स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते तो न जाती स्वाइन फ्लू से जानें

स्वाइन फ्लू से मौतों के बाद भी अस्पतालों में इंतजाम नाकाफी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी केे अस्पतालों में स्वाइन फ्लू (एच1 एन1) से लडऩे के इंतजाम सही समय पर कर लिए जाते तो शायद इस बीमारी की चपेट में आने वाले तीन व्यक्तियों की जान बच जाती। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने करीब डेढ़ महीने पहले ही स्वाइन फ्लू को लेकर अस्पतालों में अलर्ट जारी कर दिया था। इसके बावजूद स्वाइन फ्लू को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया गया। आखिरकार बीमारी की चपेट में आने से तीन की मौत हो गई। एक किशोर जिन्दगी और मौत से जूझ रहा है।
अम्बेडकर नगर की एक किशोरी नए साल पर अपने रिश्तेदार से मिलने लखनऊ आई थी। यहां रहने के दौरान तेज बुखार और खांसी ने उसको जकड़ लिया। घरवालों ने उसे केजीएमयू में भर्ती कराया। चिकित्सकों की काउंसिंलिंग और पैथालाजी जांच में युवती में एच1 एन 1 वायरस की पुष्टि हुई। लेकिन केजीएमयू में ही इलाज के दौरान किशोरी की मौत हो गई। इसी प्रकार बीते दिसम्बर माह में महानगर स्थित नर्सिंग होम में भर्ती बाराबंकी निवासी एक युवक की मौत भी स्वाइन फ्लू से ही हुई थी। इसके अलावा 9 जनवरी को पीजीआई में भर्ती कानपुर की 35 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है। इसके बावजूद अस्पतालों में बीमारी से लडऩे से इंजताम नहीं हैं।

स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा भी नहीं
राजधानी के जाने-माने अस्पतालों में स्वाइन फ्लू बीमारी की जांच करने की सुविधा नहीं है। राममनोहर लोहिया, बलरामपुर और सिविल अस्पताल में आने वाले मरीजों के खून का सैम्पल जांच के लिए केजीएमयू और पीजीआई भेजा जाता है। इन तीनों बड़े अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के गंभीर मरीजों के लिए जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं होना गंभीर मामला है। जबकि इन अस्पतालों में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इनमें स्वाइन फ्लू का मरीज भी हो सकता है, जिसकी जानकारी नहीं होने पर अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा भी होता है।

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में जांच की नहीं है व्यवस्था
लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वाइन फ्लू जैसी घातक बीमारी से ग्रसित मरीजों के जांच की सुविधा नहीं है। जबकि लोहिया संस्थान में स्वाइन फ्लू जांच के लिए रीयल टाइम पीसीआर मशीन मौजूद है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ो के मुताबिक वर्ष 2015 से अब तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू से 34 मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि 1600 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि ïहो चुकी है।

नहीं है स्वाइन फ्लू से बचने के मास्क
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही चरम पर है। सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के वायरस से बचने के लिए मास्क तक उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण डॉक्टर और स्टाफ नर्स मरीजों का इलाज करने से घबरा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अस्पताल में भर्ती मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर डॉक्टर दोबारा मरीज को देखने नहीं जा रहे हैं। वहीं सिविल अस्पताल में भी एच1एन1 वायरस से बचाने वाले मास्क की कमी है। चिकित्सक सामान्य मास्क से काम चला रहे हैं।

केजीएमयू ने निशुल्क जांच से किया इंकार
केजीएमयू में स्वाइन फ्लू की जांच करने वाली किट खत्म हो गयी है। अस्पताल प्रशासन ने एक दो दिन में किट आने का दावा किया है। केजीएमयू प्रशासन स्वाइन फ्लू की जांचे नि:शुल्क करने से इंकार कर रहा है। इसलिए मरीजों को जांच कराने के लिए पीजीआई के माइक्रोबायॉलजी विभाग का चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बीते कई दिनों से केजीएमयू में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए आ रहे मरीजों को वापस भेजा जा रहा है। इसकी वजह केजीएमयू और पीजीअआ में स्वाइन फ्लू के सैंपल की अधिकता है। वहीं स्वाइन फ्लू के मरीज जांच के लिए प्राइवेट पैथॉलजी का रुख कर रहे हैं।

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