स्वास्थ्य निदेशालय के कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

स्वास्थ्य मंत्री के बयान के बाद कर्मचारियों में रोष

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। स्वास्थ्य भवन में आग लगने के मामले में एसटीएफ की रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य निदेशालय के कर्मचारियों में हडक़ंप मच गया है। गौरतलब है कि एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि स्वास्थ्य भवन में आग लगी नहीं थी बल्कि लगाई गई थी। एसटीएफ की ओर से आग लगाने में 6 डॉक्टरों व 14 बाबुओं पर शक भी जताया गया था। जिसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने बयान दिया था कि आग लगाने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों को निलंबित कर उन पर मुकदमा दर्ज किया जायेगा।

स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान के विरोध में स्वास्थ्य भवन में तैनात कर्मचारियों ने स्वास्थ्य परिवार कल्याण महानिदेशालय मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के बैनर तले धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया है।

धरने पर बैठे कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि गत 14 जून व पांच अगस्त को लगी आग के मामले में यदि किसी कर्मचारी का निलंबन, गिरफ्तारी हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमान प्रसाद यादव ने सोमवार से कार्य बहिष्कार की चेतावनी देते हुए यह कहा कि यदि हालत ऐसे ही रहे तो प्रदेश भर के समस्त स्वास्थ्य कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर देंगे। कर्मचारियों ने कहा कि 14 जून को जब आग लगी थी उस दिन सिर्फ चार कर्मचारी दीपक कुमार, जितेंद्र व कौशल तथा एक संविदा कर्मी ड्यूटी पर था। वहीं पांच अगस्त को लगी आग के बाद घोटाले के रिकार्ड जलने के नाम पर एसटीएफ जांच में 14 कर्मियों व छह अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही गलत है। क्योंकि जहां आग लगी वहां सिर्फ अधिष्ठान संबंधी रिकार्ड थे। जबकि घोटाले संबंधित कोई फाइल यहां नहीं थी। यहीं नहीं एसटीएफ ने सन् 1997 से एफओडी वन (मिनिस्ट्रियल संवर्ग) व एफओडी टू (पैरामेडिकल स्टाफ) में कार्यरत कर्मियों के रिकार्ड मांगे हैं जो कर्मियों का बेवजह उत्पीडऩ है। कर्मचारी यह भी तर्क देते दिखे कि आग शार्ट सर्किट से लगी। कर्मियों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक ने उनका पक्ष सही तरीके से नहीं रखा जिसके चलते अग्निकांड की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई। गत सात अगस्त को पैरामेडिकल अनुभाग में 12 बजे आग लगी, उसके बाद पूरे स्वास्थ्य भवन की वायरिंग बदली जा रही है जबकि पहले इसी वायरिंग को एनओसी दी गई थी।

डीजी हेल्थ को बचाने की कोशिश
धरना प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि डीजी हेल्थ को बचाने के चक्कर में शासन की ओर से निर्दोष कर्मचारियों को फंसाने की कोशिश की जा रही है।

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