आतंकवाद पर दोहरा मापदंड खतरनाक

विश्व के किसी न किसी हिस्से में रोजाना आतंकवादी और आतंकवादी समूह बड़ी वारदातों को अंजाम देकर सैकड़ों लोगों की जान ले रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा परिषद ने आतंकी समूह और उनके आकाओं पर नौ माह बाद भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया। जबकि इसी साल चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अजहर मसूद को आतंकवादी ठहराने संबंधी भारत के कदम पर तकनीकी स्थगन लगा दिया था।

sanjay sharma editor5संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने ही हाथों आतंकवादी संगठन घोषित समूहों के नेताओं को प्रतिबंधित करने में कई महीने बाद भी निर्णय नहीं लिया। जबकि उस संगठन और आतंकी समूह के सरगना के खिलाफ भारत की तरफ से काफी सबूत पेश किए जा चुके हैं। ऐसे में भारत ने सुरक्षा परिषद की तीखी आलोचना की है। उसका यह एतराज पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया पर प्रतिबंध लगाने में विलंब को लेकर है। जो कि जायज भी है लेकिन सुरक्षा परिषद के दोहरे मापदंड विश्व को आतंकवाद से मुक्ति दिलाने की मंशा पर पानी फेरने वाला कदम साबित हो सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन के मुताबिक सुरक्षा परिषद अपने ही समय के जाल और सियासत में फंस गई है। विश्व के किसी न किसी हिस्से में रोजाना आतंकवादी और आतंकवादी समूह बड़ी वारदातों को अंजाम देकर सैकड़ों लोगों की जान ले रहे हैं। इसके बावजूद सुरक्षा परिषद ने आतंकी समूह और उनके आकाओं पर नौ माह बाद भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया। जबकि इसी साल चीन ने संयुक्त राष्ट्र में अजहर मसूद को आतंकवादी ठहराने संबंधी भारत के कदम पर तकनीकी स्थगन लगा दिया था। तकनीकी स्थगन की छह माह की समय सीमा सितंबर में ही समाप्त हो चुकी है। चीन ने तीन माह का एक दूसरा स्थगन लगाने की कोशिश भी की थी। इसलिए भारतीय राजनयिक ने सुरक्षा परिषद में आतंकी समूह से जुड़े लोगों के खिलाफ दोहरे मापदंड और चर्चा के अंतहीन सिलसिले पर अफसोस जताया। दरअसल भारत विश्व में आतंकवादी घटनाओं के पीछे जिन ताकतों का हाथ है, उन्हें पाकिस्तान की तरफ से परोक्ष और चीन की तरफ से अपरोक्ष रूप से सहयोग मिल रहा है। आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम घूमकर भारत को बर्बाद करने की धमकी दे रहे हैं। इनका मकसद भारत को आतंकवाद में उलझाकर विकास की गति को रोकना है। वहीं अमेरिका आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की धमकी तो देता है लेकिन कार्रवाई करने में हीलाहवाली बरतता रहता है। अमेरिका में राष्ट्रपति भी बदलने वाला है। इसलिए आतंकवादियों के खिलाफ कोई भी निर्णय लेने में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है। जबकि भारत का प्रयास अजहर मसूद को आतंकवादी घोषित कराने के साथ ही एनएसजी में स्थायी सदस्यता हासिल करना है। लेकिन इसमें चीन अडंगा डाल रहा है। इसलिए आतंकवाद पर विश्व के सभी देशों को एकजुट होकर आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी। यदि वक्त रहते आतंकियों को नहीं रोका गया, तो पूरे विश्व में आतंकवाद फैलेगा और तब उसे रोक पाना मुश्किल हो जायेगा।

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