अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहा एलडीए

  • तीन साल में केवल 41 भवनों को ही एलडीए ने दिया पूर्णता प्रमाण पत्र
  • बिना पूर्णता प्रमाण पत्र के ही शहर में फल फूल रहा अवैध निर्माणों का बाजार

 अंकुश जायसवाल
captureलखनऊ। एलडीए के भ्रष्टï अफसरों को मिल रहे संरक्षण के कारण राजधानी में बिना नक्शा पास करवाये भवनों का निर्माण तेजी से हो रहा है। शहर में स्वीकृत मानचित्र के अनुसार भवनों को पूर्णता प्रमाण पत्र देने में भी एलडीए के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। जबकि भवन निर्माण की जांच के लिए एलडीए में अभियंताओं की पूरी फौज है, फिर भी कोताही बरती जा रही है। इसी वजह से अवैध निर्माण पर रोक नहीं लग पा रही है।
मालूम हो कि एलडीए ने तीन वित्तीय वर्ष में सिर्फ 41 भवनों को ही पूर्णता प्रमाणपत्र, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। जबकि राजधानी में कुछ वर्षों से ग्रुप हाउसिंग, व्यावसायिक व बहुमंजिला भवनों का निर्माण तेजी से हो रहा है। नियमानुसार 300 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल के भूखंड पर आवासीय व व्यवसायिक भवनों तथा जनसुविधा से संबंधित भवनों को पूर्णता प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। ऐसे निर्माणों की संख्या हजारों में है, लेकिन एलडीए के अभियंताओं ने तीन साल में सिर्फ 41 कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। जो शहर में हो रहे निर्माण कार्य के अनुपात में बहुत ही कम है।

अवैध बिल्डिंगों के खिलाफ कार्रवाई का हाल

एलडीए की तरफ से जारी रिपोर्ट पर ध्यान दें तो स्पष्ट हो जायेगा कि प्राधिकरण के अभियंता अवैध बिल्ंिडगों .पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं। जबकि शासन ने एलडीए को वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए 250 यूनिट का लक्ष्य रखा था। जिसमें से एलडीए ने सिर्फ 16 भवनों को ही पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया था। इसी प्रकार 2012-13 में 9 और 2014-15 में 16 भवनों को प्रमाण पत्र दिया गया है। किसी भी भवन निर्माण के बाद वहां रहने से पहले या विक्रय अथवा किराए पर देने से पहले पूर्णता प्रमाणपत्र यानी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट लेना जरूरी होता है।

पूर्णता प्रमाण पत्र के बाद मिलने वाली सुविधाएं

पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने से कालोनी और भूखंड के लोगों को आवश्यक सुविधाएं मिलने लगती हैं। इसमें पानी, मकान व बिजली आदि के कनेक्शन आसानी से मिल जाते हैं। वहीं भवन के निर्माण की गुणवत्ता, नेशनल बिल्डिंग कोड की गाइड लाइंस के अनुपालन की स्थिति के साथ ही अग्निशमन के लिए किए गए स्ट्रक्चरल सेफ्टी आदि मानकों का विधिवत प्रमाणीकरण हो जाता है। इससे प्राकृतिक आपदा या अन्य किसी अवांछनीय स्थितियों के समय दुर्घटना की संभावना कम से कम होती है।

बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट के नहीं मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं

एलडीए ने बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के पानी व बिजली कनेक्शन देने से मना किया है। इस संबंध में व्यापार कर, नगर निगम, जल संस्थान, निबंधन और पावर कारपोरेशन को बाकायदा पत्र भी लिखा गया है। इसके बावजूद दर्जनों कालोनियों को बिजली और पानी का कनेक्शन दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए तो संबंधित विभागों ने पानी व बिजली कनेक्शन कैसे दिया गया। जबकि अंदरखाने एलडीए के अभियंताओं की मिलीभगत से अन्य विभागों को अन्य सुविधाएं देने की हरी झंडी दे दी गई थी। एलडीए सूत्रों का कहना है कि शुरू में एलडीए उपाध्यक्ष ने सख्ती की थी लेकिन कुछ समय बाद ही भ्रष्टाचार के आरोपी बाबुओं और अधिकारियों को संरक्षण देना शुरू कर दिया है, जिससे एलडीए में फिर से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हो गए हैं। उधर शासन के स्पष्ट निर्देश के बाद भी एलडीए में कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने में लापरवाही बरती जा रही है।

कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के मानक

उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा-15-क के अंर्तगत प्रत्येक व्यक्ति और निकाय को निर्माण कार्य की जानकारी प्राधिकरण को देनी होती है। साथ ही प्राधिकरण की उप विधि में निहित या उपबंधित नियमों के अनुसार पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता है। वहीं उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट, निर्माण, स्वामित्व और अनुरक्षण का संवर्धन अधिनियम, 2010 के अंतर्गत भवनों के लिए प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाना अनिवार्य है। नियमानुसार जब तक पूर्णता प्रमाण पत्र प्राधिकरण जारी नहीं करता है, तब तक भवन का प्रयोग अनाधिकृत माना जाता है। इतना ही नहीं बिना प्रमाण पत्र के उस भवन की कीमत शून्य मानी जाती है। हालिया स्थिति ये है कि धड़ल्ले से बन रहे अवैध भवनों को लेकर शासन तो गंभीर है लेकिन एलडीए की उदासीनता के कारण सरकार को राजस्व का काफी नुकसान हो रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

मैं मानता हूं शहर में अवैध निर्माण बढ़ रहा है लेकिन कहीं से भी अवैध निर्माण से संबंधित कोई शिकायत मिलती है, तो हमारी प्रवर्तन टीम कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को सीज कराती है।
-अनूप यादव
उपाध्यक्ष, लखनऊ विकास प्राधिकरण

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