हॉस्टल से निकाले जाने के बाद भी पूर्व प्रोवोस्ट का कब्जा बरकरार

पूर्व प्रोवोस्ट शीला मिश्रा ने नहीं सौंंपी हैं चाबियां और संबंधित रिकॉर्ड
रजिस्ट्रार ने पूर्व प्रोवोस्ट को जारी की नोटिस

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश हॉस्टल की व्यवस्था अब तक सामान्य नहीं हो पाई है। इसकी वजह पूर्व प्रोवोस्ट शिला मिश्रा हैं। उन्होंने अब तक नई प्रोवोस्ट को हॉस्टल से संबंधित चाबियां और जरूरी दस्तावेज हैंडओवर नहीं किया है। इससे प्रो. अमिता बाजपेई ने अब तक पूरी तरह चार्ज नहीं संभाल पाई हैं। वहीं विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने 18 तारीख तक का अल्टीमेटम जारी किया है। इसके बाद पुलिस प्रशासन व विश्वविद्यालय प्रशासन की मौजूदगी में ताला तोड़वा दिया जाएगा।
लम्बे समय से प्रो. शीला मिश्रा को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कई नोटिस जारी की गई है। लेकिन इन नोटिसों और विश्वविद्यालय प्रशासन का मजाक बनाकर पूर्व प्रोवोस्ट ने अब तक इसका पालन नहीं किया है। जिसे देखते हुए रजिस्ट्रार अखिलेश मिश्रा ने प्रो. मिश्रा को 18 अप्रैल तक का समय दिया है। साथ ही यह भी चेतावनी दी है कि निर्देश की अवहेलना करने पर विश्वविद्यालय प्रशासन पुलिस की मौजूदगी में ताला तोड़वाएगा।

2005 में भी था यही रवैया
सूत्रों की मानें तो जब प्रो. मिश्रा को 2005 में मैनेंजमेंट हॉस्टल से इन्हीं सब आरोपों के कारण हटाया गया था, तब भी उन्होंने हॉस्टल के दस्तावेज अपने पास ही रखे थे। यहां तक की कमरों में ताला बंद कर चाबियां भी अपने पास रखी थीं। विश्वविद्यालय प्रशासन को जबरन इन्हें हॉस्टल से निकाल कर ताला तोडऩा पड़ा था।
गौरतलब है कि कैलाश हॉस्टल की छात्राओं ने विवि प्रशासन को प्रोवोस्ट के खिलाफ शिकायती पत्र में कई गम्भीर मामलों का खुलासा किया था, जिसमें कई दिनों तक कोई कार्रवाई न होने पर छात्राओं ने शिकायती पत्र की एक कॉपी समाजवादी छात्रसभा और मीडिया को उपलब्ध कराईं। इसके बाद से विवि प्रशासन हरकत में आया और प्रो. शिला मिश्रा को उनके पद से हटाकर जांच के निर्देश दिए गए , लेकिन विवि प्रशासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए प्रोवोस्ट ने हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को उकसा कर सडक़ों पर बवाल काटना शुरू कर दिया। प्रो. मिश्रा को हटाने के लिए विवि प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। आज भी पूरी तरह से प्रो. मिश्रा ने हॉस्टल नहीं छोड़ा। यहां तक की उन्होंने अब तक नई प्रोवोस्ट प्रो. अमिता बाजपेई को न तो जरूरी दस्तावेज और चाबियां भी हैंडओवर नहीं की हैं। इससे हॉस्टल में कार्य करने में प्रोवोस्ट को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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