हर तरफ जाम, कैसा हो गया है लखनऊ…

सत्ता चलाने वाले लोगों को कभी-कभी वास्तविक हालात भी देखने चाहिये। मुख्यमंत्री जब निकलते हैं तो हर तरफ सडक़ जाम कर दी जाती है। जाहिर है सीएम को अंदाजा भी नहीं होता कि शहर के आम आदमी की हालत क्या होती है।

sanjay sharma editor5देखते-देखते कुछ सालों में लखनऊ पूरा बदल गया। अपनी शान-ओ-शौकत के लिये मशहूर लखनऊ अब अपनी बदहाली के लिये जाना जाने लगा है। शहर में किधर भी चले जाइये हर तरफ बस जाम ही जाम नजर आने लगा है। लगता ही नहीं है कि यह वो शहर है जहां शामें पूरे देश में अलग ही अंदाज रखती थीं। और उनका अपना एक अलग ही अंदाज था। मगर अब लखनऊ भीषण जाम और बदहाली में बदलता जा रहा है। अफसरों को फुरसत नहीं है कि वे शहर की इस बदहाल हालत को सुधारने की कोई ठोस पहल करें और व्यवस्थाओं में सुधार करें। शहर की हालत दिन-पर दिन खराब होती जा रही है।
दरअसल लखनऊ की व्यवस्थायें सुधारने से और ज्यादा जरूरी काम अफसरों को नजर आने लगे हैं। उन्हें लगता है कि शहर की खराब व्यवस्थाओं से बेहतर है कि कुछ ऐसे काम किये जायें जो मुख्यमंत्री की निगाहों में उनके नम्बर बढ़ा दें। शहर के आम आदमी की परेशानियां दूर करने की जगह अफसर मौज मस्ती के माहौल में जुटे हुये हैं। शहर में भले ही चारों तरफ अव्यवस्थायें फैल रही हों मगर अफसरों को यह सब देखने की फुरसत नहीं है।
इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि यह हालत राजधानी की है जहां पर सभी बड़े अफसर और नेता रहते हैं। जाहिर है जब यहां की हालत ऐसी है तो प्रदेश के बाकी जगहों की हालत और खराब होगी। मगर यह सब देखने की और इन व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद करना ही बेमानी है। दरअसल अफसरों की मानसिक स्थिति ही खराब हो गई है।
सत्ता चलाने वाले लोगों को कभी-कभी वास्तविक हालात भी देखने चाहिये। मुख्यमंत्री जब निकलते हैं तो हर तरफ सडक़ जाम कर दी जाती है। जाहिर है सीएम को अंदाजा भी नहीं होता कि शहर के आम आदमी की हालत क्या होती है। अच्छा हो कि मुख्यमंत्री किसी दिन बिना किसी को बताये अचानक लखनऊ शहर की सडक़ों को देखने निकल जायें तब उन्हें अंदाजा होगा कि इस शहर का क्या हाल है। मगर सत्ता के माहिर लोग ऐसा कभी होने नहीं देंगे।
इस शहर का आम आदमी परेशान है इन्हीं व्यवस्थाओं के साथ अपनी जिंदगी जीने के लिये। उसे यहीं तिल-तिलकर मरना है क्योंकि उसकी जिंदगी को जिन लोगों को ठीक करना है वो लोग जिंदगी के किसी दूसरे कामों में व्यस्त हैं। जाहिर है आम आदमी की चिंता करने का ध्यान किसी को नहीं।

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