हाथों से नहीं पैरों से चित्रकारी का हुनर देखिए

Captureगोकरण बोलकर अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकते, हाथ भी इस काबिल नहीं कि कोई हुनर काम आए। लेकिन इसका इन्हें कोई मलाल नहीं है। इसके बाद भी वह ईश्वर को धन्यवाद देते हैं, पेंटिंग्स से अपना मुकाम बनाया है। 4पीएम की रिपोर्टर हिना खान से बातचीत के कुछ अंश…

जन्म से विकलांग हैं इसलिए इतनी समस्या नहीं होती?
इशारों में सावाल करने पर गोकरण लिखकर बताते हैं कि समस्या तो तब होती है जब व्यक्ति सम्पूर्ण अंग के साथ पैदा होता है। मुझे दिक्कत इसलिए कम होती है क्योंकि मैं इन्हीं के साथ पैदा हुआ था। जो कम है उसकी तरफ ध्यान देने के बजाए मैंने जो है उसका इस्तेमाल करना शुरू किया।
मेरा परिवार मेरा प्रेरणा स्त्रोत है?
मेरे परिवार वालों ने हर पल मेरा मार्गदर्शन किया। मुझे इतना सक्षम बनाया की मैं आज अपने घर से दूर हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा हूं। मुझे पढऩे-लिखने का शौक था तो उन्होंने मेरे हाथ में कलम थमा दी और मैंने आगे की पढ़ाई शुरू कर दी।
आपकी पहचान कैसे बनी?
पढ़ाई के साथ-साथ कला में शौक बढ़ता चला गया। आज उसी कला की बदौलत मेरी इस भीड़ में एक अलग पहचान है। मैं बोल नहीं सकता मैं अपनी भावनाओं को किसी से व्यक्त नहीं कर सकता। कला एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए मेरी भावनाएं लोगों तक पहुंचती हैं।
आपने कहां से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं?
चित्रकूट में जगतगुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय है जो दुनिया का एक मात्र ऐसा विवि है, जहां से विकलांग छात्रों को बेहतर शिक्षा मिलती है। मैं भी उसी विवि से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट कर रहा हूं।
आपके परिवार में कौन-कौन हैं?
मेरे पिता जी का बहुत पहले ही स्वर्गवास हो गया था। अभी माता जी, एक छोटा भाई है जो सेना में है। वहीं घर चलाता है।
पूरी तरह से सक्षम होते तो आप क्या बनते?
जरूर मैं भी अपने भाई की तरह ही सेना मे भर्ती होकर देश सेवा करता। लेकिन जो नहीं कर सकता उसके विषय में ज्यादा सोचता नहीं हूं। ईश्वर की दया से और परिवार व शिक्षक की मेहनत से जो प्रतिभा है उसकों आगे ले जाना चाहता हूं।
अब तक कितनी प्रतियोगिता और प्रदर्शनियों में भाग लिया है?
यह तो याद नहीं है। पर इतना आपको जरूर बता सकता हूं कि मुझे अब तक 380 प्रमाणपत्र और 28 मेडल मिल चुके हैं। साल 2011 में शिमला में राष्ट्रीय स्तर पर एक कला प्रतियोगिता में भाग लिया था उसमें देश भर से कलाकार आए थे। उसमें मुझे प्रथम पुरस्कार मिला था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद क्या करेंगे?
मैं आगे कंप्यूटर की शिक्षा लूंगा और आगे इसी के जरिए नौकरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
तो क्या आप कला को छोड़ देंगे?
नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है कला मेरा जीवन है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि इसे और उपर तक ले जाने के लिए मुझे ज्यादा पैसों की अवश्यकता होगी। इसलिए मैं नौकरी करना चाहता हूं। कंप्यूटर एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए मैं आसानी से काम कर सकूंगा।
भविष्य में क्या करना चाहते हैं?
मुझे भिखारियों और अपने जैसे लोगों को देखकर दुख होता है। मैं तो इतना सक्षम हूं लेकिन वह लोग जिनको इसी कमी के कारण लोग सडक़ों पर छोड़ जाते हैं। परिवार उन्हें बोझ समझते हैं मैं ऐसे लोगों के लिए कुछ बड़ा करना चाहता हूं। जिससे उनकों नई राह मिल सके।
लखनऊ आकर कैसा लगा?
लखनऊ हर लिहाज से बहुत अच्छा है। एक कलाकार के लिए यहां बहुत कुछ है। यहां के लोग भी बहुतअच्छे हैं। मैं आगे भी यहां आना चाहूगां।

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