हाई कोर्ट ने पीआईएल फाइल करने वाली समिति पर ही उठाया सवाल

  • बीबीएयू में ओबीसी छात्रों के लिए निर्धारित कोटे का मामला

लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में ओबीसी छात्रों के लिए आरक्षण की मांग उठाने वाले पिछड़ा जनकल्याण समिति की ओर से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करने के अधिकार पर ही सवाल उठा दिया है। कोर्ट ने भी प्रथम दृष्टया माना है कि समिति को रिट याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि कोर्ट ने समिति के वकील को अपना पक्ष रखने के लिए 11 जुलाई तक का समय दिया है।
यह आदेश जस्टिस एपी साही व जस्टिस विजय लक्ष्मी की बेंच ने समिति की ओर से ओबीसी छात्रों के हक के लिए दायर याचिका पर दिया है। न्यायाधीशों ने कहा कि पहली नजर में समिति के बाइलाज को देखने से यह नहीं लगता कि उसे पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिक्षा का मामला उठाने का हक है। कोर्ट ने समिति के वकील को समिति का पूरा मेमोरेंडम पेश करने के लिए समय दिया है। गौरतलब है कि समिति ने याचिका पेश कर मांग की थी कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में एससी-एसटी स्टूडेंट्स को दाखिलों में पचास प्रतिशत आरक्षण का अधिकार है। जबकि ओबीसी स्टूडेंट्स के लिए कोई कोटा नहीं है। ऐसे में ओबीसी स्टूडेंट्स को बीबीएयू में होने वाले दाखिलों में निर्धारित कोटा के अनुसार लाभ दिया जाना चाहिए। कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अपर सॉलिसिटर जनरल अशोक मेहता व वरिष्ठ अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि समिति को यह रिट दाखिल करने का हक ही नहीं है। क्योंकि समिति के बाईलाज में समिति को ऐसे कार्य करने का प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस तर्क को ठीक माना। परंतु समिति के वकील अमित बोस ने कहा कि समिति के बाइलाज में यह है। उन्होंने कोर्ट से पूरा बाइलाज पेश करने का समय मांगा। समिति को 11 जुलाई तक का समय दिया है।

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