हम पासपोर्ट का कलर नहीं खून का रिश्ता सोचते हैं: मोदी

पीएम ने बंगलुरू में आयोजित 14वें एनआरआई सम्मेलन को किया संबोधित

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बंगलुरू में आयोजित 14वें प्रवासी भारतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हम पासपोर्ट का कलर नहीं बल्कि खून का रिश्ता क्या है, इस बारे में सोचते हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय जहां भी रहे, उस धरती को कर्मभूमि बनाया। वो जहां रहे, वहां का विकास किया। इसी वजह से विदेशों में भारतीयों को केवल संख्या की वजह से नहीं जाना जाता है बल्कि उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।
पीएम ने कहा कि मेरी सरकार और व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय की सहभागिता प्राथमिकता रही है। आज आप उस कर्मभूमि की सफलताओं के साथ उस भूमि में पधारे हैं, जहां से आपके पूर्वजों को प्रेरणा मिलती रहती है। हजारों लाखों भाई बहन, यूके, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, जापान, केन्या, मलेशिया और अन्य देशों रह कर भी भारत की तरक्की में सहयोग दे रहे हैं। प्रवासी भारतीयों में देश के विकास के लिए अदम्य इच्छा शक्ति है। वो देश की प्रगति में सहयात्री हैं, हमारे विकास यात्रा में आप हमारे वैल्यूएबल पार्टनर हैं। कभी चर्चा होती थी ब्रेन ड्रेन की, तब मैं लोगों को कहता था कि क्या बुद्धू लोग ही यहां बचे हैं। लेकिन आज मैं बड़े विश्वास के साथ कहना चाहता हूं कि वर्तमान सरकार ब्रेन ड्रेन को ब्रेन गेन में बदलना चाहती है। मैंने विदेशों में रहने वाले भारतीयों की समस्याओं को तरजीह देने की सलाह दे रखी है। विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। हम पासपोर्ट का कलर नहीं देखते, खून का रिश्ता सोचते हैं। इसी वजह से अप्रवासी भारतीय और भारतीय मूल के लोगों ने अपने चुने हुए क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान दिया है। वहीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोशल मीडिया की मदद से विदेश में रहने वाले व्यथित भारतीयों की अपील पर शीघ्र मदद करने का काम किया है। वो श्रमिक जो विदेशों में आर्थिक अवसरों की तलाश के लिए जा रहे हैं, उन्हें असुविधा न हो इसके लिए अधिकतम सरलीकरण सुनिश्चित करने का हमने प्रयास किया है। भारतीयों को बेहतर मौका दिलाने के लिए सरकार एनआरआई स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम लांच करेगी।

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