होम्योपैथी विभाग में दिया जा रहा भ्रष्टाचार को बढ़ावा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश आधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होम्योपैथी विभाग में 346 फार्मासिस्टों का चयन हुए दो महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक इन चयनित फार्मासिस्टों का सत्यापन होम्योपैथी विभाग द्वारा पूरा नहीं कराया गया । सत्यापन प्रक्रिया में विलंब के चलते ही इन फार्मासिस्टों को तैनाती भी नहीं मिल पायी है।
ऐसे में सैकड़ों फार्मासिस्टों के सामने विभाग में चयन के बाद वेतन मिलने का संकट सामने आ गया है। जानकारों की मानें तो चयन होने के बाद जब तक विभाग सत्यापन प्रक्रिया को पूरा नहीं करेगा। तब तक चयनित 346 फार्मासिस्टों को तनख्वाह के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी। सूत्रों की मानें तो चयनित फार्मासिस्टों को सत्यापन के नाम पर विभागीय लोगों द्वारा तरह-तरह के प्रलोभन दिये जा रहे हैं, जिससे यहां पर भ्रष्टïाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
तीन महीने बाद भी नहीं मिल रही तैनाती
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के जरिये चयनित 346 फार्मासिस्टों को होम्योपैथी विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बिना सत्यापन के इन फार्मासिस्टों को वेतन मिलना तो दूर अभी तक तैनाती ही नहीं मिल पायी है। चयन के बाद तैनाती न मिलने के कारण फार्मासिस्ट समझ नहीं पा रहे हैं कि वो करें तो क्या करें। ऐसे मे वो विभाग के चक्कर लगाने पर मजबूर हैं। दूसरे विभागों में तैनातीचयनित फार्मासिस्टों के सत्यापन में हो रही देरी होम्योपैथी विभाग की घोर लापरवाही है। तैनाती के बाद भी इन फार्मासिस्टों का सत्यापन कराया जा सकता था। लेकिन सत्यापन के नाम पर तैनाती नहीं की गयी और सत्यापन में लेट लतीफी की जा रही है।

जबकि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड चयनित फार्मासिस्टों के चयन के समय ही अन्य विभागों जैसे टीचरों तथा लैब टेक्निशियनों का चयन हुआ था, उनकी तैनाती के साथ ही सत्यापन भी हो गया। उन लोगों को विभाग से वेतन भी मिलने लगा है। जहां चयन के एक सप्ताह बाद ही लैब टेक्निशियनों का सत्यापन स्वास्थ्य विभाग द्वारा करा दिया गया था। वहीं होम्योपैथी के फार्मासिस्ट आज भी धक्के खा रहे हैं।

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