अब रैली नहीं, छोटी-छोटी बैठकें करेगी बसपा

नोटबंदी को देखते हुए चुनाव प्रचार के लिए बदली रणनीति 

बाबा साहेब की पुण्यतिथि पर सभी विधानसभाओं में होंगी छोटी बैठकें

capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बड़े नोटों के बंद होने का असर राजनीतिक पार्टियों के कार्यक्रमों पर भी दिखने लगा है। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी ने मौजूदा हालत की समीक्षा कर बदली रणनीति के साथ प्रचार-प्रसार करने का निर्णय लिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ी रैली आयोजित करने की परंपरा को किनारे करते हुए अब छोटी बैठकों के माध्यम से लोगों के बीच पैठ बनाने का निर्णय लिया है। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 60वीं पुण्यतिथि के मौके पर सूबे की 403 विधानसभा सीटों पर छोटी बैठकें आयोजित होंगी।
केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ व हजार की नोट बंद किए जाने के बाद बसपा पदाधिकारियों की बैठक में वर्तमान स्थितियों में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए विचार-विमर्श किया गया। इसमें आगामी विधानसभा चुनाव के लिये बदली रणनीति के साथ प्रचार करने का फैसला किया गया है। पैसे की बाधा को ध्यान में रखते हुये पार्टी ने मायावती की बड़ी रैली की परंपरा से फिलहाल किनारा करते हुये छोटी बैठकों के जरिए मतदाताओं के बीच पैठ बनाने की कवायद शुरू की है। इस फैसले के तहत बसपा छह दिसंबर को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 60वीं पुण्यतिथि के मौके पर बड़ी रैली की बजाय सूबे की 403 विधानसभा सीटों पर छोटी बैठकें आयोजित करेगी। इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के अवसर पर लखनऊ में बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। जिसमें दो लाख से अधिक समर्थकों ने हिस्सा लिया था। पार्टी सूत्रों ने बताया कि मायावती ने सभी कैडरों से कहा है कि बाबा साहब की पुण्यतिथि के मौके पर वे अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में पार्टी सम्मेलन आयोजित करें। इन बैठकों के जरिए समर्थकों को पार्टी के आंदोलन के बारे में जानकारी देने के अलावा केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के जनविरोधी कदम और अखिलेश सरकार की नाकामियों के बारे में अवगत करायें।

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