स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से नर्सिंग होम मालामाल

स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्रवाई न होने से प्राइवेट नर्सिंग होम कर रहे मनमानी
निजी नर्सिंग होम में इलाज के नाम पर हो रही है जमकर वसूली

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डाक्टरों का हमारे जीवन में कितनी अहमियत है इससे सभी वाकिफ है। आखिर ऐसे ही हम उन्हें धरती का भगवान नहीं कहते। लेकिन आज कुछ डाक्टरों की लापरवाही की वजह से यह पेशा बदनाम हो रहा है। हाल ही में शहर के दो अलग-अलग हिस्सों में हुई घटना ने इस पेशे पर सवाल खड़ा कर दिया है। एक जगह निजी पैथालॉजी के गलत रिपोर्ट देने और दूसरी जगह नर्सिंग होम में एक्सपायरी इंजेक्शन लगाने से मरीजों की जान मुश्किल में पड़ी। ध्यान देने की बात यह है कि हर बार की तरह इस बार भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इन पर कार्रवाई से बच रहा है, जबकि इसके उलट इन निजी संस्थानों के मालिक मरीजों पर अपना रौब झाड़ रहे हैं।
वर्तमान में प्राइवेट नर्सिंग होम में मरीजों से हो रही लूट किसी से छिपी नहीं है। छोटी-मोटी बीमारी में मरीजों को हजारों का चूना लग जाता है। कहीं दो-चार टेस्ट डॉक्टर ने लिख दिया तो भगवान ही मालिक है। प्राइवेट सेंटरों पर टेस्ट का शुल्क, सरकारी अस्पतालों में कई गुना ज्यादा है। उदाहरण के लिए डिजिटल एक्सरे सरकारी अस्पतालों में निशुल्क है तो वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इसके लिए 500 रुपए वसूले जाते हैं। ऐसे ही पैथालॉजी टेस्ट के शुल्क में भी अंतर है। इसके अलावा सुविधाओं के नाम पर वसूली से सभी वाकिफ है। नर्सिंग होम की हालत यह है कि एक तरफ मरीजों से इलाज के नाम पर भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है तो दूसरी ओर लापरवाही की भी घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके है जिसमें लापरवाही के चलते लोगों को अपनी जान तक गवानी पड़ी है।

पहला मामला
बीते शनिवार को अलीगंज स्थित नीरा नर्सिंग होम में भर्ती मरीज को एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाने को लेकर परिजनों ने बीते रविवार को हंगामा किया। उनका आरोप था कि पिछले पांच दिनों से मरीज को एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाया जा रहा था। जिसके चलते मरीज की हालत ठीक होने के बजाय और बिगड़ती ही जा रही थी। मूलरूप से कानपुर देहात के रहने वाले बाबूराम (8०) अपने बेटे शिवकुमार के साथ दुबग्गा में रहते हैं। बाबूराम को सांस लेने में समस्या होने पर नीरा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डाक्टर ने उन्हें पहले अस्थमा अटैक होने की बात बताई और वेंटीलेटर यूनिट मे भर्ती कर इलाज शुरू किया था, लेकिन हालत मे कोई सुधार नही हुआ।

दूसरा मामला
इन्दिरा नगर स्थित लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेन्टर पर कुछ लोगों ने गलत जांच रिपोर्ट देने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। बताया जा रहा है कि मोहम्मद अल्ताफ (42)की गलत रिपोर्ट पैथालॉजी द्वारा दी गयी, जिससे उसका परिवार टूटते-टूटते बचा। परिवार में कलह इतना बढ़ गया था कि अल्ताफ ने आत्महत्या तक करने का मन बना लिया था। उसके परिजन सहजाद ने बताया कि मोहम्मद अलताफ सऊदी अरब जाने वाला था। उसी के चलते 26 नवम्बर को पैथालॉजी में कुछ जांचे करायी थी। रिपोर्ट आने के बाद पूरे परिवार में कोहराम मच गया। उसके बाद केजीएमसी में जांच कराई गयी तो वहां पर रिपोर्ट निगेटिव आयी। उसके बाद इसकी शिकायत पुलिस की गयी। 

जिम्मेदारी से भाग रहे अस्पताल
नीरा नर्सिंग होम के प्रवक्ता का कहना है कि मरीज को लगाया गया इंजेक् शन अस्पताल की फार्मेसी से नही ली गयी थी। वार्ड बॉय अपने स्तर से लाया होगा। चिकित्सक ने भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि दवा अथवा इंजेक् शन की एक्सपायरी डेट की जांच करना आईसीयू स्टाफ की जिम्मेदारी है। वैसे भी परिजन अस्पताल से इंजेक्शन नही खरीदते थे। वह कहीं और से दवा खरीद कर लाते थे। लाइफ केयर डाइग्नोस्टिक सेन्टर के संचालक मोसीन ने बताया की उनके यहां से वीडीआरएल तथा टीपीएचए की जांच करायी गयी थी। उनका कहना है कि जो रिपोर्ट हमने दी वो सही है। मोहम्मद अल्ताफ के परिजन एचआईवी जांच को लेकर हंगामा कर रहे थे। वो जांच हमने की ही नही। वो हमारे ऊपर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, जिससे हमारा नाम खराब हुआ है उसके लिए हम लोगों ने भी तहरीर पुलिस को दे दी है।

इन घटनाओं की जांच के लिए अधिकारियों को लगाया गया है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जायेगी।
-ए.के. मल्होत्रा असिसटेन्ट कमिश्नरड्रग कंट्रोल

नीरा नर्सिंग होम और लाइफ केयर डाइग्नोस्टिक सेन्टर के खिलाफ जांच बिठा दी गयी है। जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जायेगी।
-डॉ. एसएनएस यादव मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ

Pin It