उपभोक्ताओं की पीठ पर बिजली कंपनियों के घाटे का बोझ

  • केंद्र की उदय स्कीम के तहत नुकसान की भरपाई करेगी राज्य सरकार
  • कंपनियां अभी भी एमसीजी व रेग्यूलेटरी सरचार्ज घटाने को नहीं हैं तैयार

 सुनील शर्मा
captureलखनऊ। तमाम सहूलियतें मिलने के बाद भी बिजली कंपनियां विद्युत उपभोक्ताओं का शोषण करने पर आमादा हैं। कंपनियों के घाटे का बोझा ढ़ो रहे उपभोक्ताओं की बदहाली देखकर भी पावर कारपोरेशन के अधिकारी इन कंपनियों के साथ खड़े हैं। जबकि केंद्र की उदय स्कीम के तहत कंपनियों के घाटे की भरपाई का जिम्मा राज्य सरकारों ने ले लिया है। इसके बावजूद कंपनियां अपने नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं पर थोपे गए रेग्यूलेटरी सरचार्ज व एमसीजी को समाप्त करने में हीलाहवाली कर रही हैं। वहीं इस प्रकरण पर राज्य विद्युत नियामक आयोग में दाखिल जनहित याचिका पर मांगे गए जवाब भी नहीं दाखिल कर रही हैं।
प्रदेश की बिजली कंपनियां हर साल राज्य विद्युत नियामक आयोग में अपने घाटे का आंकड़ा पेश करती हैं। 2015-16 में कंपनियों ने करीब आठ हजार करोड़ रुपए का घाटा दिखाया है। कंपनियों के इस घाटे की भरपाई बिजली उपभोक्ताओं से रेग्यूलेटरी सरचार्ज एक व दो और मिनिमम सरचार्ज के रूप में वसूल कर की जाती है। वहीं मिनिमम गारण्टी चार्ज की वजह से कामर्शियल विद्युत उपभोक्ताओं का शोषण किया जा रहा है। उनके द्वारा कम बिजली खर्च करने पर भी ज्यादा बिल वसूला जा रहा है। कंपनियों के इस घाटे की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने उदय स्कीम लागू की। ये स्कीम आने के बाद घाटे की 75 प्रतिशत भरपाई सरकारों द्वारा की जा रही है। इसलिए नियमत: कंपनियों को अब उपभोक्ताओं पर लगे सरचार्ज व एमसीजी को स्वत: हटा लेना चाहिए। लेकिन कंपनियां आज भी पावर कारपोरेशन के साथ मिलकर उपभोक्ताओं से पहले की तरह वसूली कर रही हैं। हालांकि राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पिछले दिनों रेग्यूलेटरी सरचार्ज एक को समाप्त कर उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत देने का काम किया था। जबकि रेग्यूलेटरी सरचार्ज दो (4.28 प्रतिशत) व मिनिमम सरचार्ज के रूप में उपभोक्ताओं से वसूल रही हैं। नुकसान की भरपाई सरकार द्वारा किए जाने के बावजूद उपभोक्ताओं पर से उक्त दोनों चार्जों के न हटने पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल की। जिसपर आयोग ने बीते 31 अगस्त को पावर कारपोरेशन व बिजली कंपनियों को तलब कर जवाब मांगा था। जिसपर आजतक जवाब दाखिल नहीं किया गया। इससे यह साबित होता है कि दोनों मिलकर बिजली उपभोक्ताओं का शोषण करने पर आमादा हैं।

उपभोक्ता हितों से नहीं होगा समझौता : अध्यक्ष

बिजली उपभोक्ताओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहे राज्य नियामक आयोग के अध्यक्ष दीपक वर्मा ने साफ कहा कि उपभोक्ताओं के हितों से बिल्कुल भी समझौता नहीं किया जाएगा। अगर पावर कारपोरेशन व बिजली कंपनियों ने इस संबन्ध में मांगे गए सवालों का जवाब नहीं दिया तो एकतरफा फैसला सुना दिया जाएगा। आयोग उपभोक्ताओं को राहत देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा।

बिजली खरीद की कीमत में गिरावट का भी नहीं मिला लाभ

जब किसी चीज के खरीद मूल्य में कमी आती है तो सामानों के दाम भी कम कर दिए जाते हैं। प्रदेश में चार बार बिजली की दरों में इजाफा कर चुकीं बिजली कंपनियां व पावर कारपोरेशन उपभोक्ता हितों पर ध्यान नहीं दे रही हैं। जबकि केन्द्रीय उत्पादन गृहों से पैदा होने वाली बिजली के खरीद मूल्य में लगभग 50 पैसा प्रति यूनिट तक की कमी आई है। ऐसे में उसका लाभ आम जनता को मिलना चाहिये। लेकिन बिजली कंपनियां और पावर कारपोरेशन जनता को लाभ देने की दिशा में कोई भी कार्य नहीं कर रहा है।

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