हजरतगंज में भद्दी गाली के विरोध में बसपा नेताओं का भारी विरोध

  • हजारों की संख्या में जुटे बसपा कार्यकर्ताओं ने लांघी हदें, दयाशंकर और उनके परिवार को दी भद्दी-भद्दी गालियां और की जमकर नारेबाजी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
001लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती के खिलाफ बीजेपी नेता दयाशंकर की आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में बसपा के हजारों कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज में डेरा डाल दिया। उग्र कार्यकर्ताओं की भीड़ अंबेडकर प्रतिमा के चारों तरफ इकट्ठा होकर हंगामा करती रही। पुरुष और महिला कार्यकर्ता हाथों में भद्दे कमेंट लिखी तख्तियां लेकर दयाशंकर की मां और बहन के खिलाफ गंदी-गंदी गालियां दे रहे थे। इतना ही नहीं पुलिस की तरफ से भीड़ रोकने के लिए लगाई गई बैरीकेडिंग तोडक़र कार्यकर्ता बीच चौराहे पर पहुंच गए। वहां से गुजरने वाली गाडिय़ों को जबरन रोकने और राहगीरों को परेशान करना शुरू कर दिया। इलाके की सभी सडक़ों पर बुरी तरह से जाम लग गया। इस बीच हजरतगंज में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर तैनात पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की टीम प्रदर्शनकारियों के बीच बेबस और लाचार नजर आई।
बीएसपी नेताओं के प्रदर्शन की वजह से राजभवन जाने वाली सडक़ को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। परिवर्तन चौक से गंज की तरफ से आने वाली सडक़ ब्लॉक है। हजरतगंज में प्रदर्शन कर रहे बसपा कार्यकर्र्तां ने आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपी दयाशंकर के साथ ही मोदी और अमित शाह के खिलाफ भी अभद्र गुस्सा निकाला। बसपा कार्यकर्ताओं ने दयाशंकर का पुलता फूंका और जमकर नारेबाजी की। इसके बाद पुतले की राख को चारों तरफ फैलाने लगे। हजरतगंज में बसपा कार्यकर्ताओं का तांडव बीएसपी के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी की उपस्थिति में चल रहा है। दयाशंकर का पुतला फूकते समय कार्यकर्ता काफी उग्र नजर आये। …इस दौरान एक बीएसपी कार्यकर्ता घायल भी हो गया। उसको अस्पताल ले जाया गया। बसपा के प्रदर्शन को लेकर सुबह से ही एलर्ट पुलिस भी बेबस नजर आई। हालांकि उच्चाधिकारियों की तरफ से दबाव पडऩे पर कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने जाम खुलवाया लेकिन जनता को घंटो जाम से जूझना पड़ा।
बसपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज चौराहे से गुजर रही एक कार को रोक लिया। उस कार पर लगे बीजेपी के झंडे को नोचने और गाड़ी का शीशा तोडऩे की कोशिश करने लगे। ये सब कुछ पुलिस की मौजूदगी में हो रहा था। जब कार सवार ने पुलिस से सहायता की गुहार लगाई और आस-पास के अन्य कार्यकर्ताओं की भीड़ कार की तरफ बढऩे लगी। तब पुलिस वालों ने सक्रियता दिखाई और कार्यकर्ताओं के चंगुल से कार को छुड़ाया। इस प्रदर्शन में नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, रामवीर उपाध्याय, अनंत मिश्रा, ब्रजेश समेत अन्य कई नेता उपस्थित रहे।
कोतवाली में मामला दर्ज
बसपा के सचिव मेवालाल गौतम की तरफ से हजरतगंज कोतवाली में दयाशंकर के खिलाफ मायावती पर अभद्र टिप्पणी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दयाशंकर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए, 504, 509 और एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस दयाशंकर को तलाशने में जुट गई है लेकिन उनकी सही लोकेशन ट्रेस नहीं कर पा रही है।
मायावती ने राज्यसभा में बयान दिया कि यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए कुछ ही समय बचा है। लेकिन बीजेपी के नेताओं को दलितों की तरफ से मेरा सम्मान किया जाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है। इसलिए उनकी पार्टी के उपाध्यक्ष ऐसा लफ्ज बोल रहे हैं। मेरे खिलाफ जो अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है। मैं नहीं जानती। मुझे नहीं बताया गया लेकिन कुछ खराब ही होगा, जिसके कारण मेरे सहयोगी नेता मुझे कुछ नहीं बता रहे हैं। लेकिन मेरा यही कहना है कि मैं दलित वर्ग की बेटी हूं, यूपी में चार बार सीएम रही, लोकसभा और राज्यसभा में रही हूं। मेरा अब तक का रिकॉर्ड ठीक रहा है। आजतक मैंने अपने भाषण में छोटे-बड़े नेता को अपशब्द नहीं बोला है। विचारधारा को लेकर प्रहार जरूर किया लेकिन कैरेक्टर पर किसी को कुछ नहीं बोला। पूरा देश इस बात से अवगत है।
दयाशंकर के घर की सुरक्षा बढ़ी
पुलिस ने आफिसर्स कॉलोनी स्थित दयाशंकर के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी है। वहां दो पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है। साथ ही बीजेपी कार्यालय पर भी एक्स्ट्रा पुलिस लगाई गई है। दयाशंकर के आवास पर दो नौकरों के अलावा और कोई भी नहीं है। बसपा नेताओं की तरफ से लगातार दयाशंकर की गिरफ्तारी को लेकर बनाये जा रहे दबाव की वजह से पुलिस महकमे के अधिकारी भी परेशान हैं।

क्या कल होगी योगी को सीएम का चेहरा बनाने की घोषणा!

  • गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर जोरदार तैयारी
  • माया पर की गई टिप्पणी से दलित समाज के लोग कल पीएम को काला झंडा की कर रहे हैं तैयारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गोरखपुर दौरा काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक गालियारे में इस बात की चर्चा है कि गोरखपुर में दो बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद मोदी मंच से यूपी के सीएम चेहरे की घोषणा भी कर सकते हैं। इसमें पूर्वांचल में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले और आरएसएस की तरफ से प्रस्तावित नामों में सबसे खास माने जाने वाले योगी आदित्यनाथ को पार्टी की तरफ से सीएम उम्मीदवार बनाया जा सकता है। इससे पहले संतकबीर नगर में आयोजित रैली के दौरान अमित शाह की तरफ से भी योगी को लेकर काफी सकारात्मक बयान आया था। इसलिए माना जा रहा है कि गोरखपुर में योगी को सीएम का चेहरा बनाए जाने पर अंतिम मुहर लग सकती है।
भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का भी पूरा अंदाजा है कि अब यूपी में मोदी नाम का जादू भी वैसा नहीं रहा, जैसा लोकसभा चुनाव के समय था। विकास को लेकर मोदी के नारों की यूपी में असलियत कुछ जुदा ही नजर आ रही है। भाजपा के सांसदों ने भी अपने क्षेत्रों में प्रभावी काम नहीं किया है। इन सब जिद्दोजेहद के बाद भाजपा और संघ के वरिष्ठ लोगों की बैठक के बाद तय किया गया कि यूपी का चुनाव लोकसभा चुनाव की तरह अगर सिर्फ विकास के एडेंजा पर लड़ा गया तो भाजपा को कई तीखे सवालों का जवाब देना पड़ेगा। पार्टी इन सवालों का बहुत अच्छा उत्तर दे पाने की स्थिति में फिलहाल नजर भी नहीं आ रही। इसलिए यूपी में हिन्दुत्व के मुद्दे को थोड़ी और धार देने की कोशिश की जा रही है। शुरुआती दौर में योगी आदित्यनाथ और वरुण गांधी का नाम ही सबके सामने आया। वरुण गांधी के समर्थक काफी समय से उन्हें सीएम का चेहरा बनाये जाने की वकालत कर रहे हैं। मगर संघ परिवार अभी भी उनके सरनेम गांधी को पचा नहीं पा रहा। दूसरी तरफ वरुण गांधी का नाम सामने आने के बाद योगी आदित्यनाथ के तेवर कैसे होंगे, इसकी कल्पना ही भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को डरा रही है। पार्टी हाईकमान जानता है कि पूर्वांचल के कम से कम 14-15 जिलों में योगी आदित्यनाथ का बहुत प्रभाव है। वह 25-30 विधानसभा सीटों के वोट बैंक को प्रभावित कर सकते हैं। पहले भी योगी भाजपा से बगावत कर अपने कई लोगों को विधायक बनवा चुके हैं। पूर्वांचल में योगी की हिंदू वाहिनी का बहुत प्रभाव भी है। इन सब विषयों पर चर्चा करके वरूण गांधी के नाम को किनारा करके योगी आदित्यनाथ के नाम पर ही चुनाव लडऩे का फैसला किया गया। इसी बैठक में यह विचार भी सामने आया कि योगी को चेहरा बनाने से हिंदुत्व के नाम पर अलग से कोई मुद्दा उठाने की जरूरत महसूस नहीं होगी। योगी का चेहरा ही हिंदुत्व का परिचायक हो जाएगा। इसके अलावा योगी के भाषणों से आरएसएस और भाजपा के मनमुताबिक माहौल भी तैयार हो जाएगा।
योगी को यूपी का सीएम उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें उस वक्त लगाई जाने लगी थीं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में योगी आदित्यनाथ के केन्द्रीय मंत्री बनने का फैसला हो चुका था लेकिन जब मंत्रियों को शपथ दिलाई गई, तो उनमें योगी शामिल नहीं थे। उसी वक्त से लगभग यह तय हो गया था कि योगी ही भाजपा का चेहरा होंगे उनका नाम मंत्री की सूची से अलग किया गया। संघ का भी मानना है कि योगी का नाम सामने आने से हिंदु समुदाय को एकजुट होने में परेशानी नहीं होगी। योगी को आगे बढ़ाने में टीम मोदी का एक और बड़ा दांव पूरा हो जाएगा। योगी क्षत्रिय है। उनके आगे बढऩे से यूपी में भाजपा का एक बड़ा क्षत्रिय नेता तैयार होगा जो राजनाथ सिंह का विकल्प हो सकता है। यह आम धारणा है कि पीएम मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। योगी और राजनाथ सिंह के संबंध भी कुछ ज्यादा बेहतर नहीं हैं। जाहिर है कि ऐसा करने से एक तीर से दो शिकार हो जाएंगे।

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