होटल संचालकों को नहीं है किसी का डर

  • होटल संचालक अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर नहीं हैं गंभीर 
  • दो बार नोटिस भेजने के बाद भी होटल संचालक नहीं दिखा रहे गंभीरता
  • जिला प्रशासन की नोटिस का जवाब भी नहीं देते होटल संचालक

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में होटल संचालकों की मनमानी चरम पर है। उन्हें न तो शासन-प्रशासन का डर है और नहीं लोगों की जान की परवाह है। अग्नि सुरक्षा मानकों की ताक पर रखने वाले होटल मालिकों को कई बार नोटिस के बावजूद होटलों में अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। होटल संचालकों के रवैये से नाराज प्रशासन ने अब होटल मालिकों को तीसरी और अंतिम नोटिस जारी की है।
जून 2014 में प्रतापगढ़ के एक होटल में लगी आग से दर्जन भर लोग हताहत हुए थे। उस घटना के बाद राजधानी में प्रशासन ने होटलों की जांच के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने चारबाग के आस-पास जिन होटलों की जांच में उनमें से करीब दो दर्जन होटलों में आपदा व आग से निपटने के किसी तरह के इंतजाम नहीं थे। इस पर प्रशासन ने दो बार नोटिस जारी की, जिसके बाद कुछ होटलों ने अग्निसुरक्षा को लेकर काम किया लेकिन बाकी सोते रहे। जिला प्रशासन की तरफ से नोटिस जारी की गई थी लेकिन किसी भी होटल संचालक ने जवाब नहीं दिया। चारबाग क्षेत्र में सकरी गलियों में कई होटल चल रहे है। अगर कोई हादसा हो जाए तो फिर बड़ी संख्या में लोग हताहत हो सकते हैं। होटल संकरी गलियों में चल रहे हैं और आपदा के वक्त राहत पहुचाना भी संभव नहीं होगा। इस संबंध में एडीएम पूर्वी निधि श्रीवास्तव के कहा कि जिला प्रशासन व फायर विभाग की ओर से चारबाग इलाके में स्थित होटलों में फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच की गई थी, जिसमें कई होटलों की हालात बेहद खराब मिली। जांच में यह भी सामने आया था कि इनमें से कई होटल बिना लग्जरी टैक्स जमा किए ही चल रहे हैं। एडीएम का कहना है कि अंतिम नोटिस के बाद भी अगर सुधार नहीं हुआ तो फिर होटलों को सील किया जा सकता है।

Pin It