एआईएमआईएम का दलित-मुस्लिम गठजोड़ फार्मूला सपा, बसपा के लिए बनेगा मुसीबत

प्रदेश में जय भीम, जय मीम के नारे के साथ एआईएमआईएम का भी घूमेगा वीडियो रथ

रथ के माध्यम से पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाषणों को दिखाया व सुनाया जाएगा

 सुनील शर्मा
captureलखनऊ। महाराष्ट्र समेत कई अन्य स्थानों पर चुनावों में सफलता हासिल कर सपा और बसपा समेत अन्य राजनीतिक दलों को चौंकाने वाली अखिल भारतीय मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) अब उत्तर प्रदेश में योजना बनाकर चुनाव प्रचार करने में जुट गई है। मुस्लिमों का रहनुमा बनने की कोशिश में जुटी एआईएमआईएम की लोकप्रियता यूपी में भी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए आने वाले चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में करने में जुटी बसपा और मुस्लिमों का वोट बैंक सहेजने में जुटी सपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सपा और बसपा दोनों असदुद्दीन ओवैसी की काट तलाशने में जुट गई हैं क्योंकि एआईएमआईएम ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए ऐसा फार्मूला तैयार किया है, जिसने दोनों दलों की नींद उड़ा दी है, जबकि भाजपा एआईएमआईएम के फार्मूले को अपने लिए कारगर मानकर चुनाव की तिथियां घोषित होने की आस लगाए बैठी है।
हैदराबाद से सांसद रहे असदुद्दीन ओवैसी व उनके भाई अकबरूद्दीन ओवैसी उस वक्त चर्चा में आए थे जब उन्होंने एक वर्ग विशेष पर विवादास्पद टिप्पणी की थी। इस घटना के बाद से लगातार दोनों भाई कई तरह के विवादास्पद बयान देकर सुर्खियां बटोरने में कामयाब रहे हैं। इसलिए दोनों भाइयों की लोकप्रियता मुसलमानों के बीच काफी बढऩे लगी है। इसी वजह से महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर पार्टी को सफलता मिली थी। उसके बाद ओवैसी बंधुओं ने बिहार में हुए चुनाव में भी किस्मत आजमाई। मीम ने फैजाबाद के बीकापुर विधानसभा सीट पर फरवरी में सम्पन्न उपचुनाव में अपना प्रत्याशी उतारा था, जिसमें पार्टी के उम्मीदवार प्रदीप कोरी ने चौथा स्थान प्राप्त किया और उन्हें भाजपा प्रत्याशी से सिर्फ 100 वोट कम मिले थे। वहीं, पिछले साल हुए जिला पंचायत चुनावों में पार्टी ने चार स्थानों पर जीत हासिल की, जिसमें एक सीट आजमगढ़, एक मुजफ्फरनगर और दो सीटें बलरामपुर में पार्टी ने जीती थी। यहां महत्वपूर्ण बात ये रही कि चुनाव में दो उम्मीदवार हिंदू थे। दरअसल, पार्टी को लगने लगा कि सिर्फ मुसलमानों के भरोसे उत्तर प्रदेश में सत्ता का किंगमेकर नहीं बना जा सकता। तब एआईएमआईएम के अध्यक्ष ने दलित-मुस्लिम गठजोड़ के एजेंडे पर काम करने का फैसला किया। फिलहाल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में ‘जय भीम-जय मीम’ नारे के साथ जनता के बीच जाने का ऐलान किया गया है। उनका यह फार्मूला अगर सफल होता है तो सूबे के दो मजबूत दलों सपा और बसपा का वोट बैंक काफी प्रभावित होगा।

प्रत्याशियों के चयन का आधार बनेगी भीड़

पार्टी सूत्रों के मुताबिक वीडियो रथ के बाद वरिष्ठ नेताओं के भ्रमण में जुटने वाली भीड़ विधानसभा चुनाव लडऩे का मंसूबा रखने वाले उम्मीदवारों के चयन का आधार भी बनेगी। प्रत्याशियों के चयन में दलित वर्ग का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यूपी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी पहले ही करीब 40 प्रत्याशियों का चयन कर चुकी है जबकि 55 अन्य प्रत्याशियों का चयन किया जाना है। वीडियो रथ उन विधानसभा क्षेत्रों में घूमेगा जहां पार्टी ने अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं। पार्टी के विधानसभा प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में उन स्थानों पर ज्यादा तवज्जो देने के निर्देश दिये गये हैं। जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता समय-समय पर दौरा करेंगे।

बिगड़ सकता है खेल

एमआईएम दलित और मुस्लिम वोटों पर नजर रख रही है। दलितों और मुस्लिमों को अपने पाले में लाने की योजना पर लगातार काम कर रही है। पार्टी ने सपा में मची अंतर्कलह के बाद मुसलमानों को अपने पाले में लाने का प्रयास तेजी से शुरू कर दिया है। मुस्लिमों को बताया जा रहा है कि आने वाले चुनाव में सपा सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं जुटा पायेगी। इसलिए मुस्लिमों को एकजुट होकर एआईएमआईएम का समर्थन करना चाहिए। वहीं खुद को दलितों और पिछड़ों का हितैषी साबित कर ‘जय भीम-जय मीम’ ने दलित वोटरों को अपने पक्ष में लाने की कोशिशें भी तेज कर दी हैं, जो बसपा के वोट बैंक को प्रभावित कर रहा है। इसलिए बसपा की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अखिल भारतीय मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) ने जय भीम-जय मीम नारे के साथ प्रचार के वास्ते एक वीडियो रथ तैयार कराया है, जिसके जरिए सूबे के विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाषणों को दर्शाया जाएगा। यह रथ यात्रा अगले महीने से भ्रमण पर निकलने वाली है। इस वीडियो रथ को उन स्थानों पर ले जाया जायेगा, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दौरे होंगे।

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