इस तरह से भारतीय नागरिकों की स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है, जिसके ज़रिये सरकार कड़ी सेंसरशिप थोप रही है, और जो इमरजेंसी के दिनों की याद दिलाता है। ब्लैकआउट के अपनी तरह के इस पहले आदेश से पता चलता है कि केंद्र सरकार समझती है कि उसे मीडिया के कामकाज में दखल देने और जब भी सरकार किसी कवरेज से सहमत न हो, उसे अपनी मर्ज़ी से किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार है। किसी भी गैरजिम्मेदाराना मीडिया कवरेज के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के लिए किसी भी नागरिक या सरकार के सामने बहुत-से कानूनी मार्ग उपलब्ध हैं। न्यायिक हस्तक्षेप या निगरानी के बिना प्रतिबंध लागू कर देना न्याय तथा स्वतंत्रता के मौलिक सिद्धांतों का उल्लंघन है। एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया प्रतिबंध के इस आदेश को तुरंत वापस लिए जाने की मांग
करता है।

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