स्वदेशी तेजस विमान की क्षमता पर सवाल

कैग रिपोर्ट के मुताबिक 1999 में तय किया गया था कि युद्ध के लिए सज्जित रहने के लिए गोला बारूद सहित अन्य विभिन्न प्रकार की युद्ध सामग्री का 40 दिनों का भंडार बनाए रखा जाना चाहिए। 2013 की अवधि की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय थल सेना के पास 170 प्रकार की विभिन्न युद्ध सामग्री में से 125 का मात्र 20 दिनों तक के लिए ही पर्याप्त भंडार है जिसमें गोला बारूद उल्लेखनीय है।
55 प्रकार की युद्ध सामग्री का 10 से 20 दिनों तक चलने वाला भंडार है। इस प्रकार यदि युद्ध की नौबत आती है तो गोला बारूद का भंडार मात्र 20 दिनों तक ही चल सकता है।

डॉ. हनुमंत यादव
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट जिसे संक्षिप्त में कैग रिपोर्ट भी कहते हैं गत 8 मई को संसद में प्रस्तुत की गई। कैग रिपोर्ट के रक्षा, रेल तथा दूरसंचार मंत्रालय के 2013 तक की अवधि के कामकाज की कमियों की महत्वपूर्ण बातें समाचार पत्रों की सुर्खिया बन चुकी हैं। दूरसंचार मंत्रालय से संबधित कैग रिपोर्ट में रिलायंस जियो इंफोकाम को वॉयस कालिंग सेवा कारोबार की अनुमति दिए जाने को अनुचित करार दिया गया है। इस पर विस्तार से अन्य किसी दिन चर्चा करेंगे।
रक्षा मंत्रालय से संबंधित कैग की 2 रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की गई है। 63 पृष्ठों की पहली रिपोर्ट भारत में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान तेजस एल.सी.ए. की मार्क-1 की कमियों से संबंधित है तथा 30 पृष्ठोंवाली दूसरी रपोर्ट थलसेना में युद्ध सामग्री प्रबंधन की कमियों पर है जिसमें कहा गया है कि थल सेना के पास केवल 20 दिन तक के युद्ध का गोला बारूद है । 9 मई को समचार माध्यमों द्वारा थलसेना के पास 10 से 20 दिनों के लिए ही आयुध भंडार होने की रिपोर्ट सुर्खियां बनाए जाने के कारण आम लोगों के बीच यह सनसनीखेज समाचार बन गया।
कैग रिपोर्ट के मुताबिक 1999 में तय किया गया था कि युद्ध के लिए सज्जित रहने के लिए गोला बारूद सहित अन्य विभिन्न प्रकार की युद्ध सामग्री का 40 दिनों का भंडार बनाए रखा जाना चाहिए। 2013 की अवधि की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय थल सेना के पास 170 प्रकार की विभिन्न युद्ध सामग्री में से 125 का मात्र 20 दिनों तक के लिए ही पर्याप्त भंडार है जिसमें गोला बारूद उल्लेखनीय है। 55 प्रकार की युद्ध सामग्री का 10 से 20 दिनों तक चलने वाला भंडार है। इस प्रकार यदि युद्ध की नौबत आती है तो गोला बारूद का भंडार मात्र 20 दिनों तक ही चल सकता है। कैग रिपोर्ट में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड ओएफबी को जिम्मेदार ठहराया है। आम लोगों का इन समाचारों को पढक़र चिंतित होना स्वभाविक है। कुछ लोगों को लगने लगा कि कहीं ऐसा न हो कि गोला बारूद की कमी की जानकारी होते ही चीन व पाकिस्तान भारत के विरूद्ध एक महीना लम्बा युद्ध न छेड़ दें। इस संबंध में कुछ लोगों का कहना था कि चीन का रक्षा बजट भारत के रक्षा बजट से तीन गुना है। पाकिस्तान युद्ध सामग्री चीन से अधिक खरीदता है तथा उसके पास एक महीने से अधिक समय तक युद्ध के लिए गोला बारूद का भंडार है। इस दृष्टि से लोगों को भारत की फौजी तैयारी कमजोर नजर आती है।
तर्कों के आधार पर देखें तो 10 से 20 दिनों का गोला बारूद भंडार सीमित होने के समाचार से चिंतित होने या घबराने जैसी कोई बात नहीं है। भारत के 10 राज्यों में कुल 41 आर्डीनेंस फैक्टरियां हैं जो विविध प्रकार युद्ध सामग्री का उत्पादन करती हैं। यदि एक पाली की बजाय ये तीन पाली में उत्पादन कर सेना को आयुध की निर्बाध पूर्ति बनाए रखे तो युद्ध लम्बा खिंचने पर भी सेना को गोला बारूद की कमी होने की संभवना नहीं है। इसके अतिरिक्त अनेक विदेशी आयुध सामग्री निर्माता कम्पनियां मात्र 10 दिन के निधार्रित रेट के क्रयादेश पर आयुध की त्वरित पूर्ति के लिए आतुर बैठी रहती हैं, क्योंकि मुनाफा कमाने का उन्हें युद्ध ही अवसर प्रदान करता है। उनसे अग्रिम एग्रीमेंट किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात तो यह आजकल 20 दिन तक घोषित युद्ध नहीं चलता है, मात्र 2 या 3 दिन में युद्ध विराम हो जाता है। इसलिए 20 दिनों के लिए ही गोला बारूद भंडार होने के समाचार देशवासियों के लिए चिंता का सबब नहीं होना चाहिए।
भारत में निर्मित हल्का लड़ाकू विमान तेजस एल.सी.ए. की मार्क-1 से संबंधित 63 पेज की कैग रिपोर्ट में गिनाई गई कमियां अवश्य ही गंभीर एवं चिंतनीय हैं। इस रिपोर्ट में तेजस की 53 कमियां गिनाते हुए इसकी इलेक्ट्रानिक युद्ध क्षमता पर सवाल उठाए गए हैं। भारत में स्वदेश में निर्मित लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट वर्ष 1983 में प्रारम्भ हुई थी उस समय इसकी लागत 560 करोड़ रुपए आंकी गई थी जो वर्ष 2013 में बढक़र 10397 करोड़ रुपए पहुंच गई। जगह की कमी के कारण तेजस में सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर जैसी युद्धक क्षमता भी नहीं हैं। तेजस की डिलवरी में विलम्ब की वजह से वायुसेना को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है जिस पर 20,037 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
कैग रिपोर्ट के अनुसार तेजस एल.सी.ए. मार्क-1 थलसेना के लिए दुखती रग साबित हुआ है । अपेक्षा है कि एल.सी.ए. की मार्क-1 की कमियां एल.सी.ए. की मार्क-2 में वर्ष 2018 तक दूर कर ली जाएंगी । आश्चर्य की बात है कि संसद में तेजस एल.सी.ए. मार्क-1 जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होने की बजाय विरोधी सांसदों के लिए ऊर्जा मंत्रालय की रिपोर्ट का वह अंश महत्वपूर्ण हो गया है जिसमें कहा गया है कि पीएसकेएल कम्पनी ने ब्याज सब्सिडी की शर्तो का पालन नही किया । इस प्रकरण से बहुत पहले केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी इस कम्पनी के बोर्ड में शामिल थे, इसलिए उनसे त्यागपत्र की मांग की जा रही है । वर्ष 2013 में नितिन गडकरी न तो केन्द्र सरकार में न ही महाराष्ट्र की सरकार में मंत्री थे । ं
कैग रिपोर्ट के अनुसार लौह अयस्क के परिवहन में रेलवे द्वारा दोहरी माल भाड़ा नीति सही ढंग से न अपनाए जाने के कारण रेलवे को मई 2008 से सितम्बर 2013 के दौरान 29 हजार करोड़ रुपए का नकुसान उठाना पड़ा। रेलवे द्वारा निर्यात किए जाने वाले लौह अयस्क पर दुगुना भाड़ा क्यों नहीं लिया इसका परीक्षण जरूरी है। कैग रिपोर्ट के अनुसार रेलवे को वर्ष 2008-09 से 2012-13 की पांच साल की अवधि में यात्री सेवा के परिचालन में 11 हजार करोड़ का घाटा हुआ है। सही बात तो यह है कि केवल उक्त पांच साल की अवधि ही नही रेलवे को यात्री टिकट दर कम रखने के कारण यात्री सेवाओं के परिचालन में सदैव घाटा होता रहा है, खासकर महानगरीय लोकल गाडिय़ों के परिचालन में आधी परिचालन लागत भी नही निकल पाती है । पहले तो कोई भी रेलमंत्री लोकल ट्रेनों के मासिक पास की दर में वृद्धि करने की हिम्मत नहीं कर पाता है। यदि कोई रेलमंत्री रेलबजट में मासिक सीजन टिकट पास भाड़े में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखता भी है तो उसको भारी विरोध के कारण प्रस्ताव वापस लेना पड़ता है । अंतत: रेलमंत्री को घाटा कम करने के लिए माल भाड़े में वृद्धि का सहारा लेना पड़ता है जिससे वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है जिसके परिणामस्वरूप मुद्रा स्फीति बढ़ती है तथा उसका भार पूरे देश भर के आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ता है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कैग द्वारा यात्री सेवा परिचालन में घाटे के लिए रेलवे को कुसूरवार ठहराना उचित नहीं कहा सकता। इसका एक ही उपाय है कि यदि कैग सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से रेलवे को यात्री भाड़ा वृद्धि का आदेश दिलवाए तभी यात्री सेवा परिचालन घाटा कम करना सम्भव है।
वित्त मंत्रालय द्वारा विकास एवं लोक कल्याण कार्यक्रमों के लिए अधिक आबंटन के कारण रक्षा मंत्रालय को उसकी मांग के अनुसार धन आबंटन संभव नहीं हो पा रहा है । इसी कारण से 40 दिनों तक पारी रहने वाले युद्ध हेतु भंडार रखा जाना संभव नहीं हो पा रहा है । इसके लिए रक्षा मंत्रालय को दोषी ठहराना सही नहीं है । यदि भारत की सभी 41 आर्डिनेंस फैक्ट्रियों का आधुनिकीकरण करके उन्हें भारतीय सेना के समय पर आयुध मांग की निरंतर व जरूरत अनुसार पूर्ति के लिए सक्षम बना दिया जाता है तो थल सेना के पास 40 दिनों का गोला बारूद का भंडार रखना जरूरी नहीं है। इसलिए हमारा सुझाव यह है कि 40 दिनों के युद्ध के लिए गोला बारूद का भंडार व्यवस्था की बजाय 20 दिनों के लिए युद्ध सामग्री प्रबंधन की व्यवस्था की नीति बनायी जानी चाहिए ।

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