हत्या नहीं करते तो यहां खड़े नहीं होते साहब…

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यदि हत्या नहीं करते तो यहां पर खड़े नहीं होते साहब…। हत्या करनी पड़ी उसकी। यदि नहीं करता तो मेरी जहां शादी नहीं होती वहीं मेरी बहन की जिन्दगी भी खराब हो जाती। उसे कई बार मना भी किया था लेकिन वह पीछा नहीं छोड़ती थी। एसएसपी आवास पर आयोजित पे्रस कांफे्रंस में लाये गये आरोपी ने जब घटना को स्वीकार करते हुये कहानी पत्रकारों के सामने बताई तो एक पल के लिये सभी अवाक रह गये।
बता दें कि अलीगंज थाना क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय के पास 25 जून को बोरे में एक युवती की लाश मिली थी। इस मामले में पुलिस ने पर्दाफाश करते हुये युवती के पे्रमी संतोष को गिरफ्तार किया। एसएसपी राजेंश पांडेय के मुताबिक, युवती के शव की शिनाख्त तीन दिन बाद हुई थी। पुलिस के मुताबिक युवती का संतोष के साथ पे्रम-प्रसंग था। संतोष को आपत्तिजनक स्थिति में युवती के परिजनों ने देख लिया था। इसी मामले को लेकर जहां युवती के परिजन संतोष से नाराज रहते थे वहीं संतोष की शादी तय होने के बाद वह युवती से पीछा छुड़ाने के लिये सोचने लगा। संतोष ने बताया कि शादी तय होने की जानकारी मिलने पर युवती शादी करने के लिये दबाव देने लगी। संतोष का 18 जून को तिलक हुआ। जहां युवती संतोष के घर पहुंचकर शादी नहीं करने पर हंगामा भी की थी। युवती की हरकतों से परेशान संतोष ने उसकी हत्या करने की योजना बनाई। उसने युवती को घुमाने के बहाने 23 जून को संगम चौराहे पर युवती को बुलाया। उसे लेकर समता मूलक चौराहे के पास गोमती किनारे पुल के नीचे ले गया। जहां दो बोरी बिछाई और दोनों लेट गए। युवती को जरा भी आभास नहीं होने दिया कि उसकी हत्या की नियत से लेकर आया है। युवती के सो जाने पर वह उसके मुंह में कपड़ा ठुंसकर उसका गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसके चेहरे पर ईंट से ताबड़तोड़ कई वार किये। युवती की मौत होने पर शव को बोरे में डालकर अलीगंज केंद्रीय विद्यालय के पास रिक्शे में लादकर फेंक आया। संतोष ने बताया कि इसके साथ युवती उसकी बहन को गुटखा खिलाने की लत डलवा रही थी।

एक जमाने के बाद हुई कुछ इस तरह की पे्रस कांफ्रेंस
एसएसपी आवास पर एसएसपी राजेश कुमार पांडेय के नेतृत्व में एक जमाने के बाद इस तरह का पे्रस कांफे्रस हुआ जहां पत्रकारों को आरोपी से बात करने दिया गया। जबकि इससे पहले पे्रस कांफे्रस में आरोपी की फोटो क्लिक होने के बाद उसे हटा दिया जाता था। उससे बात तक करने का समय नहीं दिया जाता था। लेकिन इस बार लगभग एक घंटे तक एसएसपी के कमरे में पत्रकारों ने आरोपी से हर पहलुओं पर बात किया और संतुष्ट हुये। इसे लेकर आवास पर चर्चा है रही कि यदि पर्दाफाश सही होता है तो किसी अधिकारी को कोई डर नहीं होता है।

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