हाइपरटेंशन है दुनिया में तीसरे नंबर की खतरनाक बीमारी: डॉ. रियान टूज

  • भारत में पहली बार हो रही है हाइपरटेंशन बीमारी पर कार्यशाला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। आम जनमानस में हाइपरटेंशन (हाई ब्लड प्रेशर ) को हल्के में लिया जाता है। जबकि यह दुनिया की तीसरे नम्बर की सबसे खतरनाक बीमारियों की श्रेणी में आती है, जो सबसे ज्यादा लोगों की मौत का कारण बनती है। जहां एक तरफ लोग हाइपरटेंशन को नजरअंदाज करते हैं, वहीं चिकित्सक इसको लेकर बेहद गंभीर हैं। इसी वजह से ओपीडी में किसी मरीज को देखते समय चिकित्सक सबसे पहले उसका ब्लड प्रेशर चेक करते हैं।
हाइपरटेंशन जैसी घातक तथा छुपी बीमारी से लोगों को बचाने तथा जागरूक करने के लिए राजधानी के चिकित्सकों ने शुरुआत कर दी है। इसके लिए राजधानी में पहली बार इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ हाइपरटेंशन और इंडियन सोसाइटी ऑफ हाइपरटेंशन के संयुक्त तत्वावधान में चार दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में देश के 30 चिकित्सक भाग ले रहे हैं। इसमें विदेश से आये डॉ. रियान टू, डॉ. नील पोल्टर, डॉ. फेडी हाना और डॉ. बंशी शाहू अन्य डॉक्टरों को हाइपरटेंशन के खतरे तथा इलाज के बारे जानकारी देकर अत्याधुनिक तौर पर तैयार कर रहे हैं।
यूके के ग्लास्गो की डॉ. रियॉन टूज ने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति को को हाइपरटेंशन कैसे हो जाता है, इस बात की जानकारी आम लोगों को अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि हाइपरटेंशन अनुवांशिक भी हो सकता है। उन्होंने कृषि का उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार खेतों में बीज डालने भर से फसल नहीं हो जाती। उसी प्रकार सुसुप्ता अवस्था में पड़ेे हाइपरटेंशन के बीज को अपनी आदतें सुधार कर दबाया जा सकता है। जिस व्यक्ति के परिवार में हाइपरटेंशन की बीमारी रही हो उसे शराब ,धूम्रपान से दूर रहना चाहिए। साथ ही अपनी दिनचर्या को सही रखना आवश्यक है।
इंडियन सोसाइटी आफ हाइपर टेंशन के महासचिव और केजीएमयू के प्रो. नरसिंह वर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में भागदौड़ भरी जिंदगी में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे तनाव न हो। इसके बावजूद भी यदि सचेत रहा जाय तो हाइपरटेंशन जैसी घातक बीमारी से दूर रहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि 67 प्रतिशत लोगों को हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी का पता ही नहीं चलता।
बीबीडी में मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज महेश्वरी ने बताया कि देश के 33 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन की गिरफ्त में हैं, जिनकी कुल संख्या लगभग 37 करोड़ के करीब हैं 17 प्रतिशत शहरी और 14 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में यह बीमारी पाई जाती है। 50 प्रतिशत पुरूष इस बीमारी की गिरफ्त में हैं, जबकि 50 वर्ष की महिलाएं इस बीमारी की गिरफ्त में ज्यादा आ रही है। मधुमेह की बीमारी से ग्रसित मरीजों की संख्या से इस बीमारी के मरीजों की संख्या सात करोड़ ज्यादा है।

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