अप्रतिम नेता बेमिसाल पार्टी

captureसमाजवादी पार्टी 5 नवम्बर 2016 को रजत जयंती वर्ष (25वें साल) में प्रवेश कर रही है। गत ढाई दशक में समाजवादी पार्टी ने भारत में विशेषकर उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक समाजवाद व सेकुलरिज्म के परचम के पर्याय के रूप में स्वयं को सिद्ध किया है। इस दौरान समाजवादी पार्टी ने सरकारी तानाशाही, पुलिसिया उत्पीडऩ, प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध सबसे अधिक आंदोलन, सत्याग्रह, जेल भरो आंदोलन किए और तीन बार भारत के सबसे बड़े सूबे में सरकार बनाने में सफल हुई। एक बार केन्द्र में भी सपा सरकार के गठन में उल्लेखनीय भूमिका निभा चुकी है। सपा जब विपक्ष में होती है तो मानवीय विभेद, अन्याय व अत्याचार के खिलाफ सतत संघर्ष करती है और सरकार में आते ही लोककल्याणकारी समावेशी विकास कार्यों की झड़ी लगा देती है। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की लोकप्रियता व प्रासंगिकता में कमी नहीं आई।
सपा की सांगठनिक एवं वैचारिक पृष्ठभूमि जितनी परिमार्जित है, उतनी ही पुरानी है। भले ही समाजवादी पार्टी का गठन ‘नेताजी’ मुलायम सिंह यादव संक्रमण व संकट के दौर से गुजर रही देश-प्रदेश की राजनीति के मध्य 1992 ‘छोटे लोहिया’ जनेश्वर मिश्र, बिहार के बड़े समाजवादी नेता व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू कपिलदेव सिंह, लोहिया के प्रिय शिष्य रामशरण दास, बंगाल के मंत्री प्रमोद सिन्हा जैसे प्रतिबद्ध समाजवादियों को एक मंच पर लाकर किया था ताकि गरीबों, वंचितों, किसानों, अल्पसंख्यकों, कमजोरों, मजदूरों, बुनकरों व लघु व्यापारियों के हितों की रक्षा हो व लोकतांत्रिक समाजवाद, पंथनिरपेक्षता, विकेन्द्रीकरण जैसे सामाजिक-राजनीतिक मूल्यों का क्षरण रोका जा सके।
इसमें कोई शक नहीं कि सपा ने पिछड़े व कमजोर वर्ग के नेतृत्व को उभारा है और समाज में व्याप्त गहरी खाई को पाटने की दिशा में अनिर्वचनीय सफलता हासिल की है। देश के अल्पसंख्यकों का जितना विश्वास नेताजी व समाजवादी पार्टी में है, किसी में नहीं। कैफी आजमी जैसे शायर व विद्वान की खुली प्रशंसा के पश्चात इस कथन को प्रमाण की आवश्यकता नहीं रह जाती। हमारा गौरवशाली इतिहास साक्षी है कि 8 सितम्बर 1928 को चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भगत सिंह सरीखे क्रांतिकारी समाजवादियों ने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन सोशलिस्ट एसोसिएशन (हिन्दुस्तान गणतांत्रिक समाजवादी संघ) का गठन स्वतंत्रता व समाजवाद के स्वप्न को साकार करने को किया था। आचार्य नरेन्द्र देव की अध्यक्षता में लोहिया, लोकनायक जयप्रकाश नारायण श्रीधर महादेव जोशी जैसे समाजवादी मनीषियों ने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया और समाजवाद के रोमानी स्वप्न को सैद्धान्तिक आधार दिया। आजादी के बाद लोहिया, जेपी, मधुलिमए, लोकबन्धु राजनारायण, चौधरी चरण सिंह, चन्द्रशेखर जैसे नेताओं ने समाजवाद की ताकत व विचारधारा को अपने-अपने तौर-तरीके से बढ़ाते रहे। किन्तु उदारीकरण के दस्तक के वक्त एक समय ऐसा लगने लगा था कि देश में समाजवादी आंदोलन बिखर चुका है। ऐसे में मुलायम सिंह यादव जी ‘लोहियावादियों’ व चरण सिंह के अनुयायियों को एकत्रकर सपा की नींव रखी। उस समय किसी को उम्मीद नहीं थी कि नेताजी व समाजवादी पार्टी को सफलता मिलेगी। अनथक श्रम, त्याग व असंख्य बलिदानों के कारण आज समाजवादी पार्टी भारतीय राजनीति का महत्वपूर्ण अध्याय है। नेताजी के संघर्षों को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं है। संविधान व सामाजिक सद्भाव को बचाने के लिए नेताजी ने सत्ता को ठुकराना पसंद किया लेकिन सिद्धान्त से विचलित नहीं हुए। नेताजी व समाजवादी पार्टी ने लोहिया की अवधारणाओं को समसामयिक बनाकर परिमार्जन करते हुए व्यवहार में उतारा। इसे सिर्फ दो उदाहरण से स्पष्ट किया जा सकता है। लोहिया प्रशासन-शासन में सामंती भाषा (अंग्रेजी) की जकडऩ से देश को मुक्त कराना चाहते थे। नेताजी व सपा की सरकार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा की परीक्षाओं से अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म कर गांव व गरीब परिवारों से जुड़े हिन्दी भाषी प्रतिभाओं के लिए शीर्ष सेवा के पट खोले। यह एक ऐतिहासिक एवं बड़ा काम था जिसे नेताजी जैसा जीवट व्यक्तित्व वाली समाजवादी सरकार ही कर सकती है। 1954 में मात्र 15 वर्ष की अवस्था में नेताजी लोहिया जी के आह्वान पर ‘नहर-रेट’ घटाने के लिए पहली बार जेल गए थे। जब समाजवादी पार्टी की बहुमत की सरकार उत्तर प्रदेश में 2012 में समाजवादियों के अवर्णनीय सतत संघर्षोपरान्त बनती है तो नहरों के पानी को सिंचाई के लिए नि:शुल्क कर दिया जाता है। समाजवादी पार्टी भारत में समाजवादी विचारधारा में गहरी आस्था रखने वाले लोहिया व चरण सिंह के समर्थकों को एक साथ लाकर साम्प्रदायिकता के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के लिए अपने रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में पूर्णतया तैयार है।
समाजवादी पार्टी और नेताजी के कार्यों और उपलब्धियों को गिनाने बैठूंगा तो कई ग्रन्थ लिखने पड़ेंगे। देश में आम धारणा है कि समाजवादी पार्टी व नेताजी ही साम्प्रदायिक शक्तियों को ध्वस्त कर सकते हैं। करोड़ों कार्यकर्ताओं का अटूट विश्वास ही समाजवादी पार्टी की अनमोल पूंजी व ताकत है जो किसी भी झंझावात में कभी डिगा नहीं।

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