हिंद महासागर पर साया

सतीश पेडणेकर
चीन की लाल छाया केवल हमारे उत्तरी और उत्तर पूर्वी सीमा पर ही नहीं मंडरा रही वरन वह दक्षिणी सीमा पर भी नजर आने लगी है। हिंद महासागर कभी सचमुच हिंद महासागर था जहां भारत की तूती बोलती थी, लेकिन चीन के एक महाशक्ति के रूप में उभरने से नजारा बदलता जा रहा है। पुराने अंतरराष्ट्रीय समीकरण उलट पुलट हो रहे हैं। जिस तरह हिंद महासागर में चीन की पनडुब्बियां गाहे-बगाहे आती रहती है, उससे हिंद महासागर के चीन महासागर में बदलने के आसार नजर आ रहे हैं। यदि भारत ने अपनी नौसैनिक शक्ति और खासकर पनडुब्बियों की संख्या, शक्ति और मारक क्षमता नहीं बढ़ाई तो हम मूकदर्शक बने रहने के अलावा कुछ नहीं कर पाएंगे।
भारत ही नहीं सारी दुनिया यह मानती रही है कि हिन्द महासागर भारत के लिए सामरिक द़ृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। अपनी शक्तिशाली नौसेना के जरिए वह पूर्व को पश्चिम से जोडऩे वाले इस जलमार्ग की निगरानी कर सकता है जहां से विश्व का एक तिहाई व्यापार होता है, लेकिन चीन इससे सहमत नहीं है। उसका कहना है कि हिन्द महासागर को भारत का आंगन नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी करके चीन ने पहली बार हिन्द महासागर में भारत की परंपरागत भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके पीछे उसका तर्क यह है कि मुक्त महासागर को किसी का आंगन नहीं कहा जा सकता। यदि हिन्द सहासागर भारत का आंगन है तो यहां अमेरिका, आस्ट्रेलिया और रूस की नौसेनाएं क्या कर रही हैं। वह चेतावनी भरे अंदाज में कहता है कि यदि उसे भारत का आंगन माना जाता रहा तो संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। चीन केवल धमकी देकर ही चुप नहीं हो जाता। वह उस पर गाहे-बगाहे अमल भी करता रहता है और इस तरह बार-बार यह जताने की कोशिश करता है कि हिंद महासागर में उसका भी दखल है। पिछले सितंबर में चीन के राष्ट्रपति ली जिनपिंग भारत आए थे तब चीन के कई सैनिक चूमार में घुस आए थे। तब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अपनी नौसेना की दो पनडुब्बियां हिन्द महासागर में भेजी थी।
हबानटोटा वह बंदरगाह है जिसे चीन ने श्रीलंका के जहाजी आवागमन के लिए बनाया है। यह सब उसने चोरी छिपे नहीं किया था। भारतीय नौसेना को उनके बारे में पहले से ही पता चल गया था, क्योंकि डीजल द्वारा संचालित पनडुब्बियों को पानी के अंदर यात्रा करने के दौरान 24 घंटे में सतह पर आना पड़ता है ताकि वे अपनी बैटरी को रिचार्ज कर सकें। यदि चीन अपने मिशन को गोपनीय रखना चाहता तो चीन न्यूक्लियर संचालित पनडुब्बियों को भेजता। जिन्हें कई हफ्तों तक सतह पर आना ही नहीं पड़ता। इससे स्पष्ट था कि डीजल संचालित पनडुब्बियों को भेजने के पीछे चीन का मकसद भारत को यही बताना था कि वह हिन्द महासागर को भारत का आंगन नहीं मानता। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब चीन ने हिन्द महासागर में भारत की भूमिका को चुनौती दी है।इसके बाद नवंबर में चीन की सेना पीएलए ने दूसरी पनडुब्बी भेजी।वह न्यूक्लियर पनडुब्बी थी । वह अपनी यात्रा के दौरान हमेशा पानी के भीतर ही रही।इस बार भी र्शीलंका ने उन्हें हेबानटोटा में ठहरने दिया।इस दौरान एक अच्छी बात यह हुई कि र्शीलंका के चुनाव में राजपक्षे की पार्टी हारी और र्शीसेना की पार्टी की सरकार बनीं।र्शीसेना जीतने के बाद दिल्ली आए थे और उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आश्वासन दिया था कि कि वे चीनी पनडुब्बियों को हेबानटोटा में ठहरने की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन इससे चीनी चुनौती खत्म हो गई हो ऐसा नहीं कहा जा सकता।
इसके बजाय चीन अब हिन्द महासागर में अपनी ताकत का प्रदर्शन करने लगा है। इस साल मई में एक चीनी पनडुब्बी र्शीलंका को पार कर अरब सागर में काफी अंदर तक भारतीय समुद्री सीमा के नजदीक तक चली आई। इसका उद्देश्य यह बताना था कि उनकी डीजल पनडुब्बी भी कितनी शक्तिशाली और क्षमतावान है। पिछले कुछ समय से चीन अपनी नौसेना शक्ति का प्रदर्शन करता रहता है। पिछले दो वर्षों में भारत के पनडुब्बी शोधक जहाजों ने चीनी पनडुब्बियों को 68 बार भारतीय समुद्री सीमा से गुजरते देखा। चीन का कहना रहा है कि ऐसा वह समुद्री डकैतों पर निगरानी रखने के लिए करता है। भारत इसके जवाब में कहता रहा है कि इसके लिए पनडुब्बी की जरूरत नहीं है, लेकिन चीन का जवाब होता है क्यों नहीं। पनडुब्बियां एंटी पायरेट एक्शन में क्यों हिस्सा नहीं ले सकती।
उसका कहना है कि हिन्द महासागर को भारत का आंगन नहीं माना जा सकता। यह टिप्पणी करके चीन ने पहली बार हिन्द महासागर में भारत की परंपरागत भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके पीछे उसका तर्क यह है कि मुक्त महासागर को किसी का आंगन नहीं कहा जा सकता। यदि हिन्द सहासागर भारत का आंगन है तो यहां अमेरिका, आस्ट्रेलिया और रूस की नौसेनाएं क्या कर रही हैं। वह चेतावनी भरे अंदाज में कहता है कि यदि उसे भारत का आंगन माना जाता रहा तो संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। चीन केवल धमकी देकर ही चुप नहीं हो जाता। वह उस पर गाहे-बगाहे अमल भी करता रहता है और इस तरह बार-बार यह जताने की कोशिश करता है कि हिंद महासागर में उसका भी दखल है।

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