आवास विकास के गले की फांस बनी नोटबंदी

  • आवास-विकास परिषद की कई योजनाओं पर मंडरा रहा संकट
  • प्रदेश भर में 10 हजार फ्लैट अभी भी खाली
  • लखनऊ में लाटरी होने के बाद भी 41 प्लॉटों की धनराशि नहीं हुई जमा

अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। आवास-विकास परिषद में नोटबंदी का असर साफ-साफ देखने को मिल रहा है। परिषद में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से किश्तें जमा होती हैं। ऑफलाइन में बैंक जाकर और ऑनलाइन में साइट पर पैसा जमा किया जाता है। पिछले महीने तक ऑनलाइन किश्तों के जमा होने का आंकड़ा डेढ़ से दो करोड़ था, जो अब काफी कम हो गया है। वहीं ऑफलाइन किश्त जमा करने का काम लगभग ठप है। इस समय बैंकों में चल रही मारामारी के कारण आवंटी बैंक तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। उधर, परिषद ने अपनी आर्थिक तंगी दूर करने के लिए 41 प्लॉटों का पंजीकरण खोला था, जिसकी लॉटरी भी सात नवंबर को निकाली गई थी लेकिन प्लॉटों की बिक्री से मिलने वाली रकम भी परिषद में ना के बराबर जमा हो रही है। इसके पीछे एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोटों का बंद होना प्रमुख कारण बताया जा रहा है। परिषद को उम्मीद थी कि लॉटरी होते ही आवंटी धनराशि जमा कर देंगे, लेकिन दूसरे दिन ही नोटों पर पाबंदी लग गई।
पिछले दो साल से आवास विकास के फ्लैटों की बिक्री में जबरदस्त गिरावट आई है। इससे प्रदेश भर में परिषद के करीब दस हजार फ्लैट खाली हैं। इनमें से करीब चार हजार फ्लैट तो केवल लखनऊ में हैं। फ्लैट बनने और उनकी बिक्री न होने से आवास विकास की आर्थिक स्थिति काफी गड़बड़ा गई है। परिषद के अधिकारियों ने अपनी फंसी रकम निकालने के लिए कई लुभावनी योजनाएं चलाईं, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। ऐसे में प्लॉट की अधिक मांग को ध्यान में रखकर परिषद ने करीब आठ साल बाद पंजीकरण खोला था। लेकिन पंजीकरण और लाटरी के बाद भी लोगों ने तय धनराशि जमा नहीं की है।

किश्त जमा करने पर भी पड़ रहा असर

परिषद में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से किश्तें जमा होती हैं। ऑफलाइन में बैंक जाकर और ऑनलाइन तरीके से विभाग की वेबसाइट के माध्यम से पैसा जमा किया जाता है। पिछले महीने तक ऑनलाइन किश्तों के जमा होने का आंकड़ा डेढ़ से दो करोड़ था, जो अब काफी कम हो गया है। अभी तक ऑनलाइन किश्त जमा होने का आंकड़ा इस बार पचास लाख रुपये तक भी नहीं पहुंचा है। वहीं ऑफलाइन किश्त जमा होना तो लगभग ठप है। इस समय बैंकों में चल रही मारामारी के कारण आवंटी बैंकों तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।

खाली फ्लैटों के बारे में नहीं बता रहे अफसर

आवास-विकास परिषद की किस योजना में कितने फ्लैट खाली हैं। इसकी सही जानकारी अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं। आम्रपाली योजना में करीब 500 फ्लैट खाली हैं मगर इसकी कोई सूचना वेबसाइट पर नहीं दी गई है, जबकि परिषद खाली फ्लैट बेचने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इसमें ऑनलाइन सिस्टम पर भी काफी जोर है। फ्लैट बेचने की जिम्मेदारी भी संपत्ति प्रभारी अधिकारियों से लेकर इंजीनियरों को दी गई है। इसको लेकर अब इंजीनियर और संपत्ति अधिकारियों में मनमुटाव भी है। परिषद की साइट पर कहने को तो खाली फ्लैटों का ब्योरा है, मगर इसे संपत्ति प्रबंध कार्यालयों से अपडेट ही नहीं किया जा रहा है, जिससे सही विवरण सामने नहीं आ रहा है। इससे इन्हें बेचने की जिम्मेदारी संभाल रहे इंजीनियर भी परेशान हैं। अवध बिहार योजना में तैनात एक अधिशासी अभियंता का कहना है कि अब यदि कोई और फ्लैट निकलता है या आवंटन में कोई विवाद होता है, तो संपत्ति विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे। परिषद की वेबसाइट पर खाली फ्लैटों की सूचना जो एक महीने पहले थी, वही अब भी है। इससे आम्रपाली योजना के एक हजार फ्लैट की सूचना अधिकारियों की फटकार के बाद डाली गई थी। अधीक्षण अभियंता प्रोजेक्ट एसके रायतानी ने बताया कि आम्रपाली योजना के खाली फ्लैट बेचे जाने हैं। वेबसाइट पर इन खाली फ्लैटों की जानकारी क्यों नहीं है। इसका मुझे पता नहीं। खाली फ्लैटों की संख्या जल्द अपलोड कराई जाएगी।

भुगतान नहीं हुआ तो निरस्त होगा आवंटन

अधिकारियों के मुताबिक परिषद द्वारा सात नवंबर को जो 41 प्लॉटों की लॉटरी हुई थी, जिसके बाद आवंटियों को परिषद में पैसा जमा करना था। नियमों के तहत आवंटी को साठ दिनों में पैसा जमा करना है। प्लॉटों का आवंटन किश्त पर नहीं किया गया है। आवंटी को एकमुश्त भुगतान करना है। वहीं, अधिकारियों की मानें तो अगर आवंटी तय समय में भुगतान नहीं कर पाएंगे, तो उनका आवंटन निरस्त भी हो सकता है।

क्या कहते हैं अधिकारी

नोटबंदी का आवास-विकास परिषद की विभिन्न योजनाओं पर क्या असर हुआ है, ये तो आने वाली 28 तारीख को पता चल जाएगा क्योंकि आगामी 28 नवंबर को आवंटन होना है। उसी दिन सही स्थिति सामने आएगी।
अनिल कुमार यादव
संयुक्त आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद
मैं मानता हूं कि नोटबंदी के चलते आवंटियों को बैंकों में किश्तें जमा करने में दिक्कतें हो रही होंगी।
अखिलेश सिंह
अपर आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद

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