आवास-विकास पर दो करोड़ बकाया निगम कर सकता है बड़ी कार्रवाई

  • कन्वेंशन सेंटर, वृंदावन योजना में बने कार्यालय और सचिव के आवास को गृहकर जमा करने का नोटिस जारी
  • तय समय पर बकाया जमा न करने की दशा में आवास विकास परिषद के खाते किए जा सकते हैं सीज
  • निगम की कार्रवाई हुई तो परिषद की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पड़ेगा विपरीत असर

 अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। एक ओर आवास-विकास परिषद के लगभग पांच सौ से ज्यादा फ्लैट फंसे हुए हैं। उनकी बिक्री न होने की वजह से परिषद का करोड़ों रुपया डंप पड़ा हुआ है। परिषद के पास नई योजनाओं को शुरू करने के लिए बजट भी उपलब्ध नहीं है। वहीं दूसरी ओर बदहाल आर्थिक स्थिति से जूझ रहे परिषद पर लगभग दो करोड़ रुपये का गृहकर बकाया है। जिसको तय समय में जमा न करने पर नगर निगम ने परिषद का बैंक खाता सीज करने की चेतावनी दी है। यदि तय समय में परिषद ने गृहकर जमा नहीं किया और निगम ने खाता सीज कर दिया, तो परिषद की विभिन्न योजनाओं पर बुरा असर पडऩा तय हो जायेगा। इतना ही नहीं परिषद के साथ-साथ आम जनता को भी उसका नुकसान झेलना पड़ेगा।
आवास विकास परिषद आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इसके बाद भी परिषद के अधिकारी अपनी फिजूलखर्ची से बाज नहीं आ रहे हैं। हाल ही में परिषद द्वारा बिल्डिंग में एयर कंडीशन सेन्ट्रलाइज करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये गये। जबकि परिषद के लगभग सभी अधिकारियों के कमरों में पहले से एसी लगा हुआ था। इसके अलावा कार्यालयों में भी एसी की सुविधा थी। इसके बावजूद परिषद के अधिकरियों के एसी सेन्ट्रलाइजेशन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर डाले। परिषद के अधिकारी फिजूल खर्च पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। हालांकि परिषद के अधिकारी निश्चित समय में हाउस टैक्स जमा करने की बात कह रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नगर निगम ने आवास-विकास परिषद को गृहकर बकाया का नोटिस जारी कर दिया है। यदि तय समय में बकाया जमा नहीं हुआ, तो आवास-विकास परिषद का खाता भी सीज किया जा सकता है।

गृहकर न जमा करने की दशा में हो सकती है कार्रवाई

नगर निगम अधिकारियों की मानें तो निर्धारित समय सीमा से अंदर टैक्स ना जमा करने की स्थिति में आवास-विकास परिषद का खाता सीज करने की कार्रवाही की जा सकती है। ऐेसे में आवास-विकास परिषद में चल रही विभिन्न योजनाओं पर प्रभाव पडऩा तय है। क्योंकि आवास-विकास परिषद एक कॉमर्शियल संस्था है, जहां आवंटियों द्वारा करोड़ों रुपया जमा किया जाता है। साथ ही परिषद भी तमाम ठेकेदारों को रोजाना भुगतान करता है। यही नहीं विभाग में अन्य कई मदों में भी रुपयों का लेनदेन होता है। ऐसे में अगर खाता सीज करने की कार्रवाई हुई, तो आवास-विकास परिषद के अधिकारी समस्या में पड़ सकते हैं। हालांकि किसी भी निर्माणदायी संस्था पर कार्रवाई करने से पहले निगम के अधिकारियों को जिलाधिकारी के पास पत्र भेजकर अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही कुछ कार्रवाई हो सकती है। जबकि नगर आयुक्त उदयराज सिंह ने खुद ही बकाया कर वसूली के मामले में सक्रियता दिखाने का निर्णय लिया है। वह स्वयं निर्माणदायी संस्थाओं के विभागाध्यक्षों और कार्यालय अध्यक्षों से मुलाकात करेंगे। उनसे निश्चित समयांतराल के अंदर गृहकर जमा करने की अपील करेंगे।

आवास-विकास परिषद के कन्वेंशन सेंटर, कार्यालय व भवनों पर बकाया की स्थिति

जोन-7 कन्वेंशन सेंटर, ए-ब्लॉक, इंदिरानगर 9886851 रुपए
जोन-8 आवास-विकास परिषद कार्यालय, वृंदावन योजना 2301435.15 रुपए
जोन-6 आवास-विकास परिषद सचिव, भवन संख्या- 605सीसी-002 2779802 रुपए
जोन-6 आवास-विकास परिषद सचिव, भवन संख्या- 606सीसी-001 3830922 रुपए

आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए नगर निगम चलाएगा अभियान

सरकारी विभागों पर बकाया टैक्स को लेकर नगर निगम ने कमर कस ली है। जल्द ही वह गृहकर वसूली के लिए अभियान चलायेगा और बकाया वसूली की प्रक्रिया को पूरा करेगा। इससे जहां एक तरफ बदहाल आर्थिक स्थिति से जूझ रहे नगर निगम के खाते में मोटी रकम आना तय हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ उस पर लदे करोड़ों रुपये के कर्ज से भी थोड़ी राहत मिलेगी। फिलहाल नगर निगम ने टैक्स वसूली के लिए आवास-विकास परिषद को नोटिस जारी कर दिया है, जिसमें गृहकर जमा करने के लिए एक निश्चित समय दे दिया गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी

“फिलहाल नगर निगम की तरफ से अब तक कोई भी नोटिस नहीं मिला है। परिषद के ऊपर जो भी गृहकर बकाया है। उसका तय समय सीमा के अंदर भुगतान कर दिया जाएगा। उन्हें किसी भी तरह का कड़ा ऐक्शन लेने की जरूरत नहीं होगी। “
-सुशील कुमार गुप्ता
वित्त नियंत्रक, आवास विकास परिषद

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