अब ट्रिपल तलाक का मुद्दा उछाल गए मोदीअब ट्रिपल तलाक का मुद्दा उछाल गए मोदी

सवाल यह है कि लखनऊ में जयश्री राम का उद्घोष करने वाले मोदी ट्रिपल तलाक को लेकर आखिर इतने संजीदा क्यों हो गए हैं? सवाल यह भी है कि उत्तर प्रदेश चुनाव के ठीक पहले ही उन्हें यह बात क्यों याद आई? विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाने वाले मोदी क्या खुद इस पर सियासी दांव तो नहीं चल रहे हैं?

sanjay sharma editor5प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ट्रिपल तलाक का मुद्दा उछाल दिया है। बुंदेलखंड के महोबा में आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे आश्चर्य है कि वोट बैंक की राजनीति के लिए कुछ पार्टियां मुस्लिम महिलाओं को उनके प्राकृतिक अधिकार से वंचित रखना चाहती हैं। क्या कोई सिर्फ फोन पर तीन बार तलाक बोल दे तो तलाक हो जाएगा? उन्होंने अपील की, तीन तलाक को सत्ता और विपक्ष का मुद्दा न बनाएं। भारत की मुस्लिम महिलाओं को उनका हक दिलाना हमारी सरकार का कर्तव्य है। ये विकास का मुद्दा है। मोदी ने कन्या भू्रण हत्या पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसा करने वालों को जेल भेजा जाएगा। पीएम ने महोबा में सिंचाई परियोजना का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यदि सिंचाई की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसान जमीन से सोना उगा सकते हैं। मोदी ने यह भी अपील की कि वे दीपावली के मौके पर जवानों को शुभकामना संदेश अवश्य भेजे। सवाल यह है कि लखनऊ में जयश्री राम का उद्घोष करने वाले मोदी ट्रिपल तलाक को लेकर आखिर इतने संजीदा क्यों हो गए हैं? सवाल यह भी है कि उत्तर प्रदेश चुनाव के ठीक पहले ही उन्हें यह बात क्यों याद आई? विपक्ष पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाने वाले मोदी क्या खुद इस पर सियासी दांव तो नहीं चल रहे हैं? जिस तरह से जय श्रीराम के उद्घोष के बाद राम मंदिर का मामला इन दिनों गरमा चुका है, उसे देखते हुए यही लगता है कि वोटों के धु्रवीकरण की कोशिश की जा रही है। यह दीगर है कि इस बार राम के मुद्दे को दूसरी अन्य पार्टियां भी भुनाने में जुट गई हैं। एक अहम बात और है। जिस तरह सपा में घमासान चल रहा है और बसपा खामोश है, उस पर भाजपा के राजनीतिक पंडित अपनी नजरें गड़ाएं हैं और फिलहाल इस सबका भरपूर फायदा उठाने में लगे हुए हैं। बावजूद इसके प्रधानमंत्री को यह समझना चाहिए कि वोटों के धु्रवीकरण के लिए किसी संवेदनशील मुद्दे को उठाना अलग बात है और चुनाव जीतना अलग बात। सरकार को समझना चाहिए कि किसी समाज में परिवर्तन की एक प्रक्रिया होती है। इसके लिए उस समुदाय के लोगों के साथ विचार-विमर्श भी किया जाना चाहिए। केवल दूसरे पर राजनीति का आरोप लगाने से बात नहीं बनती है क्योंकि जनता अब राजनीति के सारे इशारे समझने लगी है। यही नहीं रैली से उन्होंने किसानों को भी साधने की कोशिश की है और जवानों को शुभकामना संदेश देने की अपील कर कहीं न कहीं उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय फौज द्वारा पाकिस्तान में घुस कर की गई सर्जिकल स्ट्राइक को भी जनता को याद दिलाने की कोशिश की। यदि पीएम को मुस्लिम महिलाओं के विकास की चिंता है तो वे पहले उनको आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की पहल करे। अपने हक की लड़ाई वे खुद लड़ लेंगी।

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