अस्थमा रोगियों के लिए खतरनाक आतिशबाजी का धुआं

  • देश में अस्थमा रोगियों की संख्या 3 करोड़ से अधिक

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। दीपावली के दिन पटाखे जलाने में लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। पटाखे जलाते समय हाथ जलने और आग लगने की घटनाएं बहुत अधिक होती हैं। इसलिए अस्पताल में बर्न पेशेंट की संख्या काफी पहुंचती है। साथ ही पटाखों के शोर और धुएं की वजह से होने वाला प्रदूषण भी लोगों के लिए खतरनाक होता है। इसलिए अत्यधिक आवाज और धुआं वाले पटाखों को छुड़ाने से बचना चाहिए क्योंकि तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण और धुआं से अस्थमा रोगियों को सांस लेने में समस्या होने लगती है।
केजीएमयू के पल्मोनरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि दीपावली के दिन तेज आवाज वाले खतरनाक पटाखों को जलाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इससे ब्लड प्रेशर, श्वांस संबंधी और दिल की बीमारी वाले मरीजों को समस्या होती है। पटाखों से निकलने वाली दम घोटूं गैसें कैडमियम, बेरियम, रुबीडियम, स्ट्रांसियम और डाइआक्साइड हवा में फैल जाती हैं। इस धुएं में कार्बन डाईआक्साइड के अलावा कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइ आक्साइड जैसी विषैली गैसें भी शामिल रहती हैं। जो जल, थल और वायुमण्डल पर बुरा प्रभाव डालती हैं। उन्होंने बताया कि भारत में करीब तीन करोड़ लोग अस्थमा पीडि़त हैं। इसलिए आतिशबाजी के दौरान होने वाला धुंआ और धूल के कण से अस्थमा के रोगियों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। धुएं और धूल के महीन कण फेफ ड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। जो श्वांस के रोगियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। धुएं से सांस की नली में सूजन आ जाती है, सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। उन्हें दमा का दौरा भी पड़ सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को धुएं से बचना चाहिए।

महानगरों में बढ़ता प्रदूषण खतरनाक

सीड संस्था प्रदूषण नियंत्रण के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम करती है। इस संस्थान की प्रोग्राम हेड सुरभि शिखा और मैनेजर अंकिता ज्योति के मुताबिक दीपावली पर होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। वायु प्रदूषण निगरानी स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों को सार्वजनिक करना चाहिए। जिस दिन हवा खराब होने का डर हो अलर्ट जारी कर देना चाहिए,ताकि लोग अपने स्वास्थ्य की रक्षा के आवश्यक इंतजाम कर सकें। फिलहाल दीपावली पर सबसे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

आगरा- 155.4 माइक्रोग्राम/मीटर क्यूब।
इलाहाबाद- 93.5 माइक्रोग्राम/मीटर क्यूब।
लखनऊ- 85.6 माइक्रोग्राम/मीटर क्यूब।
वाराणसी- 57.4 माइक्रोग्राम/मीटर क्यूब।
कानपुर- 32.07 माइक्रोग्राम/मीटर क्यूब।

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