हां! मैं बनना चाहता हूं गर्ल

मां तो प्रत्येक लडक़ी बनना चाहती है लेकिन मां बनने के लिए लडक़ी बनने जा रहे डा0 जेनिफर एलिजाबेथ दास की जंग उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े मेडिकल इंस्टीट्यूट पीजीआई में जारी है। इलाहाबाद के फेमस डाक्टर दंपत्ति एसएन दास और आशा दास के इकलौते बेटे जी ए दास 40 वर्ष की उम्र में लडक़ी बन शादी रचाना चाहते हैं। उनकी तमन्ना लडक़ी बनना है, शुरूआती इलाज के बाद मौजूदा समय में वह चेंज के दौर से गुजर रहे हैं। हारमोनल बदलाव के बाद उसके आगे का इलाज इंग्लैंड में होगा। आर्थिक आभावों से जूझ रहे जेनिफर पेशे से खुद एक डाक्टर हैं।
 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। हालांकि जेनिफर अभी बदलाव के दौर से गुजर रहीं हैं लेकिन वह खुद को पूरी तरह एक मुकम्मल लडक़ी मानतीं हैं। उनके नाखून PP1बड़े हैं और अदाएं लड़कियों जैसी। जेनिफर कहती हैं कि वह लडक़े के रूप में ही पैदा हुए थे लेकिन धीरे-धीरे उनके बिहेवियर में बदलाव आना शुरू हो गया। शुरूआत में किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन बाद में यह बात आम हो गयी। लटके-झटके के साथ उनके शरीर की सरंचना में बदलाव होने लगा। उनके माता पिता ने उनका इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं और जेनिफर ने खुद को पूरी तरह लडक़ी बनाने की ठान ली। उनके इस फैसले का विरोध हुआ लेकिन जेनिफर ने किसी की एक नहीं सुनी। उनका पीजीआई के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में इलाज चल रहा है। 1999 में उनका रजिस्ट्रेशन हुआ था। 16 वर्ष की इस जद्दोजहद में जेनिफर ने काफी कुछ पा लिया है और काफी कुछ पाना अभी बाकी है। उनका इलाज कर रहे डॉ. आनंद प्रकाश ने बताया कि वह गेस्ट्रो सर्जन हैं और यूरोलॉजी डिपार्टमेंट की ओर से जेनिफर को दूसरी समस्याओं को दूर करने के लिए उनके पास भेजा गया है। उन्होंने जेनिफर की कुछ जाचों को करवाने के लिए कहा है। अब जेनिफर उन जाचों को करवाने के बाद उनकी रिपोर्टस डॉ. आनंद प्रकाश को दिखाएंगी उसके बाद आगे का इलाज किया जाएगा। जेनिफर कहतीं हैं कि मुकम्मल तौर पर उनक सेक्स चेंज इंग्लैंड के एक नामी हॉस्पिटल में होगा। उससे पहले की जो चीजें है वह पीजीआई में की जा रही है। जेनिफर के सामने इन दिनों आर्थिक तंगी आ गयी है और पैसों के अभाव के चलते उनका इलाज ठीक प्रकार से नहीं हो पा रहा है। हालांकि उनके इलाज में यूएन तक मदद कर रहा है।
आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं दास
पीजीआई क्षेत्र के बाहर एक विश्रामालय में रह रहीं जेनिफर विश्रामालय के रोज का &0 रुपया भी बामुश्किल दे पा रही हैं। जेनिफर कहतीं है कि ढाई लाख रुपए से ’यादा का खर्च हो चुका है। पीजीआई के डॉक्टर, नर्सेज और वहां काम करने वालों के अलावा छिट पुट समाज सेवी उनकी मदद कर रहे हैं। जेनिफर का जन्म इलाहाबाद में हुआ था। उनके पिता मशहूर डॉक्टर एस एन दास हैं और उनकी मां का नाम डॉ आशा दास। दोनों ही डॉक्टर अपने जमाने की नामवर शख्सियतें रहीं हैं। कुछ वर्ष पूर्व तक जेनिफर के पास अपना मकान पैसे और रुतबे की कमी नहीं थी लेकिन माता-पिता का सर से साया हटने के बाद जेनिफर का सबकुछ खत्म हो गया।

पीजीआई कैम्पस में अपने मरीज का इलाज करा रहे विशम्भर कहते हैं कि वह काफी दिनों से इस व्यक्ति को देख रहे थे। मास्क से मुह ढके जेनिफर से बात करने के बाद उन्हें उस पर दया आ गयी। वह मांग करते हैं कि इस तरह के लोगों का सरकार फ्री में ईलाज करवाये। करनी है शादी-भले ही इन दिनों जेनिफर मुश्किल दौर से गुजर रहीं हो लेकिन उनके सपने हसीन और भव्य हैं। वह लव मैरिज में नहीं बल्कि अरेंज मैरिज में विश्वास करती हैं। वह अपने लिए लडक़े भी ढूढ रही हैं। उनकी तमन्ना किसी अंग्रेेज से शादी कर घर बसाने की है। जेनिफर कहतीं हैं कि वह मां बन एक लडक़ी को जन्म देना चाहतीं है। उन्हें विश्वास है कि उनके सपने पूरे होंगे। उन्होंने सपनों को पूरा करने के लिए काफी काम भी किया है। एक ओर जहां उनका इलाज चल रहा है तो दूसरी ओर वह अपने लिए लडक़े ढूढ रही हैं। यही नहीं इलाज के बाद उन्होंने समाज सेवा करने की ठानी है और वह कई मिशनरी संस्थाओं के टच में है। वह इंग्लैंड में बसना चाहतीं है।
यूपी में जेनिफर जैसी हिम्मत कम लोग कर पाते हैं लेकिन मुंबई और दिल्ली में इस तरह के परिवर्तन तेजी से हो रहे हैं। लडक़े-लड़कियां अपना सेक्स चेंज करवा रहे हैं। ज्यादा संख्या लडक़ों से लडक़ी बनने की है। वह लडक़े जो दिखने/ चलने / और बोलने में लड़कियों जैसे होते हैं वह अपना सेक्स चेंज कर लडक़ी बन जाते हैं। लड़कियों से लडक़ा बनने का प्रतिशत कम है। मुंबई के अस्पताल के अनुमान के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष 50 युवक/युवतियां अपना सेक्स परिवर्तन करवा रहे हैं।
जेनिफर और दूसरों के केस में फर्क-जेनिफर सिर्फ सेक्स में बदलाव नहीं चाहती है बल्कि वह पूर्ण रूप से नारी बनना चाहतीं है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकने के लिए तैयार है। उनका पूरा फोकस मां बनने पर है। वह शादी के बाद बच्चें को जन्म देना उनकी प्राथमिकता है। ऐसे में जेनिफर का केस दूसरे केसेज से भिन्न है। वर्ष 2008 में विदेश में ली मिंग्वी नाम के एक युवक को बिना सेक्स परिवर्तन के गर्भ धारण करवाया जाने की कोशिश हुई थी लेकिन उस कोशिश का कोई नतीजा नहीं निकला। ऐसे में जेनिफर को महिला बना कर मां बानाना भी किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं।
लो नयी मुसीबत झेलने के लिए तैयार रहो
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कहीं ऐसा न हो कि आने वाले वक्त में आलू प्याज जैसी जरूरी चीजों के लिए मुह तांकना पड़े। मकान बनवाने के लिए सीमेंट न मिले और मौरंग बालू के लदे ट्रक जहां है वहीं खड़े हो जाए। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने ट्रकों के चक्का जाम करने का मन बना लिया है और उत्तर प्रदेश ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन ने उनका साथ देने का एलान कर दिया है। यूनियन के जिम्मेदार बिल्लू टंडन ने 4पीएम को बताया कि रोड सेफ्टी बिल और दिल्ली सरकार का नादिरशाही फरमान के खिलाफ हम हड़ताल पर जाने को विवश होंगे। हड़ताल कब से होगी, इस बात का एलान सभी लोग तय कर जल्द ही कर देंगे। लेकिन इतना तय है कि हम अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाएंगे। बिल्लू टंडन कहते हैं कि स्थितियां हमारे लिये दिन प्रतिदिन बद से बदतर हो रहीं हैं। हम चाहते हैं नये बिल में हमारी भी आवाज सुनी जाये।

सजा के प्रावधान से नाराज हैं ट्रक ड्राइवर

बिल्लू टंडन के मुताबिक दिल्ली में अभी 5 वर्ष तक के पुराने ट्रक चल रहे थे लेकिन सरकार ने ऐलान कर दिया कि 10 वर्ष से ’यादा पुराने ट्रक दिल्ली की सडक़ों पर नहीं दौड़ सकेंगे। यह कहां का फैसला है। महंगाई बढ़ रही है, टैक्स के कारण पहले ही व्यापार चौपट हो चुका है ऐसे में यह फैसला ट्रक मालिकों के गले नहीं उतर सकता। वह कहते हैं कि यही नहीं नये रोड सेफ्टी बिल में ड्राइवर की सजा के प्रावधान के बाद इस वर्ग में जबर्दस्त बैचेनी है। ड्राइवर इस पेशे को छोडऩे का मन बना रहे हैं। ऐसे में सडक़ पर ट्रक दौड़ाना मुश्किल होगा। सरकार को इस दिशा में भी सोचना होगा। हम लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं। हम नहीं चाहते कि स्थिति बिगड़े। लेकिन अगर हमारे सामने जीने और मरने की बात आयेगी तो फिर हम हड़ताल को मजबूर होंगे।

पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 11 मरे
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में एक पटाखे के कारखाने में विस्फोट हो जाने से 11 लोगों की मौत हो गई और सात घायल हो गए। विस्फोट पश्चिमी मिदनापुर जिले के पिंग्ला में बुधवार रात हुई। पुलिस अधीक्षक भारती घोष ने बताया, पटाखे के कारखाने में विस्फोट होने से 11 लोगों की मौत हो गई और सात लोग घायल हो गए। घायलों की हालत नाजुक है, मृतकों की संख्या बढऩे की आशंका है। कारखाने का मालिक राजन मैती घटना के बाद से लापता है। स्थानीय निवासी हालांकि, यह दावा कर रहे हैं कि हताहतों की संख्या ’यादा हो सकती है, क्योंकि कारखाने का इस्तेमाल बम बनाने के लिए होता था।

 

Pin It