स्वामी ने बदल लिये ’स्वामी‘, अब क्या करेंगी माया

  • भाजपा के केशव प्रसाद मौर्या का जवाब देंगे सपा के स्वामी प्रसाद मौर्या
  • प्रदेश में मौर्या वोट बैंक के लिए छिड़ी राजनीतिक पार्टियों में जंग
  • सिनोद शाक्य को मायावती दे सकती हैं बड़ी जिम्मेदारी

1प्रभात तिवारी

लखनऊ। स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपना स्वामी बदल लिया है। उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती से नाता तोडक़र अपने पुराने साथी और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से जुडऩे का फैसला कर लिया है। उनके इस फैसले से यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान मौर्या और कुशवाहा समुदाय के वोट बैंक को टार्गेट कर केशव प्रसाद मौर्या को प्रदेश अध्यक्ष बनाने वाली भाजपा के मंसूबों पर पानी फिर गया है। इतना ही नहीं बसपा सुप्रीमो मायावती भले ही स्वामी प्रसाद मौर्या के पार्टी छोडऩे को सुखद अनुभूति मान रहीं हो लेकिन उनकी पार्टी को भी आने वाले चुनाव में काफी नुकसान हो सकता है। जबकि 27 जून को होने वाले प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में स्वामी प्रसाद मौर्या को मंत्रीपद की शपथ दिलाए जाने की पूरी उम्मीद है।
बहुजन समाज पार्टी में लंबे समय से मायावती के बाद दो की कुर्सी के लिए खींचतान चल रही थी। इसमें सतीश चन्द्र मिश्रा, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्या और अशोक सिद्धार्थ समय-समय पर खुद को साबित करने की कोशिश करते रहे हैं। इन सबके बावजूद स्वामी प्रसाद मौर्या को पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष बनाया था, जिसकी वजह से खुद को माया का करीबी समझने वालों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्या की तरफ से लोकायुक्त की नियुक्ति के अलावा विभिन्न मसलों पर राज्यपाल और चीफ जस्टिस को पत्र लिखे जाने से लेकर टिकटों के बंटवारे से जुड़ी गतिविधियों को पार्टी के लिए खतरनाक बताने की कोशिश की जाती रही। शेष पेज 8 पर

स्वामी के जुडऩे से सपा को मिलेगा लाभ
बसपा से बाबूलाल कुशवाहा की विदाई के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या ही अपनी जाति के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं। स्वामी के पार्टी छोडऩे के यूपी में कोइरी और कुर्मी समुदाय (ओबीसी) के वोट बैंक पर अच्छा-खासा प्रभाव पडऩे की आशंका है। चूंकि स्वामी प्रसाद मौर्या, मौर्य-कुशवाहा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिसका वोट बैंक यूपी में करीब 8 फीसदी है। मौर्य व कुशवाहा जाति का फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, हरदोई, फर्रुखाबाद, इटावा, बदायूं, औरैया, कन्नौज, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, गोरखपुर, इलाहाबाद, देवरिया, मऊ जैसे जिलों में 7 से 10 फीसदी वोट बैंक है। यह वोट बैंक पार्टी से छिन सकता है। जबकि स्वामी प्रसाद मौर्या को पार्टी में जोडऩे में कामयाब रही सपा को इस समुदाय के वोट बैंक की बढ़त मिलेगी।

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