हड़ताल से आम आदमी बेहाल

बैंक बंद और ट्रैफिक ठप, लोग सडक़ों पर, कई जगह झड़पें

M14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। श्रमिक संगठनों की हड़ताल से आज लखनऊ में हजारों लोग बेहाल हो गए। लोगों को अंदाजा नहीं था कि हड़ताल का इतना व्यापक असर होगा कि न टैम्पों चलेंगे और न ही बैंक खुलेंगे। हर जगह लोग आने जाने के लिए परेशान रहे। अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस हड़ताल से लगभग हजारों करोड़ का नुकसान होने की आशंका है। इस हड़ताल से बैंको के अलावा निजी उपक्रम के लोग भी हिस्सा ले रहे हैं। कुछ स्थानों पर बसों को रोकने का प्रयास किया गया। इसके बाद झड़पे भी हुई। लखनऊ के कई हिस्सों में प्रदर्शन जारी है और लोग एटीएम के बाहर लाइन लगाए हुए हैं। 

लखनऊ। रोड ट्रांसपोर्ट एंड सेफ्टी बिल के खिलाफ श्रमिक संगठनों की राष्ट्रव्यापी बंद से आम जनजीवन प्रभावित रहा। स्कूली बच्चों, ड्यूटी पेशा कर्मचारियों, व्यवसायियों और मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। सार्वजनिक उपक्रम के बैंकों, बीमा कंपनियों, विद्युत विभाग और बीएसएनएल की सेवाएं ठप रहीं। इसमें परिवहन और रेलवे के कर्मचारियों ने भी सहयोग किया, जिसकी वजह से सडक़ों पर बसें, आटो रिक्शा और आवागमन के साधन भी कम नजर आये। वहीं एक दिन की हड़ताल से पांच हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
श्रमिक संगठनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में इंटक, एटक, एचएमएस, सीआईटीयू और एआईयूटीयूसी समेत सभी केन्द्रीय श्रम संगठन हिस्सा ले रहे हैं। इसमें पुरानी पेंशन नीति लागू करने और नई पेंशन नीति समाप्त करने, बैंकों में आउट सोर्सिंग पर रोक लगाने, श्रमिक विरोधी कानूनों को वापस लेने, ठेका प्रथा समाप्त करने समेत अनेकों मुद्दों को शामिल किया गया है। इस हड़ताल में परिवहन और रेलवे के कर्मचारी भी हिस्सा ले रहे हैं। वे रोड ट्रांसपोर्ट एंड सेफ्टी बिल पर विरोध जताते हुए राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल हुए हैं। इसका सीधा असर लखनऊ में दिखा। श्रमिक संगठनों ने बसों के टायर पंचर करके आवागमन बाधित करने का प्रयास किया। परिवहन निगम की अधिकांश बसें भी नहीं चल रही हैं। इस कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। हालांकि मौके पर पहुंचे आलाधिकारियों ने चारबाग बस अड्डे पर खड़ी बसों को जल्द से जल्द रवाना करवाया लेकिन अन्य क्षेत्रों में आटो रिक्शा और बसों का संचालन ठप होने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। इस मामले को गंभीरता से लेकर हड़ताल पर जाने वाले रोडवेज कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आदेश दिया गया है। इसके बावजूद अधिकांश बसें नहीं चल रही हैं।
श्रमिक संगठनों में गुस्सा

अपनी मांगों पर केंद्र सरकार की सहमति न मिलने से श्रमिक संगठनों में भयंकर गुस्सा है। केंद्र सरकार के पास लंबित पड़े बिल पर निर्णय नहीं हो रहा है। इस कारण बैंकों के कर्मचारी, विद्युत विभाग के इंजीनियर, रोडवेज की पांच यूनियनों के सदस्य हड़ताल में हिस्सेदारी निभा रहे हैं। यूपी रोडवेज वर्कर्स यूनियन के साथ ही यूपी रोडवेज इम्प्लाइज यूनियन, सेंट्रल रीजनल वर्कशाप कर्मचारी संघ, श्रमिक समाज कल्याण संघ, संविदा कर्मचारी यूनियन और परिवहन निगम के अन्य श्रमिक संगठनों के सदस्य भी हड़ताल में भागीदारी कर रहे हैं।
कर्मचारी महासंघ का जीपीओ से लालबाग तक मार्च

श्रमिक संगठनों ने राष्ट्रव्यापी बंद के मद्देनजर हजरतगंज, चारबाग, लालबाग, जवाहर भवन, जीपीओ और बीएसएनएल मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इस हड़ताल में बीएसएनएल और डाक तार के कर्मचारी भी शामिल हैं। इन सभी कर्मचारियों ने जीपीओ से लेकर लालबाग तक मार्च निकाला, जिसमें सैकड़ों कर्मचारी संगठनों के सदस्यों ने भागीदारी निभाई। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
1990 से यह 16 वीं हड़ताल

पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के कार्यकाल के दौरान चार बार, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के कार्यकाल में पांच और मनमोहन सिंह सरकार में छह बार आम हड़ताल हो चुकी हैं।
श्रमिक संगठनों की प्रमुख मांगें

नई पेंशन बंद और पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग
फैक्ट्री मालिकों को कानून में छूट देने का विरोध
कर्मचारी व मजदूर यूनियमों को सामाजिक सुरक्षा की मांग
यूनियन गठन के नियमों में ढील देने की मांग
देश में तेजी से बढ़ रही महंगाई पर रोक लगाने की मांग
भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लागू न करने की मांग
रेलवे, बीमा, डिफेंस में एफडीआई का विरोध
सार्वजनिक वितरण प्रणाली सुचारू कराने की मांग
ठेका प्रथा समाप्ति की मांग
मजदूरों को लाग की मांगा
बैंकिंग क्षेत्र में जन विरोधी सुधार रोकने की मांग
उद्योगपतियों से बैंकों के एनपीए वसूली की मांग
सार्वजनिक क्षेत्र में अंधाधुंध विनिवेश रोकने की मांग
परिवहन निगमों का पूर्व की तरह विशेष दर्जा बरकरार रखने की मांग
बिल में बसों का वर्गीकरण पूर्व की भांति स्टेज कैरेज और कांट्रैक्ट कैरेज बरकरार रखने की मांग।
यह हैं अपनी प्यारी शेरनी वसुंधरा के बच्चेड्ढ

लखनऊ। 40 साल बाद अपने चिडिय़ाघर में शेर के बच्चों की किलकारी गूंजी हैं। शेरनी वसुंधरा ने 4 बच्चों को जन्म दिया है। इन बच्चों के जन्म के बाद पूरे चिडिय़ाघर में खुशी का माहौल है।
मां तथा बच्चों पर नजर रखने के लिए तीन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। जिन पर सभी अधिकारियों और डॉक्टरों द्वारा सघन निगरानी रखी जा रही है, जिससे किसी भी प्रकार का संक्रमण न फैल सके। इन बच्चों को एक महीने तक दर्शक नहीं देख सकेंगे, क्योंकि उन्हें आइसोलेशन में रखा जायेगा। सीसीटीवी के कैमरे से आज इन बच्चों की पहली तस्वीर सामने आई है। चिडिय़ाघर प्रशाासन ने पिछले एक महीने से वसुंधरा के भोजन की मात्रा भी बढ़ा दी है। वसुंधरा अपने सभी बच्चों को बहुत प्यार से पुचकार रही है। तीन बच्चे स्वस्थ्य हैं जबकि एक बच्चा थोड़ा कमजोर है।

लखनऊ में मिड डे मील खाने से 25 बच्चे बीमार, लोहिया में भर्ती

बच्चों के बीमार होने
से हडक़ंप, 8 एंबुलेंस भेजी गईं स्कूल, लोहिया अस्पताल में एलर्ट जारी

लखनऊ। लखनऊ के चिनहट क्षेत्र के जुग्गौर प्राथमिक विद्यालय में मिड डे मील खाने से 40 बच्चों के बीमार होने की सूचना मिली है। इन बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जाता है कि इन बच्चों ने जैसे ही खाना खाया वैसे ही उनकी तबीयत बिगडऩे लगी। बच्चों को उल्टी दस्त होते ही हंगामा मच गया।
बताया जाता है कि भोजन में कुछ मिला हुआ था, जिससे कारण यह बच्चे लगातार एक के बाद एक बीमारी का शिकार होते चले गए। अभी कुछ समय पहले ही लखनऊ के कैंट इलाके में भी दूध में मिलावट होने से लगभग 60 बच्चें बीमार पड़ गए थे, जिन्हें सिविल में भर्ती कराया गया था। मगर आज फिर मिड डे मील खाने से बच्चों को बीमार होने से प्रशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्रकार उत्पीड़ऩ रोकने को टोल फ्री नंबर: सहगल

राज्य मान्यता संवाददाता समिति के पदाधिकारियों ने की नवनीत सहगल से मुलाकात और कहा प्रदेश के पत्रकारों का उत्पीडऩ हो बंद

प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश भर के पत्रकारों के उत्पीडऩ रोकने के लिए टोल फ्री नंबर जारी कर रही है सरकार

लखनऊ। प्रदेश भर के पत्रकारों के लिए एक अच्छी खबर है। सरकार चिंतित है कि प्रदेश के कई स्थानों से पत्रकारों के उत्पीडऩ की खबरे आ रही हैं। राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के पदाधिकारियों ने आज प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल से मुलाकात करके कहा कि पत्रकारों का उत्पीडऩ हर हालत में बंद होना चाहिए। इस पर प्रमुख सचिव श्री सहगल ने उन्हें बताया कि अब पत्रकारों के उत्पीडऩ रोकने केलिए सभी पत्रकारों को एक टोल फ्री नंबर दिया जा रहा है जिस पर पत्रकार अपनी शिकायत कह सकते हैं।
मान्यता समिति के पदाधिकारियों से बात करते हुए श्री सहगल ने कहा कि यह टोल फ्री नंबर सूचना निदेशालय में स्थापित किया जाएगा। कोई भी पत्रकार इस पर अपने उत्पीडऩ की शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत दर्ज होते ही संबंधित जिले के अधिकारियों को तत्काल इस पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे और एक वरिष्ठï अधिकारी लगातार इस बात की समीक्षा करेगा कि पत्रकारों का उत्पीडऩ न हो। उन्होंने संवाददाता समिति के पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि किसी भी कीमत पर पत्रकारों का उत्पीडऩ नहीं होने दिया जाएगा। समिति के लोगों ने उन्हें ज्ञापन देकर अनुरोध किया कि कल के प्रदर्शन में एक दर्जन प्रिंट व टीवी छायाकारों के वाहनों में तोड़-फोड़ की गई है। इस संबंध में दोषी लोगों पर कार्रवाई करते हुए पत्रकारों के नुकसान की क्षतिपूर्ति कराई जाय। पत्रकारों ने उन्हें यह भी जानकारी दी कि पत्रकारों के मकानों के किराए में कमी अभी तक नहीं हो सकी है, जिससे पत्रकार परेशान है। इस पर प्रमुख सचिव ने तत्काल प्रमुख सचिव वित्त से बात करके इस मामले का शीघ्र समाधान किए जाने की बात कही। पत्रकारों ने यह भी अनुरोध किया कि पत्रकारों की बीमा राशि का बजट बढ़ाया जाए। प्रमुख सचिव ने आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में उचित कार्रवाई करेंगे। उन्होंने पत्रकारों को भरोसा दिलाया कि सरकार पत्रकार हित में लगातार काम करेगी। प्रतिनिधि मंडल में संवाददाात समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्र, उपाध्यक्ष संजय शर्मा, नरेन्द्र श्रीवास्तव सचिव नीरज श्रीवास्तव कोषाध्यक्ष अशोक मिश्रा, संयुक्त सचिव अजय श्रीवास्तव एवं अमितेश श्रीवास्तव, कार्यकारिणी सदस्य अनूप श्रीवास्तव, अभिषेक रंजन, मुदित माथुर, हरीश कांडपाल, आशीष श्रीवास्तव, काजिम रजा, काशी यादव तथा वरिष्ठï पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी, शरद प्रधान, मनोज, शिव शंकर गोस्वामी, किशोर निगम, विजय शंकर पंकज, हिसाम सिद्दीकी, एसएम पारी आदि मौजूद थे।

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