स्वच्छ भारत मिशन में लापरवाही

ऐसी अनेक समस्याएं हैं जो स्वच्छ भारत मिशन योजना के सफल होने में रोड़ा अटका रही हैं। इस अभियान को सफल बनाने में न तो नौकरशाही पर्याप्त सक्रियता दिखा रही है और न ही वह विभाग और संस्थाएं जिन पर यह विशेष जिम्मेदारी है और न ही आम जनता

sanjay sharma editor5प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर सफाई अभियान के बारे में चर्चा की। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस अभियान को आगे बढ़ाएं। पिछले साल जब स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई थी तो लोगों ने बढ़-चढक़र हिस्सा लिया और इसे सफल बनाने का संकल्प लिया। जितनी सक्रियता से लोगों ने इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया था, अब वह सक्रियता नहीं दिख रही है। प्रधानमंत्री ने अपने इस अभियान की शुरुआत करते हुए यह स्पष्ट किया था कि यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं। यह देश का अभियान है और इसे सफल बनाने के लिए हर किसी को सक्रियता दिखानी होगी, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसा नहीं हुआ। यह महत्वाकांक्षी योजना दरअसल पहले की सरकार के केंद्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम (1986-1999) और संपूर्ण स्वच्छता अभियान (1999) का बदला हुआ रूप है। संपूर्ण स्वच्छता अभियान का नाम 2012 में बदल कर निर्मल भारत अभियान कर दिया गया था। यह साफ है कि तमाम शोर-शराबे और जोश-खरोश के बावजूद इस कार्यक्रम में भी वही गलतियां दोहराई जा रही हैं जो इस तरह के पहले के कार्यक्रमों में की गई थीं। निर्मल भारत अभियान की तरह ही स्वच्छ भारत मिशन को भी काफी तडक़-भडक़ के साथ शुरू किया गया। इसके तहत 2019 तक 9 करोड़ 80 लाख यानी प्रति मिनट 46 शौचालय बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।
लेकिन 2014-15 के दौरान प्रति मिनट 11 शौचालय ही बनाए गए। इसका मतलब यह हुआ कि इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो साल 2032 से पहले लक्ष्य हासिल नहीं हो पाएगा। ऐसी अनेक समस्याएं है जो स्वच्छ भारत मिशन योजना के सफल होने में रोड़ा अटका रही हैं। इस अभियान को सफल बनाने में न तो नौकरशाही पर्याप्त सक्रियता दिखा रही है और न ही वह विभाग और संस्थाएं जिन पर यह विशेष जिम्मेदारी है और न ही आम जनता। घर-बाहर और सार्वजनिक स्थलों में गंदगी फैलाना एक प्रवृत्ति है और इस प्रवृत्ति ने सभी को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थिति यह है कि लोग गंदगी के बारे में शिकायत भी करते हैं और उसे दूर करने में कोई सहयोग देने के लिए तैयार भी नहीं होते। यदि यह सोचा जा रहा है कि प्रधानमंत्री अथवा केंद्रीय सत्ता अपने बलबूते गंदगी को दूर करने में सफल हो जाएगी तो ऐसा होने वाला नहीं है। यह एक ऐसा काम है जिसमें सभी को अपना योगदान देने के लिए आगे आना होगा। ऐसा इसलिए और भी आवश्यक है, क्योंकि गंदगी ने केवल भारत की छवि को ही खराब करने का काम नहीं किया है, बल्कि वह तमाम समस्याओं की जड़ भी बन गई है।

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