स्वच्छ भारत अभियान-एक सकारात्मक चुनौती

डॉ. अवधेश कुमार पाण्डेय
स्वच्छता सुखी और जीवन की आधार शिला है। स्वच्छता अपनाने से व्यक्ति रोग मुक्त रहता है और एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देता है अत: हर व्यक्ति को जीवन मे स्वच्छता अपनानी चाहिए और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। स्वच्छ वातावरण के अभाव में लोग अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं तथा वायु, मृदा, जल एवं पर्यावण की शुद्धता भी प्रभावित होती है। स्वच्छता मानव जीवन का नैसॢगक गुण है तथापि कई लोगों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई देती है। यदि स्वच्छता एवं आदर्श जीवन शैली को आदत में लाया जाये तो गंदगी को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। नियमित तौर पर स्वच्छता अपनाने से लोगों में इसके प्रति आदत का विकास हो जाता है। अभिभावकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों में बचपन से ही ऐसे संस्कार विकसित करें जो उनके भावी जीवन की दिशा एवं दशा को उपयुक्त माहौल दे सके। परिवार के साथ ही विद्यालयी संस्कार भी बच्चों की आदतों एवं स्वच्छता मूल्यों के स्थायी संयोजन के लिए नियोजित कार्यक्रम अपना सकते हैं। यह प्रत्येक परिवार एवं विद्यालयों की मुख्य एवं अनिवार्य जिम्मेदारी भी है।
प्रधानमत्री नरेन्द्रमोदी द्वारा स्वच्छता पर चलाया गया अभियान ‘स्चच्छ भारत अभियान’ एक सराहनीय प्रयास है। भारत के प्रत्येक नागरिक को चाहिए कि इस अभियान में शामिल हो तथा इसके लक्ष्य एवं उद्ïदेश्यों को प्राप्त करने के लिए अपना अमूल्य योगदान भी दे। स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के तहत देश के प्रत्येक गांव एवं शहर को स्वच्छता कार्यक्रम से जोड़ा गया है। इस कार्यक्रम के अन्र्तगत सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, सडक़ों, रेलवे एवं बस स्टेशन तथा पार्कों की सफाई के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शैाचालयों के निर्माण पर जोर दिया गया है। भारत सरकार द्वारा इस कार्यक्रम को क्रान्ति के रूप में शुरू करने के पीछे देश के बुुनियादी ढांचे में बदलाव के साथ ही दुनिया के सामने एक आदर्श की स्थापना करने का भी प्रयास किया गया है। इस अभियान का देश के सभी नागरिकों ने स्वागत किया है तथा स्कूलों में शिक्षकों एवं छात्रों में पूर्ण उत्साह एवं उल्लास का प्रदर्शन देखने को मिला है साथ ही सामाजिक समुदायोंं एवं युवाओं ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों जैसे फेसबुक, व्हाट्ïसएप, ट्ïिवटर आदि के माध्यमों से भी कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में अपना काफी योगदान दिया है।
दुनिया के कई देशों ने विकास परक परियोजनाओं के साथ ही पर्यावरण संरक्षा, हरियाली एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में कार्य किया है इसमें आइसलैंड, स्वीडन, कोस्टारिका, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, जैसे देशों का नाम लिया जा सकता है। मारीशस में स्वच्छता एवं पर्यावरण पर अधिकाधिक ध्यान देने के कारण ही प्रत्येक वर्ष लाखों सैलानी वहां जाना पसंद करते हैं। नार्वे ने पर्यावरण प्रदूषण एवं गिरते स्वास्थ्य स्तर को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025 तक पेट्रोल एवं डीजल कारों पर प्रतिबंध लगाने एवं वनों के कटाव को पूरी तरह से रोकने का फैसला किया है। क्यूबा की साफ-सफाई, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु उठाये कदम यही संदेश देते हैं कि स्वच्छता अपनाने तथा वनों एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए विकसित देश होना एक अनिवार्य शर्त नहीं है।
आजादी के बाद हमारी सरकार ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर अधिकाधिक ध्यान दिया है तथा गंदगी एवं प्रदूषण से होने वाली बीमारियों जैसे कालरा, मलेरिया, टायफाइड, डायरिया, फूड प्वॉइजनिंग, एथलीट फूट आदि की रोकथाम नहीं हो पा रही है। गंदगी तथा जलभरावों के कारण यह बीमारियां अनियंत्रित रूप धारण कर लेती हैं और अनेकों लोगों की मौत का कारण बनती है। सरकारी नीतियों के निर्माण एवं शासकीय कार्यक्रमों में धनराशियों के अधिक आवंटन के पश्चात भी लोंगों के स्वच्छता पर अपेक्षित ध्यान न देने के कारण सरकारी प्रयास अपने उद्ïदेश्यों को प्राप्त करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाते।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का यह विचार था कि आजादी से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण स्वच्छता है। अब जब इस अभियान की शुरूआत हो चुकी है, यह जरूरी है कि स्वच्छता को नियमित रूप से अपनाया जाये। सरकार को चाहिए कि वह कचरे को जैविक खाद और ऊर्जा के रूप में परिवर्तित करने संबंधी उपयुक्त प्रणाली विकसित करे ताकि ठोस एवं तरल कचरों का निपटान किया जा सके। इस कार्य में विभिन्न समुदायों सहित ग्राम पंचायतों, जिला परिषद और पंचायत समिति की मदद ली जा सकती है। सरकार को उन स्थलों पर सामुदायिक शौचालयों का भी निर्माण करना होगा जहॉ घरेलू स्तर पर शौचालयों की उपलब्धता नही है। विद्यालय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन सुनिश्चित किया जाना चाहिए जैसे पोस्टर बनाना, निबंध लेखन, कविता पाठ, पेन्टिंग बनाना, समूह चर्चा, वीडियो, भाषण प्रतियोगिता आदि । सफाई क्रियाकलाप एवं स्वच्छता पर नाटक का मंचन बच्चों में अपेक्षित जागरूकता की भवना का विकास कर सकते हैं।
स्वच्छता से हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। यह एक अच्छी आदत है जो हमारी जीवनशैली में उपयुक्त बदलाव लाकर हमारे जीवन को बेहतर बना सकती है। आवश्यकता है इसे अपनाने की और पूरा जीवन उसका पालन करने की। साफ , स्वच्छ पर्यावरण स्वस्थ शरीर, मन की एकाग्रता एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है एवं व्यक्ति की जीवन प्रत्याशा में अभिवृद्वि कर उसमें खुशहाली का संचार करता है।

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