होली में मिलावट और केमिकल वाले रंगों से जरा संभल के

  • केमिकल वाले रंग दे सकते हैं कैंसर को दावत
  • मिठाइयों और पापड़ में रंगों के इस्तेमाल से भी पेट संबंधी बीमारियां होने का खतरा

प्रभात तिवारी
लखनऊ। मिलावटखोरों की वजह से त्यौहार की रौनक फीकी पड़ सकती है। शहर में खुलेआम मिलावटी खाद्य पदार्थ और खतरनाक केमिकल वाले रंगों की बिक्री हो रही है। रंग खेलने के शौकीनों ने अभी से अलग-अलग रंगों का स्टॉक जुटाना शुरू कर दिया है। होली में रिश्तेदारों और पहचान वालों को गिफ्ट देने के लिए मिठाई की दुकानों पर अभी से बुकिंग शुरू हो गई है। ऐसे में बीमारियों से बचने और सेहत के लिए फायदेमंद खाद्य पदार्थों का सेवन बनी चुनौती बनती जा रही है। इसका सामना सुझ-बूझ से करने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों की टीम व्यापक स्तर पर छापेमारी अभियान चला रही है। शहरी क्षेत्र की विभिन्न खोवा मण्डियों, दुग्ध मण्डियों, डेयरियों, मिठाई की दुकानों, तेल, रिफाइंड, पापड़ और चिप्स की दुकानों पर भी छापेमारी की जा रही है। पिछले 20 दिनों में ३५ से अधिक खाद्य पदार्थों के नमूने लिये गये हैं। इनमें खोवा, पनीर, बेसन, रिफाइंड, सरसो का तेल और पापड़ के नमूने शामिल हैं। इन सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसपी सिंह के मुताबिक होली के त्यौहार पर विभिन्न खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका और जनता से मिली शिकायतों के आधार पर छापेमारी की जा रही है।
केमिकल वाले हर रंग में बीमारी फैलाने की क्षमता

होली के त्यौहार पर रंगों में केमिकल का इस्तेमाल लोगों को स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का मरीज बना सकता है। इसके अलावा आंखों की रोशनी चले जाने का खतरा भी होता है। इसलिए केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल करने से बचें और होली पर ईको फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल करें। डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल के वरिष्ठ त्वचारोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश अहिरवार के मुताबिक केमिकल वाले रंगों का इस्तेमाल बहुत ही खतरनाक होता है। इसमें अलग-अलग रंगों में अलग-अलग प्रकार की बीमारियों को फैलाने की क्षमता होती है। इसमें रेड कलर में मक्र्यूरिक आक्साइड मिला होता है, जो स्किन की एलर्जी और स्किन कैंसर का कारण बनता है। ग्रीन कलर में कॉपर सल्फेट मिला होता है, जो आंख की बीमारी और अन्धता की वजह बनता है। ब्लैक कलर में लेड मिला होता है, जो स्किन की एलर्जी और गुर्दे को नुकसान पहुंचाता है। सिल्वर कलर में एल्युमिनियम ब्रोमाइड मिला होता है, जो स्किन कैंसर का कारण बनता है। पीले रंग में क्रोमियम ऑयोडाइड मिला होता है, जो पूरे एलर्जी के साथ ही सांस संबंधी बीमारियों की वजह बनता है। इसी प्रकार पर्सियन ब्लू कलर में भी हानिकारक लेड केमिकल का इस्तेमाल होता है, जो शरीर पर बड़े लाल चकत्ते और रगडक़र रंग लगाने के बाद स्किन उधडऩे की समस्या पैदा करता है। होली में चमकीले रंगों का चेहरे पर इस्तेमाल बहुत ही खतरनाक होता है। इसमें पिसा हुआ शीशा मिला होता है, जिससे एलर्जी की समस्या हो जाती है।
घर पर बनायें हर्बल कलर

होली में हर्बल कलर को घर पर भी बनाया जा सकता है। इसमें हरा रंग बनाने के लिए मेंहदी पीसकर और आटे में मिलाकर रंग तैयार किया जा सकता है। पीला रंग बनाने के लिए हल्दी और बेसन को मिलाकर रंग तैयार कर सकते हैं। लाल रंग बनाने के लिए चंदन की लाल लकड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं। नीला रंग बनाने के लिए नीली गुलमोहर को आटे में मिलाकर रंग बना सकते हैं। सेफ्रान कलर टेसू के फूल से बनाया जा सकता है। भूरा रंग पान में इस्तेमाल होने वाला कत्था पीसकर पानी में मिलाकर बनाया जा सकता है। इन रंगों के बनाना बहुत ही आसान है। इसके अलावा होली में हर्बल रंगों से शरीर को भी किसी भी प्रकार का नुसकान नहीं होता है।

केमिकल वाले रंगों से बचाव के उपाय
डॉ. अहिरवार के मुताबिक होली के त्यौहार पर चमकीले और केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें। होली में रंग खेले से पहले सिर में खूब अच्छी तरह तेल लगा लें। इसके अलावा कान और आस-पास की जगहों पर भी तेल लगा लें। पूरे शरीर में नारियल और जैतून का तेल लगा लें। शरीर में वाटर प्रूफ सन्सक्रीम लोशन लगा लें। इससे त्वचा के अंदर केमिकल वाले रंगों के पहुंचने का खतरा कम हो जाता है। होली में महिलाओं को भी खास ध्यान रखना चाहिए। इसे नाखून के रास्ते शरीर में केमिकल वाले रंगों के पहुंचने का खतरा कम हो जाता है। जिन लोगों की आंख में लेंस लगा है, वे रंग और गुलाल की होली खेलने से बचें।

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